आगरालीक्स… ( 21 July ) । आगरा के क्रिकेटर दीपक चाहर ने श्रीलंका को दूसरे वन-डे में शिकस्त देकर इतिहास रच दिया है। दीपक के इस मुकाम पर पहुंचने का सफर इतना आसान भी नहीं रहा है लेकिन जुनून ही था कि वह इस मुकाम तक पहुंच सके हैं।
बचपन से देखा सपना हुआ पूराः दीपक चाहर
श्रीलंका के जबड़े से जीत छीनने वाले दीपक चाहर ने आठवें विकेट के लिए शानदार 69 रन बनाने के साथ दो विकेट भी लिए, इसके लिए उन्हें मैन ऑफ द मैच भी घोषित किया गया। जीत के बाद उन्होंने कहा कि वह बचपन से सपना देखते आए थे कि वह इंडिया के लिए ऐसी मैच विनिंग पारी खेल सकूं, इसमें वह आज कामयाब रहे और मौका मिलने पर इसे साबित किया। इसके लिए वह अपनी बल्लेबाजी पर भी फोकस करते हैं।
क्रिकेटर दीपक चाहर अपने पिता लोकेंद्र चाहर को ही अपना कोच मानते हैं। ग्रेग चैपल ने एक बार दीपक की गेंदबाजी देखकर उन्हें खेलने लायक नहीं समझा था लेकिन अपनी मेहनत पर इस मुकाम तक पहुंचे हैं।
2010 की है. महीना नवंबर का. दीपक अब 18 साल के हो चुके थे. जिन्हें क्रिकेटर न बन पाने की तोहमत मिली थी वो अब राजस्थान की रणजी टीम का हिस्सा बन चुके थे. पहला मैच खेलने जा रहे थे. स्टार बनने जा रहे थे।
सफलता का स्वाद
हैदराबाद के खिलाफ खेले गए इस मैच में दीपक ने 8 विकेट चटकाए. मात्र 7.3 ओवर में. रन दिए खाली 10. उसमें भी 2 ओवर मैडन. हैदराबाद की लंका लग गई थी. पूरी टीम 21 रनों के स्कोर पर पवेलियन लौट चुकी थी. 78 मिनट भी नहीं लगे थे इस घटना के घटने में. इतिहास बनने में. ये रणजी ट्रॉफी का तब तक का किसी टीम का सबसे कम स्कोर था. 76 साल बाद ये रिकॉर्ड टूटा था. माने पहले ये रिकॉर्ड बना था 1934-35 के रणजी सीजन में. भाग्य फूटा था दक्षिण पंजाब का. उसने नॉर्थ इंडिया के खिलाफ 114 रनों का पीछा करते हुए 22 रन बनाए थे। आईपीएल में अब तक का सीजन दीपक के लिए अच्छा रहा है.