आगरालीक्स…आगरा कॉलेज में ‘प्राचार्य’ की रार: प्राचार्य प्रो. सीके गौतम बोले—अपनी नियुक्ति के फर्जी दस्तावेज छुपा रहे डॉ. अनुराग शुक्ला
आगरा कॉलेज में ‘प्राचार्य’ प्रकरण खूब गहराता जा रहा है. पूर्व और वर्तमान प्राचार्य के बीच आरोप—प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है. आज वर्तमान कार्यवाहक प्राचार्य प्रा. सीके गौत्म ने कहा कि निलंबित प्राचार्य डॉ. अनुराग शुक्ला अपनी अक्षमता, गंभीर वित्तीय अनियमिताओं और अपनी नियुक्ति के फ़र्ज़ी दस्तावेजों को छुपाने के लिए अनर्गल आरोप लगा रहे हैं.
मंगलवार को प्रेस कांफ्रेंस में कार्यवाहक प्राचार्य प्रो. सीके गौतम ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति ग़लत कूटरचित दस्तावेज के आधार पर या झूठे तथ्य प्रस्तुत कर नियुक्ति पाता है तो यह आपराधिक कृत्य है. शासन को यह अधिकार है कि सक्षम एजेंसियों से उसकी जाँच कराये और ग़लत पाए जाने पर शासन निलंबन सहित उसके ख़िलाफ़ आपराधिक मुक़दमा की करवाई भी कर सकती है.
उन्होंने कहा कि शासन की उच्च स्तरीय समिति ने डॉ० अनुराग शुक्ल से प्राचार्य पद के लिए आवश्यक उनकी शैक्षणिक अर्हताओं और संलग्न दस्तावेज़ों के सत्यापन एवं प्रमाणीकरण हेतु साक्ष्य माँगे थे जिसे डॉ अनुराग शुक्ल नहीं प्रस्तुत कर पाये थे. जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर शासन ने गंभीर आरोपों की आगे जांच कराये जाने की आवश्यकता समझते हुए जाँच की प्रक्रिया निष्पक्ष एवं शुचितापूर्ण हो इसलिए प्रबंध समिति अध्यक्ष को निर्देश दिया कि जाँच अवधि में निलंबित रखते हुए प्रबंध समिति और शासन द्वारा जाँच संपन्न कराई जाय. उन्होंने कहा कि निदेशक उच्च शिक्षा द्वारा संस्तुत किए जाने के बाद प्रत्येक प्रबंध तंत्र नियोक्ता होने के नाते इसी शासन के आदेश में विश्वविद्यालय अधिनियम के प्रावधान जिसमें यह व्यवस्था है कि निलंबित प्राचार्य के स्थान पर पहले तीन माह तक कॉलेज के शिक्षकों में किसी भी प्रतिस्थानी को प्राचार्य का प्रभार दिया जा सकता है – मुझे कार्यवाहक प्राचार्य का प्रभार दिया गया है.
प्रो. सीके गौतम ने कहा कि निलंबन के बाद डॉ० अनुराग शुक्ल ऐसा प्रतीत होता है कि व्यक्तिगत दुर्भावना एवं द्वेष के कारण उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय के विरुद्ध अनर्गल आरोप लगाए और उन्होंने न केवल प्राचार्य के रूप में सेवा नियमावली का उल्लंघन किया है बल्कि शासकीय पदधारक मंत्री की अवमानना का कार्य किया है. उन्होंने ये भी कहा कि उच्च न्यायालय के निर्णय में डॉ. अनुराग शुक्ल के संबंध में जो भी निर्णय दिया है उसपर कोई टिप्पणी न करते हुए मैं सिर्फ़ इतना कहूँगा कि कोर्ट के आदेशों के अनुक्रम में जो भी आदेश शासन और प्रबंध समिति द्वारा दिया जायेगा – मैं उसका अक्षरशः पालन करूँगा.
उन्होंने कहा कि डॉ अनुराग शुक्ल को निलंबित किए जाने के बाद मेरे द्वारा और अध्यक्ष प्रबंध समिति मंडलायुक्त द्वारा स्पष्ट आदेश- कि वे कॉलेज के सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज अपने निजी क़ब्ज़े में न रख कार्यवाहक प्राचार्य को इसका प्रभार दें – उन्होंने शासन और कमिश्नर के निर्देशों की लगातार अवहेलना की है. अनेक रिमाइंडर देने के बावजूद उन्होंने अनेक महत्वपूर्ण दस्तावेज अभी भी निजी क़ब्ज़े में रखे हैं. यह नियोक्ता के आदेशों की बार बार अवहेलना है.
उच्च शिक्षा मंत्री के प्रयासों से आगरा कॉलेज बोर्ड ऑफ़ ट्रस्टीज़ का गठन हो चुका है तथा इसकी परिचय बैठक मंत्री के साथ डाक बँगले पर हो चुकी है. आगे शीघ्र ही पूरे ट्रस्ट की बैठक बुलाकर संविधान के अनुरूप प्रबंध समिति में ट्रस्ट के पाँच नॉमिनी नामित किए जाएँगे. उन्होंने कहा कि आगरा कॉलेज दो सौ वर्ष पूरे कर चुका है. मैं इस महायज्ञ में जो कुछ भू आहुति दे पाऊँगा स्वयं को धन्य समझूँगा. मेरा यह भी प्रयास होगा कि ट्रस्ट, प्रबंध समिति, आगरा का नागरिक समाज और प्रदेश शासन के सहयोग से आगरा कॉलेज को आवासीय केंद्रीय अथवा कम से कम राज्य विश्वविद्यालय का दर्जा हासिल हो.
प्रेस वार्ता में प्रमुख रूप से आगरा कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर सी के गौतम, उप प्राचार्य डॉ पीबी झा, प्रोफेसर भूपाल सिंह, शशिकांत पांडे, प्रोफेसर विजय कुमार सिंह, प्रोफेसर के के सिंह, प्रोफेसर शरद चंद भारद्वाज, प्रोफेसर प्रियम अंकित, डॉ भूपेंद्र चिकारा, डॉ गौरव कौशिक, प्रोफेसर एसके दुबे, डॉ पीके दीक्षित, दिग्विजय पाल सिंह, डॉ सारिका यादव, डॉ दिनेश मौर्य आदि शिक्षक उपस्थित रहे.