आगरालीक्स…एआई से सशक्त होगा रेडियो, आरजे की प्रतिभा को निखारेगा. आगरा में “नई सोच का रेडियो: एआई, आरजे और डिजिटल भविष्य” पर हुई संगोष्ठी
विश्वविद्यालय के सामुदायिक रेडियो केंद्र सामुदायिक रेडियो 90.4 आगरा की आवाज़ द्वारा “Radio Reimagined: AI, RJs & the Digital Future (नई सोच का रेडियो: एआई, आरजे और डिजिटल भविष्य)” विषय पर एक प्रेरक सेमिनार का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम कुलपति प्रो. आशु रानी के कुशल संरक्षण एवं मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम की थीम – Where Technology Meets Talent, Where AI Powers the Airwaves, Where Outreach Helps in Connect – ने स्पष्ट किया कि भविष्य का रेडियो केवल आवाज नहीं, बल्कि तकनीक, प्रतिभा और समाज के बीच सेतु का कार्य करेगा।
एआई और तकनीक से सशक्त होता रेडियो
एआई टेक एक्सपर्ट इंजीनियर तरुण श्रीवास्तव ने अपने वक्तव्य में बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आज रेडियो प्रसारण को नई दिशा दे रहा है। उन्होंने समझाया कि कैसे एआई आधारित ऑटोमेशन, वॉइस क्लोनिंग, कंटेंट एनालिटिक्स और श्रोता व्यवहार विश्लेषण रेडियो को अधिक प्रभावी और इंटरैक्टिव बना रहे हैं। उन्होंने कहा, “एआई रेडियो की जगह नहीं लेगा, बल्कि आरजे की प्रतिभा को और निखारेगा। यह तकनीक को मानवीय संवेदनाओं से जोड़ने का माध्यम है।”

लोकप्रिय आरजे का अनुभव: आवाज जो दिल से जुड़ती है
Radio City 91.9 FM Agra के आरजे पंचायती राज ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि डिजिटल युग में भी श्रोताओं से भावनात्मक जुड़ाव ही रेडियो की असली ताकत है। उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा, “रेडियो सिर्फ स्क्रिप्ट पढ़ना नहीं है, यह लोगों की भावनाओं को समझना और समाज की नब्ज पकड़ना है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के साथ रेडियो की पहुंच और भी व्यापक हुई है।”
सामुदायिक रेडियो: समाज से सीधा संवाद
सामुदायिक रेडियो विशेषज्ञ प्रोग्रामिंग हेड एवं जनसम्पर्क अधिकारी पूजा सक्सेना ने बताया कि सामुदायिक रेडियो ग्रामीण और शहरी समाज के बीच संवाद का सशक्त माध्यम है। उन्होंने “Outreach Helps in Connect” की अवधारणा को विस्तार देते हुए कहा कि जब रेडियो समाज के बीच जाकर उनकी समस्याओं और उपलब्धियों को आवाज देता है, तभी वह वास्तविक परिवर्तन का माध्यम बनता है। उन्होंने विशेष रूप से “ओपीडी ऑन व्हील्स” जैसी आउटरीच गतिविधियों का उल्लेख किया, जिनमें विद्यार्थियों की सक्रिय भूमिका रही।
विद्यार्थियों का सम्मान: सेवा और समर्पण की सराहना
कार्यक्रम में फार्मेसी विभाग के अनेक छात्र-छात्राओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई। आउटरीच गतिविधि “ओपीडी ऑन व्हील्स” में उत्कृष्ट सहयोग के लिए उन्हें सामुदायिक रेडियो की ओर से प्रशंसा प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। यह सम्मान विद्यार्थियों के सामाजिक उत्तरदायित्व और सेवा भावना का प्रतीक रहा। कार्यक्रम में छात्रों ने विशेषज्ञों से उत्सुकता पूर्वक सवाल जवाब भी किया. रेडियो निदेशक प्रो. अर्चना सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि विश्व रेडियो दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्ममंथन का अवसर है। उन्होंने कहा, “रेडियो अब पारंपरिक माध्यम नहीं रहा; यह डिजिटल प्लेटफॉर्म, पॉडकास्ट, एआई और सोशल मीडिया के साथ मिलकर नई संभावनाओं का संसार बना रहा है। हमारा लक्ष्य है कि ‘आगरा की आवाज’ विश्वविद्यालय की विशिष्ट पहचान बने।” कार्यक्रम में डॉ. प्रतिभा मिश्रा सहित अनेक छात्र स्वयंसेवकों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कुलपति प्रो. आशु रानी के संरक्षण में आयोजित इस सेमिनार ने यह संदेश दिया कि जब तकनीक और प्रतिभा का संगम होता है, तब रेडियो केवल सूचना का माध्यम नहीं, बल्कि समाज परिवर्तन का उपकरण बन जाता है। विश्व रेडियो दिवस 2026 पर “आगरा की आवाज” ने यह सिद्ध किया कि सामुदायिक रेडियो नई सोच, नवाचार और सामाजिक जुड़ाव के साथ भविष्य की ओर अग्रसर है। यह आयोजन न केवल तकनीक और प्रतिभा का उत्सव था, बल्कि युवाओं के सपनों और समाज की आवाज को सशक्त बनाने का संकल्प भी।