आगरालीक्स.. जीवन का रक्षा कवच हैं भगवान गणेश के 12 नाम। इन नामों के लेने से मनोकामना पूरी होती है। यह नाम सुनकर श्री गणेश विशेष प्रसन्न होते हैं।
इस तरह से करें पूजा
श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान गुरु रत्न भंडार वाले ज्योतिषाचार्य पंडित हृदयरंजन शर्मा के मुताबिक श्री गणेश के 12 पवित्र नाम। इन्हें श्री गणेश के सामने धूप व दीपक लगाकर बोलें –
गणपर्तिविघ्रराजो लम्बतुण्डो गजानन:।
द्वेमातुरश्च हेरम्ब एकदन्तो गणाधिप:।।
विनायकश्चारुकर्ण: पशुपालो भवात्मज:।
द्वाद्वशैतानि नामानि प्रातरुत्थाय य: पठेत्।।
विश्वं तस्य भवे नित्यं न च विघ्नमं भवेद् क्वचिद्।
🏵सुमुख – सुन्दर मुख वाले : – भगवान गणेश का बहुत सुंदर चेहरा भगवान शिव एवं माता पार्वती के तेज के कारण है जिसकी मुनियों ने वैज्ञानिक व्याख्या की है । भगवान गणेश का शरीर सूरज की तरह चमकदार होना बताया गया और चन्द्र मंडल में प्रवेश भी चंद्रमा की तरह शीतल होना दर्शाता है. चंद्रमा को सौंदर्य के भगवान के रूप में जाना जाता है। चन्द्र मंडल में प्रवेश करने पर, यह भगवान में चमकदार अनुभाग गणेश उसके साथ चंद्रमा के सभी प्रमुख विशेषताओं के साथ जीवन के लिए आया था, और इसलिए नाम सुमुख दिया गया था।
💥एक दन्त – एक दांत वाले : – भगवान श्री गणेश जी की कोई प्रतिमा देखेंगे तो उसमे पाएंगे कि उनका एक दन्त खंडित है उनके एकदंती होने के पीछे एक कथा है । इस कथा के अनुसार तीनों लोकों की क्षत्रिय विहीन करने के पश्चात परशुराम जी अपने गुरुदेव भगवान शिव जी और गुरु माता से मिलने कैलाश पर्वत पहुंचे उस समय भगवान शिव जी विश्राम कर रहे थे और भगवान श्री गणेश जी द्वार पर पहरेदार के रूप में बैठे थे । द्वार पर भगवान श्री गणेश को देख कर परशुराम जी ने उन्हें नमस्कार किया और अन्दर के ओर जाने लगे , इस पर भगवान श्री गणेशजी ने उनको अन्दर जाने से रोका । धीरे धीरे दोनों के मध्य विवाद बढ़ता चला गया । परशुराम जी ने अपने अमोध फरसे को , जो की उनको श्री शिव भगवान ने दिया था , चला दिया ।फरसे के वार से भगवान गणेश जी का एक दन्त खंडित हो गया द्य तब से भगवान गणेशजी एकदंत के नाम से भी जाने जाते हैं ।
🌷कपिल : – जिनके श्री विग्रह से नीले और पीले वर्ण की आभा का प्रसार होता हैजिनके श्री विग्रह से नीले और पीले वर्ण की आभा का प्रसार होता है। ग्रे रंग का एक विशेषण साधन है शक्की ग्रे रंग की गाय कपिला कहा जाता है गाय इसी प्रकार भगवान गणेश के रूप में ज्ञान और दूध के रूप में ज्ञान के रूप में दही घी देता है वह रंग में ग्रे है, हालांकि आदि घी दूध, दही, जैसे उत्पादों देकर उसे स्वस्थ रखने के लिए एक आदमी की जरूरतों को संतुष्ट अभिव्यक्ति की। उन्होंने कहा कि आदमी को स्वस्थ बनाता है उसके सभी बुराइयों को नष्ट कर देता है और अपनी चिंताओं से दूर साफ करता है।
🌟 गजकर्णक – हाथी के कान वाले : – श्री गणेश लंबे एवं बड़े कानों वाले हैं। उनका एक नाम गजकर्ण भी है। लंबे कान वालों को भाग्यशाली भी कहा जाता है। श्री गणेश तो भाग्य विधाता और शुभ फल दाता हैं। गणेश जी के कानों से यह संदेश मिलता है कि मनुष्य को सुननी सबकी चाहिए, लेकिन अपने बुद्धि विवेक से ही किसी कार्य का क्रियान्वयन करना चाहिए।गणेश जी के लंबे कानों का एक रहस्य यह भी है कि क्षुद्र कानों वाला व्यक्ति सदैव व्यर्थ की बातों को सुनकर अपना ही अहित करने लगता है। इसलिए व्यक्ति को अपने कान इतने बड़े कर लेने चाहिए कि हजारों निन्दकों की भली-बुरी बातें उनमें इस तरह समा जाए कि वे बातें कभी मुंह से बाहर न निकल सकें।
🌻 लम्बोदर – लम्बे उदर (पेट) वाले : – भगवान् श्री गणेश का लम्बोदर अवतार सत्स्वरूप तथा ब्रह्मशक्ति का धारक है, भगवान लम्बोदर को क्रोधासुर का वध करने वाला तथा मूषक वाहन पर चलने वाला कहा जाता है।
🔥विकट – सर्वश्रेष्ठ : – भगवान श्रीगणेश को विकट नाम से भी जाना जाता है। दरअसल यह बप्पा के एक अवतार का नाम है। उन्होंने यह अवतार कामासुर के संहार के लिए लिया था।
🌹विघ्ननाश-विघ्नों (संकटों )का नाश करने वाले : -सर्वप्रथम भगवान श्री गणेश जी का स्मरण किया जाता है। जिस कारण इन्हें विघ्नेश्वर, विघ्न हर्ता कहा जाता है। इनकी उपासना करने से सभी विघ्नों का नाश होता है तथा सुख-समृद्ध व ज्ञान की प्राप्ति होती है। विघ्नेश्वरनामक एक दैत्य का वध करने के कारण ही इसका नाम श्विघ्नेश्वर विनायकश् हुआ था।
🌸विनायक विशिष्ट नायक : -विनायक विशिष्ट नायक या स्वामी भगवान गणेश का नाम है। भगवान गणेश विघ्नकर्ता और हर्ता दोनों हैं। कहा जाताहैभगवान गणेश की परिक्रमा कर के पूजा की जानी चाहिए।परिक्रमा करते वक्त अपनी इच्छाओं को लगातार दोहराते रहना चाहिए। भगवान ऐसा करने वाले भक्तों की मनोकामना जरुर पूरी करते हैं। भक्तों को विनायक के मंदिर की तीन परिक्रमा करनी चाहिए।
🌺 धूम्रकेतु : – धुएं के से वर्ण की ध्वजा वालेभविष्य पुराण के अनुसार, नाम धूम्रकेतु द्वारा गणेश के चैथे अवतार कलयुग में जन्म लेते हैं और अनर्थकारी नष्ट कर देगा। इस गणेश की एक भयंकर रूप माना जाता है और वह एक नीले घोड़े पर सवारी करेंगे। इस रूप में वह एक अंत कलियुग लाना होगा और सृष्टि के अगले चक्र के लिए ब्रह्मांड साफ होगा।
☘ गणाध्यक्ष – गणों के स्वामी गणाध्यक्ष : – गणों के स्वामी यह श्री गणेश का दसवां नाम है । यह भी दो अर्थ वहन करती है. एक स्वामी या ऐसी बातों के एक नियंत्रक, जो गिना जा सकता है. दूसरा अर्थ स्वामी एक नियंत्रक है. (सामान्य लोग) (पुरुष) नर, असुर (डेमन) (सांप) नाग (चारों वेदों) चार पुरुषार्थ गणेश इन सब के स्वामी है. विज्ञान इन सभी के स्वामी के रूप में गणेश कहता है. विज्ञान पूरे (ब्रम्ह) ब्रह्मांड इसलिए गणेशा अधिपति के रूप में जाना जाता है ।
🏵 भाल चन्द्र – मस्तक पर चंद्रमा धारण करने वाले : – भगवान श्रीगणेश का एक स्वरूप भालचन्द्र के नाम से भी पूजनीय है। सरल शब्दों में श्भालचन्द्रश् का अर्थ है भाल यानी मस्तक पर चंद्र धारण करने वाले। श्रीगणेश के इस नाम में सफल जीवन का अहम सूत्र है।
♦गजानन – हाथी के मुख वाले
🍁शिव और पार्वती पुत्र भगवान गणेश का ही नाम गजानन है। लिंग पुराण के अनुसार एक बार देवताओं ने भगवान शिव की उपासना करके उनसे सुरद्रोही दानवों के दुष्टकर्म में विघ्न उपस्थित करने के लिये वर माँगा। आशुतोष शिव ने तथास्तु कहकर देवताओं को संतुष्ट कर दिया