आगरालीक्स…आगरा के कमला नगर स्थित श्रीजगन्नाथ मंदिर में श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन, कथा सुन भावविभोर हुए भक्त..
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव के तहत कमला नगर स्थित श्रीजगन्नाथ मंदिर (इस्कॉन) में सोमवार को भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया गया। मंदिर के अध्यक्ष अरविन्द प्रभु ने कथा के माध्यम से भगवान की बाल लीलाओं के साथ-साथ बृजवासियों के अद्भुत सौभाग्य और उनके वात्सल्य भाव की महिमा का वर्णन किया। कथा के दौरान बड़ी संख्या में मौजूद श्रद्धालु भक्ति भाव में डूबे रहे और उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का श्रवण किया। अरविन्द प्रभु ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं अपने आप में अत्यंत अद्भुत हैं। इन लीलाओं में भगवान की दिव्यता के साथ बृजवासियों के उस सौभाग्य का भी दर्शन होता है, जो स्वयं भगवान को अपने बालक के रूप में देखने और उनके साथ वात्सल्य का संबंध स्थापित करने का अवसर प्राप्त करते हैं।
उन्होंने बताया कि जब भगवान श्रीकृष्ण ब्रज में बाल लीलाएं कर रहे थे, तब अनेक देवी-देवता भी उनके दर्शन की इच्छा लेकर ब्रज पहुंचते थे। भगवान के दर्शन और उनकी कृपा प्राप्त करना देवताओं के लिए भी दुर्लभ था, लेकिन बृजवासियों का भाव इससे बिल्कुल अलग था। वे भगवान को परमेश्वर मानकर उनसे कुछ मांगने नहीं आते थे, बल्कि उन्हें अपना बालक मानकर प्रेम देते थे। कोई उन्हें आशीर्वाद देता, कोई मंगलकामना करता तो कोई प्रेमपूर्वक उनकी बलइयां लेता था। यही बृजवासियों के निर्मल प्रेम और वात्सल्य की सबसे बड़ी विशेषता थी। कथा में भगवान श्रीकृष्ण के शयन की एक विशेष लीला का भी वर्णन किया गया। माता यशोदा जब अपने बालक कृष्ण को सुलाने लगती हैं तो भगवान के निद्रा में जाने की स्थिति को लेकर देवताओं में भी चिंता उत्पन्न हो जाती है। इस प्रसंग के माध्यम से बताया गया कि भगवान की बाल अवस्था में दिखाई देने वाली सामान्य-सी क्रियाओं में भी उनकी विराट सत्ता और दिव्य स्वरूप छिपा हुआ है। अरविन्द प्रभु ने भगवान की चरण-रस से जुड़ी अद्भुत लीला का भी वर्णन किया।
उन्होंने बताया कि भगवान ने अपने दाहिने पैर के अंगूठे को अपने मुख में लेकर स्वयं अपने चरण-रस का आस्वादन किया। भगवान के चरणों की महिमा ऐसी है कि स्वयं लक्ष्मी जी भी उनके चरणों की सेवा करती हैं और उनके चरण-रस की महिमा का वर्णन किया जाता है। इस बाल लीला के माध्यम से भगवान की सहजता और अनंत दिव्यता का सुंदर दर्शन होता है। इस अवसर पर नितेश अग्रवाल, सुशील अग्रवाल, शैलेन्द्र अग्रवाल, कान्ता प्रसाद अग्रवाल, राजेश उपाध्याय, संजीव बंसल, शैलेश बंसल, ओमप्रकाश अग्रवाल, संजय कुकरैजा, राजेश मल्होत्रा, संजीव मित्तल, राजेश उपाध्याय, ओमप्रकाश, देव केशव, अदिति गौरांगी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।