आगरालीक्स…कहावत है घूरे के भी दिन फिरते हैं, और जब ऐसा होता है तो कूड़ेदान को भी चमकाया जाता है फिर शहर शहर नहीं कैनवास सा नजर आता है, आगरा में इसके उदाहरण देखिए!
आगरा में कभी भी स्वच्छ सर्वेक्षण 2025 के लिए टीम आ सकती है। इससे पहले शहर को चमकाया जा रहा है। इसके तहत शहर की दीवारें कैनवास बन गई हैं। यमुना घाटों से लेकर रेलवे स्टेशन, बस अड्डों, सड़कों और चौराहों तक सभी जगह रंगों की छटा बिखरी है। पुरानी और पारंपरिक कलाओं से दीवारें जैसे बोल उठी हैं। इतना ही नहीं शौचालयों को हाईटेक बनाया गया है। कूड़ेदानों तक को चमकाया जा रहा है और जिम्मेदारियां तय की गई हैं।

आगरा शहर ऐतिहासिक तो है ही, कला और संस्कृति इसकी मूल विरासत रही है। प्राचीन समय से ही कलाकारों व इतिहासकारों की शहर में दिलचस्पी रही है। एक बार फिर कला के जरिए आगरा शहर को नया लुक दिया गया है। अब आप जैसे ही रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों से उतरते हैं, घरों से निकलते हैं चारों ओर रंगों की दुनिया आगरा स्वागत करती है।
दीवारों और सड़कों पर उकेरी गई अधिकांश चित्रकारियों में ब्रज संस्कति और कला की झलक दिखती है। इसमें भगवान श्रीकृष्ण संग राधा, बांसुरी, भगवान शिव और उनके डमरू के मनमोहक चित्र लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। लोग अपने मोबाइल फोन के कैमरों से खूब इनकी तस्वीरें भी खींच रहे हैं।

पिछले कुछ समय में आगरा में दीवारों और भवनों पर उकेरी गई कलाकृतियां न केवल पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं, बल्कि आगरा के गौरवशाली इतिहास की कहानी भी बयां कर रही है। दीवारों पर उकेरी कलाकृतियों में भगवान शिव की नगरी की झलक भी दिखती है। कई स्थानों पर वेस्ट टू वंडर प्रोजेक्ट के तहत सुंदरता बिखेरी गई है, जैसे मनकामेश्वर और रावली मंदिर के पास डमरू की कलाकति। हालंकि इस तरह की विभिन्न कलाकतियां शहर भर में स्थापित की गई हैं, जो कबाड़ के इस्तेमाल से बनी हैं।