आगरालीक्स…आगरा के डॉ. अतुल कुलश्रेष्ठ जीरिएट्रिक सोसायटी ऑफ इंडिया के प्रेसीडेंट इलेक्ट चुने गए हैं, कहा 2050 तक भारत में बुजुर्ग आबादी 20 फीसद और जीवन प्रत्याशा 80 साल हो जाएगी इसलिए अभी से तैयारी जरूरी
आगरा में वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. अतुल कुलश्रेष्ठ को जीरिएट्रिक सोसायटी ऑफ इंडिया का प्रेसीडेंट इलेक्ट चुना गया है। वर्ष 2025 में वे देश में बुजुर्ग नागरिकों की देखभाल को समर्पित इस महत्वपूर्ण संगठन के अध्यक्ष पद की कमान संभालेंगे।
आगरालीक्स से बातचीत में डॉ. कुलश्रेष्ठ ने बताया कि वर्तमान में इस संगठन के देश भर में करीब 1500 सदस्य हैं और यह संगठन पूरी तरह से बुजुर्गों की देखभाल के प्रति समर्पित है। उन्होंने कहा कि भारत में 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लोगों को बुजुर्ग माना जाता है। जनसंख्या पर राष्टीय आयोग के अनुसार भारत की आबादी में बुजुर्गों की हिस्सेदारी इस समय 10 प्रतिशत है और यह तेजी से बढ़ रही है। वर्ष 2025 तक यह 20 प्रतिशत पहुंच सकती है। वहीं भारत की आजादी के वक्त वर्ष 1947 में जो जीवन प्रत्याशा 31 वर्ष थी वह आज बढ़कर 67 वर्ष पर आ गई है। 2050 तक यह 80 वर्ष तक पहुंच सकती है। एक ओर जहां देश की एजेड पॉप्यूलेशन तेजी से बढ़ रही है तो वहीं दूसरी ओर सेवानिवत्त होने वालों की संख्या में भी बढ़ोत्तरी हो रही है। यदि भारत को बुजुर्गों के लिए जीवन की एक सभ्य गुणवत्ता सुनिश्चित करनी है निकट भविष्य में, इसके लिए योजना बनाना और प्रदान करना आज से शुरू होना चाहिए।
डॉ. कुलश्रेष्ठ ने बताया कि भारत सरकार इस बात को भली भांति जानती और समझती है। यही वजह है कि भारत में जनसंख्या की बढ़ती उम्र को लेकर पैदा होने वाली चुनौती से निपटने के लिए सरकारें तेजी से काम कर रही हैं। इसके लिए हाल ही में सरकार की ओर से गाइड लाइंस जारी की गई हैं। वहीं सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में जीरिएट्रिक क्लीनिक भी खोले जा रहे हैं। ऐसा ही एक सेंटर आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में भी खोला गया है। जीरिएट्रिक सोसायटी ऑफ इंडिया इसमें सरकार के साथ मिलकर एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रही है।
यही कारण है कि जीरिएट्रिक सोसायटी ऑफ इंडिया बुजुर्गों में गठिया, कमजोर याद्दाश्त, कार्यक्षमता में कमी, डायबिटीज, हार्ट डिजीज के अलावा उनके मानसिक स्वास्थ्य, बच्चों द्वारा अपने बूढ़े माता-पिता के प्रति लापरवाही, रिटायरमेंट से मोहभंग, बुजुर्गों में शक्तिहीनता, अकेलापन, बेकारता और अलगाव की भावना से निपटने में भी उनकी मदद कर रही है।