आगरालीक्स…आगरा के गिरिजाघरों में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया ईस्टर. विशेष प्रार्थना सभाओं में शामिल हुए बड़ी संख्या में श्रद्धालु. ईसाई समाज ने मनाया पुनरुत्थान का पर्व है ईस्टर
सम्पूर्ण नगर में ईसाई समाज ने आज अत्यंत श्रद्धा, आस्था और उल्लास के साथ प्रभु यीशु मसीह के पुनरुत्थान का पर्व ईस्टर (पास्का) मनाया। यह पर्व ईसाई धर्म का सबसे महत्वपूर्ण उत्सव माना जाता है, जो मसीह के मृतकों में से जीवित होने की स्मृति में मनाया जाता है। सवेरे से ही नगर के विभिन्न गिरजाघरों में विशेष प्रार्थना सभाएं आयोजित की गईं, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।निष्कलंक माता महागिरजाघर (सेंट पीटर्स कैथेड्रल) में प्रातःकालीन पवित्र मिस्सा बलिदान का आयोजन हुआ, जिसका नेतृत्व आगरा धर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष डॉ. राफी मंजलि ने किया। उन्होंने बाइबिल से पवित्र पाठ पढ़ते हुए प्रभु यीशु के बलिदान, मृत्यु और पुनरुत्थान की गहराई से व्याख्या की। अपने प्रवचन में उन्होंने कहा, "यीशु मसीह ने मानवजाति के पापों के प्रायश्चित हेतु क्रूस पर अपने प्राण अर्पित किए, और तीसरे दिन पुनर्जीवित होकर उन्होंने हमें नई आशा और उद्धार का मार्ग दिखाया।" डॉ. राफी ने सभी को ईस्टर की हार्दिक शुभकामनाएं भी दीं।
सेंट मेरी चर्च में आयोजित मिस्सा बलिदान में फादर संतोष डी'सा ने अपने प्रेरणास्पद प्रवचन में कहा, "प्रभु यीशु का कब्र विशेष है, क्योंकि वह अब उसमें नहीं हैं – वह जीवित हैं। यही मसीही विश्वास की नींव है कि मृत्यु के ऊपर भी जीवन की विजय संभव है।" उन्होंने आगे कहा, "ईस्टर का असली अर्थ तभी सार्थक होता है जब हम जरूरतमंदों की सेवा करें। जो भूखे हैं, बेसहारा हैं, उनकी सहायता करना ही सच्चा मसीही धर्म है।" क्रिश्चियन समाज सेवा सोसायटी के अध्यक्ष श्री डेनिस सिल्वेरा ने बताया कि ईस्टर प्रार्थनाओं के उपरांत नगर के ईसाई परिवार कब्रिस्तानों में पहुंचे और अपने दिवंगत प्रियजनों की स्मृति में कब्रों पर पुष्प, धूपबत्ती व मोमबत्तियाँ अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।