आगरालीक्स…आगरा में 06 सालों में तेजी से बढ़े इलेक्ट्रिक वाहन, एक बार तो रोक लगानी पड़ी, सड़कों पर अभी 31000 ईवी, मगर ये चार्ज कहां हो रहे हैं ?
सरकार प्रदूषण का ग्राफ कम करने और इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी स्कीम पर भी काम कर रही है। इसका असर ये हुआ कि आगरा में 2019 से अब तक वाहनों का ग्राफ कई गुना बढ़ गया है। इसके साथ एक सवाल भी है कि ये चार्ज कहां हो रहे हैं, क्योंकि बहुत कम ही चार्जिंग स्टेशन नजर आते हैं, क्या घरेलू बिजली कनेक्शन का ही कॉमर्शियल यूज हो रहा है ? इन सवालों का फिलहाल कोई सटीक उत्तर नहीं है। आईए जानते हैं इस खबर में…
युवा वर्ग अब इलेक्ट्रिक वाहन पर ही फोकस कर रहा है। संभागीय परिवहन के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2018 में शहर में मात्र 1237 इलेक्ट्रॉनिक वाहन थे जो कि अब 2024 तक बढ़ कर लगभग 31000 हो गए हैं।
आगरा की सड़कों पर फिलहाल 31000 इलेक्टिक वाहन घूम रहे हैं। इनमें सबसे अधिक ई—रिक्शा 12000, दूसरे नंबर पर ई—बाइक 11500, फिर ई—आॅटो 7000 और 500 कारें हैं। साल 2023—24 में
शहर में ईवी की रफ्तार इस गति से बढ़ी कि एक बार इनकी बिक्री और पंजीकरण पर रोक लगानी पड़ी, हालांकि बाद में इस रोक को हटा दिया गया। ई वाहनों की संख्या बढ़ने के साथ ही बात उठी कि इनके चार्जिंग स्टेशन होने चाहिए।
कभी कहा गया कि शहर में जितने पेटोल पंप हैं उतने ही ईवी चार्जिंग स्टेशन हो सकते हैं बशर्ते पेटोल पंप को ही इनके संचालन की भी अनुमति दे दी जाए। इसके बाद रेलवे स्टेशन व दूसरे सरकारी विभागों पर चार्जिंग स्टेशन खोलने की बात कही गई। इसके बाद आवास—विकास प्राधिकरण की तरफ से 10, नगर निगम द्वारा 11 या स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में 20 चार्जिंग स्टेशन खोला जाना भी तय किया गया। वर्तमान में कितने चार्जिंग स्टेशन हैं इसका सटीक जवाब नहीं है।
बताया जा रहा है कि एक चार्जिंग स्टेशन आगरा कैंट रेलवे स्टेशन तो दूसरा शिल्पग्राम पर खुला है। इसके अलावा पीपीपी मॉडल पर कुछ चार्जिंग स्टेशन खेाले गए हैं। कई चार्जिंग स्टेशन प्राइवेट खुल गए हैं। वाहनों की संख्या के अनुरूप यह स्टेशन बहुत कम हैं।
ऐसे में शहर में ईको फ्रेंडली वाहनों के नाम पर चलाए जाने वाले ई-रिक्शा व अन्य वाहनों का उपयोग कॉमर्शियल होने की बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि अधिकांशत: यह घरेलू बिजली से चार्ज हो रहे हैं, जिससे हर साल लाखों की चपत सरकार और विद्युत वितरण कंपनी को लग रही है। इसके अलावा हादसे की आशंका बनी रहती है। घर पर ई-रिक्शा चार्ज करते समय शॉर्ट सर्किट हो सकता है। आग भी लग सकती है।
ई-रिक्शा चार्ज करते समय हो सकता है शॉर्ट सर्किट
जिले में एक भी चार्जिंग प्वाइंट बहुत कम होने की वजह से सबसे ज्यादा परेशानी ई-रिक्शा को लेकर है। शहर में चार्जिंग प्वाइंट नहीं होने से रिक्शा चालक अपनी गाड़ियां कई बार समय से पहले ही लेकर घर लौट जाते हैं। एक इ-रिक्शा को चार्ज करने में 6 से 7 घंटे लगते हैं। इस दौरान लगभग 9 यूनिट बिजली खर्च होती है।
कर रहे अच्छी कमाई
ई- रिक्शा मालिक अच्छी खासी कमाई भी कर रहे हैं, लेकिन चार्जिंग प्वाइंट नहीं होने की वजह से परेशानी का सामना भी करना पड़ रहा है। बैटरी लो होते ही चार्जिंग के लिए सीधे घर जाना पड़ता है। कई बार रास्ते में ही रिक्शा बंद पड़ जाती है। इससे काम प्रभावित हो रहा है। यही वजह है कि बहुत सारे लोगों ने ई रिक्शा बंद कर दिया है।