आगरालीक्स…आगरा में ऐसा पहली बार हुआ कि एक छोटा सा चीरा लगाकर हार्ट का वॉल्व बदला गया. प्रधानमंत्री जन आरोग्य आयुष्मान कार्ड के जरिए उजाला सिग्नस रेनबो हाॅस्पिटल में की गई दो महिलाओं की हार्ट सर्जरी
हार्ट वाॅल्व का इलाज अब तक दिल को सामने से पूरा खोलकर किया जाता था लेकिन अब बहुत छोटा चीरा लगाकर हार्ट वाॅल्व लगाया गया है। आगरा के उजाला सिग्नस रेनबो हाॅस्पिटल में डाॅक्टरों ने दो महिलाओं में मिनी स्टेर्नोटोमी तकनीक की मदद से वाॅल्व बदला है। ऐसा आगरा व आस-पास के क्षेत्र में पहली बार हुआ है। पत्रकार वार्ता में मौजूद मुख्य चिकित्सा अधिकारी डाॅ. अरूण श्रीवास्तव ने बताया कि जिले में आयुष्मान कार्ड धारकों को निजी अस्पतालों में उपचार उपलब्ध कराने के लिए अस्पतालों से संबद्धता का कार्य तेजी से चल रहा है। वहीं पखवाड़े के माध्यम से नए कार्ड बनाए जा रहे हैं। हाल ही में उजाला सिग्नस रेनबो हाॅस्पिटल में प्रधानमंत्री जन आरोग्य आयुष्मान योजना ने दो मरीजों को नई जिंदगी दी है।
एसीएमओ डाॅ. सुकेश गुप्ता ने बताया कि निजी अस्पतालों में उपचार उपलब्ध होने से कार्ड धारकों को काफी फायदा पहुंचा है। उन्होंने आयुष्मान सहित अन्य सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। कार्डियोलाॅजी विभाग के मुख्य सर्जन डाॅ. शशिकांत वीवी ने बताया कि मिनी स्टेर्नोटोमी हार्ट के वाॅल्व को बदलने का एक प्रोसीजर है, जो अभी देश के चुनिंदा अस्पतालों में ही किया जाता है। अभी तक होता यह है कि वाॅल्व बदलने के लिए ओपन हार्ट सर्जरी की जाती है जिसमें छाती को सामने की ओर से 10 से 15 इंच का चीरा लगाकर खोला जाता है जबकि मिनी स्टेर्नोटोमी की मदद से केवल चार से पांच इंच का छोटा चीरा लगाकर ही वाॅल्व बदल दिया जाता है और हड्डी को काटने की जरूरत भी नहीं पड़ती।

वरिष्ठ ह्दय रोग विशेषज्ञ डाॅ. वीनिश जैन ने बताया कि उजाला सिग्नस रेनबो कार्डियक केयर में एचडी आईवस जैसे अत्याधुनिक उपकरण और उन्नत संपूर्ण उपचार उपलब्ध है। अब बायपास सर्जरी की सुविधा जुड़ने से किसी भी मरीज को बाहर जाने की जरूरत नहीं है बल्कि एक ही छत के नीचे सभी सुविधाएं और संसाधन मौजूद हैं।
रीजनल बिजनेस हैड सिग्नस मेडिकेयर प्रा. लि. दिव्य प्रशांत बजाज ने बताया कि पहले से स्थापित उच्चतम कैथलैब के साथ उजाला सिग्नस रेनबो हाॅस्पिटल में अब ह्दय रोगों का संपूर्ण इलाज उपलब्ध है। आगरा व आस-पास के क्षेत्रों में ह्दय रोगियों को इलाज के लिए दूर शहरों में जाने की जरूरत नहीं है। सातों दिन, 24 घंटे वे अस्पताल के कार्डियक सेंटर की सेवाएं ले सकते हैं। संचालन मेडिकल सुप्रिटेंडेंट डाॅ. राजीव लोचन शर्मा ने किया। महाप्रबंधक राकेश आहूजा ने बताया कि लाभार्थी योजना में शामिल कोई भी पात्र व्यक्ति चिकित्सालय में आकर आयुष्मान कार्ड बनवा सकता है। इसके अलावा पंडित दीनदयाल उपाध्याय राज्य कर्मचारी कैशलेस चिकित्सा योजना में इलाज की सुविधा उपलब्ध है। इस दौरान लवकेश गौतम, हरजीत सिंह सोढ़ी आदि मौजूद थे।
20 वर्षों से अधिक अनुभव के साथ एक्सपर्ट्स की टीम
20 वर्षों से अधिक अनुभव के साथ डाॅ. शशिकांत वीवी, जाने-माने ह्दय रोग विशेषज्ञ डाॅ. वीनिश जैन के साथ ही डाॅक्टरों और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम मौजूद है। जटिल बीमारियों का इलाज अत्याधुनिक तकनीकों से किया जा रहा है।
माइटल वाॅल्व रिप्लेसमेंट और टिक्यूसपिड वाल्व विभाग की सर्जिकल टीम में डाॅ. पुष्पेंद्र, शिवचरण मीणा, वरिष्ठ कार्डियक एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डाॅ. प्रवीण श्राफ, टेक्नोलाॅजिस्ट अजय पाल, अमृता शर्मा, डाॅ. तनविक अग्रवाल, डाॅ. सलिल कुमार, डाॅ. करीना उपाध्याय, अतीक अहमद, हिमांशु सोलंकी आदि शामिल थे।
आयुष्मान कार्ड योजना से दो महिलाओं को मिली नई जिंदगी
आगरा में एक 30 वर्षीय महिला को बार-बार सांस फूलने के साथ ही हार्ट अटैक के लक्षणों के साथ करीब एक सप्ताह पहले उजाला सिग्नस रेनबो हाॅस्पिटल लाया गया था। ओपीडी में मरीज को देखने के बाद डाॅ. शशिकांत ने जांचें कराईं तो वाॅल्व रिप्लेसमेंट की जरूरत सामने आई। परिजनों की सहमति से मिनी स्टेर्नोटोमी के जरिए सर्जरी की गई। सर्जरी के तीन दिन बाद ही हालत अच्छी होने पर महिला को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। एक दूसरे मामले में फिरोजाबाद की एक 53 वर्षीय महिला के ह्दय का वाॅल्व भी बदला गया है और चार दिन बाद उसे भी आज अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।