आगरालीक्स…वन अर्थ, वन आगरा, वन दयालबाग. डीईआई में एयर क्वालिटी मैनेजमेंट ऐंड सस्टैनबिलिटी पर हुआ अन्तरराष्ट्रीय वेबिनार. 12 देश के वैज्ञानिक, शिक्षाविद, विधार्थी व बुद्धिजीवी ने भाग लिया लिया…
दयालबाग शिक्षण संस्थान, दयालबाग, आगरा में एयर क्वालिटी मैनेजमेंट एंड सस्टेनेबिलिटी विषय पर एक वेबिनार का आयोजन वर्चुअल प्लेटफॉर्म पर विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष में किया गया जिसका उद्देश्य सामाजिक- पारिस्थितिक प्रणालियों की भूमिका को बेहतर तरीके से समझने, दयालबाग जीवन शैली के विशेष संदर्भ के साथ समग्र स्थिरता में सुधार के लिए अनुकूलन, पुनर्गठन और अधिक वांछनीय विन्यास में विकास व भविष्य में जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए बेहतर तरीके से समाज को तैयार करना है। इस वेबीनार में वायु गुणवत्ता निगरानी, प्रभाव मूल्यांकन और टिकाऊ समाधान की विस्तृत श्रृंखला पर वार्तालाप किया गया। जागरूकता फैलाना भी वायु गुणवत्ता में सुधार और हमारे पर्यावरण के संरक्षण के दृष्टि के लिए एक समग्र दृष्टिकोण का एक तरीका है । दोनों ही स्थिति में लाभ है क्योंकि वायु गुणवत्ता सुधार व प्रबंधन से जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम किया जा सकता है।
वेबिनार की आवश्यकता पर डाला प्रकाश
वेबिनार् का शुभारंभ विश्वविद्यालय प्रार्थना के साथ हुआ । वेबिनार के ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेट्री डॉ रंजीत कुमार ने वेबिनार् की आवश्यकता पर प्रकाश डाला तथा बताया कि 13 देश के करीब आठ सौ व्यक्तियों ने अपना ऑनलाइन पंजीकरण कराया है। पंजीकृत प्रतिभागी इंडिया, अमेरिका, जापान, ताईवान, सिंगापुर, फिनलैंड, स्वीडेन, मलेशिया, म्यांमार, बांग्लादेश, पाकिस्तान, इराक, नाइजीरिया, घाणा, बोलिविया के थे। इनमें 51 प्रतिशत महिलाएं थी। प्रतिभागियों में 50 प्रतिशत युवा थे। 72 प्रतिशत शहर के, 9 प्रतिशत अर्धशहरी तथा 19 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्र से थे। युवाओं व खास कर महिलाओं का बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेना एक शुभ संकेत तथा पर्यावरण प्रति चेतना जागृति का उदाहरण है। डा. कुमार ने बताया वेबिनार् में ग्रामीण क्षेत्र की सहभागीता वायु गुणवत्ता सुधार में अहम है।

शोध व पर्यावरण संरक्षण के प्रयास पर की चर्चा
वेबिनार् के संयोजक प्रोफेसर रोहित श्रीवास्तव, अध्यक्ष, रसायन विज्ञान विभाग ने स्वागत भाषण देते हुए पर्यावरण विज्ञान के क्षेत्र में रसायन विज्ञान विभाग द्वारा किए जाने वाले शोध व पर्यावरण संरक्षण के प्रयास पर प्रकाश डाला । रसायन विज्ञान के भूतपूर्व अध्यक्ष प्रो. सत्यप्रकाश ने वेबिनार् के विषय की महत्ता से लोगों को अवगत कराया। इस अवसर पर दयालबाग शिक्षण संस्थान के रजिस्ट्रार प्रो आनंद मोहन ने बताया कि दयालबाग शिक्षण संस्थान दयालबाग के स्वच्छ इलाके में स्थित है जहां लोग प्राकृतिक संसाधनों के साथ मिलजुल कर समन्वय बनाकर रहते हैं। दयालबाग एक नेचुरल हैबिटेट है जहां वैज्ञानिक, विद्यार्थी व आम जीव आपसी सहयोग के साथ अपने-अपने क्षेत्र के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए प्रयास करते रहते हैं । यहां वैज्ञानिक उत्कृष्ट शोध करते हैं तथा विद्यार्थी उसको सामाजिक जरूरतों से जोड़ने व समाज के उत्थान में प्रयोग करने का प्रयास करते हैं।

विश्व के 9 पर्यावरण वैज्ञानिकों ने भी विचार व्यक्त् किए
डॉ रंजीत कुमार ने बताया कि आज के वेबिनार में इंडिया तथा अमेरिका के उत्कृष्ट शोध संस्थान तथा विश्वविद्यालय के नौ पर्यावरण वैज्ञानिक वैज्ञानिकों ने अपने विचार प्रस्तुत किए। मिशीगन टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी के प्रो कलौडियो मज़ोलनी ने ब्लैक कार्बन के मोरफ़ोलॉजी पर प्रकाश डाला तथा बताया कि ब्लैक कार्बन आज के समय में विश्व के लिए ग्लोबल वार्मिंग के कारण चुनौती बन गया है ब्लैक कार्बन के कारण होने वाले ग्लोबल वार्मिंग व उसके प्रभाव ब्लैक कार्बन के मोरफ़ोलॉजी के ऊपर निर्भर करता है । उन्होंने ब्लैक कार्बन पर उसके विभिन्न आयामों पर दुनियाभर में विस्तृत शोध करने की जरूरत बताई । डी एस टेक्नोलॉजी यू एस ए के डॉ जूलियन कैल्बे ने सेंसर नेटवर्क के द्वारा ब्लैक कार्बन व वायु गुणवत्ता मापन पर जोर दिया । उन्होंने बताया की सेंसर के द्वारा ब्लैक कार्बन के उत्सर्जन का मापन किए जा सकते हैं।
डॉक्टर जूलियन ने भविष्य में दयालबाग शिक्षण संस्थान, दयालबाग के साथ मिलकर ब्लैक कार्बन के मापन तथा उसके स्तर को कम करने के लिए सामूहिक शोध की संभावना पर विचार करने को कहा । प्रोफेसर गुफरान बैग, नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ अड्वांसड स्टडीज, बेंगलुरु ने सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च प्रोग्राम के बारे में बताया । इस प्रोग्राम को प्रोफेसर गुफरान बेग के दिशा निर्देशन में शुरू किया गया था जिसका मुख्य उद्देश एयर क्वालिटी फोरकास्ट को सुदृढ़ कर एयर क्वालिटी से होने वाले दुष्प्रभाव को कम करने की कोशिश करना था । डॉक्टर गुफरान बेग ने बताया कि इसे शुरू करने में बहुत सारे बाधाएं आए लेकिन भारत सरकार के पृथ्वी मंत्रालय के सहयोग से यह आज देश का उत्तम तंत्र बन गया है। उन्होंने बताया कि वायु प्रदूषण से होने वाले क्लाइमेट चेंज के दुष्प्रभाव को सही तरह से आकलन के लिए एयर क्वालिटी फोरकास्ट हर शहर के लिए होना चाहिए व आगरा में भी होना चाहिये।
इंडियन इंस्टीट्यूट आफ ट्रॉपिकल मीटरोलॉजी के डा टी प्रभाकरण ने बादल के ऊपर वायु प्रदूषण के प्रभाव के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि प्रदूषित जगह के बादल और स्वछ जगह के बादल में अंतर होते हैं और यह बारिश को भी प्रभावित करता है । जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली के स्कूल ऑफ एनवीरोंमेंटल् साइंस के अध्यक्ष प्रो उमेश चंद्र कुलश्रेष्ठा ने बताया कि सस्टेनेबल व हॉलिस्टिक अप्रोच के द्वारा हवा को स्वच्छ किया जा सकता है। यही आज के समय में स्वच्छ हवा के लिए उत्तम तरीका है। उन्होंने कहा कि वायु, जल, जीव-जंतु सभी के ऊपर मनुष्य के क्रियाकलापों के द्वारा बुरा प्रभाव पर रहा है तथा दूषित वायु जल के कारण मनुष्य, सभी जीव जंतु और सभी तरह के पेड़ पौधों के ऊपर बुरा प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि एक सामंजस्य पूर्ण व्यवस्था होनी चाहिए जिससे वायु प्रदूषण को कम कर उसके कारण होने वाले दुष्प्रभावों को कम किया जा सके।
दयालबाग शिक्षण संस्थान के प्रो के महाराज कुमारी ने बताया कि आगरा शहर की वायु दूर दराज के क्षेत्रों में पराली जलाने से उत्सर्जित दूषित हवा के आने से प्रभावित करती है। डॉ अनीता लखानी ने वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए दयालबाग में किए गए उपाय पर विस्तृत प्रस्तुति दी तथा बताया की दयालबाग की जीवन शैली वायु गुणवत्ता के सुधारने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने दयालबाग की वायु की गुणवत्ता की तुलना आगरा शहर के अन्य स्थानों के वायु की गुणवत्ता से की तथा बताया कि दयालबाग की जीवन शैली दयालबाग क्षेत्र में वायु गुणवत्ता अच्छी होने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। नीरी दिल्ली के वैज्ञानिक इंचार्ज डॉ एस के गोयल ने वायु प्रदूषण चुनौती व सतत विकास की आवश्यकता विषय पर अपनी प्रस्तुति दी तथा आगरा शहर के अध्ययन को प्रस्तुत किया। उन्होंने दयालबाग शिक्षण संस्थान के निदेशक प्रोफेसर पी के कालरा द्वारा पर्यावरण संरक्षण व वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए किए गए उपाय की सराहना की। उन्होंने कहा कि दयालबाग में दयालबाग व दयालबाग शिक्षण संस्थान के द्वारा वायु प्रदूषण के स्तर को कम करने का तरीका एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है । इस साल विश्व पर्यावरण दिवस का विषय वन अर्थ है। उन्होंने कहा – वन अर्थ, वन आगरा, वन दयालबाग। दयालबाग में वायु प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए उठाए गए प्रयास एक मॉडल की तरह है जिसे आगरा ही नहीं देश के और जगह भी अपनाने की जरूरत है ताकि हमारे देश की हवा स्वच्छ हो सके व लोग स्वस्थ जिंदगी जी सके ।
इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी, कानपुर के प्रोफेसर एस एन त्रिपाठी ने भारतीय शहरों में स्वच्छ हवा के उद्देश्य को प्राप्त करने की जरूरत व विधि पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्रोत का पता लगाना व वायु प्रदूषण के स्रोत का रियल समय में पता लगाना बहुत ही जरूरी है। इसलिए उन्होंने सस्ते व कम खर्च पर वायु प्रदूषण के स्रोत का पता लगाने के तंत्र के ऊपर विस्तृत से जानकारी दी तथा कहा कि देश की हवा स्वच्छ होना बहुत ही जरूरी है। समापन समारोह के भाषण में डा भीम राव अम्बेडकर विश्व विद्यालय, लखनऊ के रसायन विज्ञान के भूतपूर्व अध्यक्ष प्रो कमान सिंह ने वैज्ञानीकों को वायु प्रदूषण करने वाले प्रदूषकों का सही मापन व उत्सर्जन को रोकने के लिए नियमों का कराई से पालन करने के लिए आह्वान किया।
कार्यक्रम के अंत में ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेट्री डॉ रंजीत कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन किया तथा बताया कि संस्थान के अधिकारीगण तथा विभाग के सहयोगियों विशेषकर डॉ. अपर्णा सत्संगी, डॉ. मंजु श्रीवास्तव, डॉ. राधिका सिंह, डॉ. सुधीर वर्मा, डॉ. अशोक जांगिड़, डॉ. अनुपम श्रीवास्तव, रजनीकांत वर्मा, सौरभ सत्संगी, शुभी शर्मा का सराहनीय योगदान रहा।