आगरालीक्स…आगरा में यमुना तट पर गूंजा “जय जगन्नाथ”, रथयात्रा महोत्सव में उमड़ा आस्था का सैलाब. दो सौ वर्ष पुराने प्राचीन मंदिर में देर रात तक गूंजते रहे जय जगन्नाथ के जयकारे
यमुना किनारा, बेलनगंज स्थित लगभग दो सौ वर्ष प्राचीन श्री जगन्नाथ जी महाराज मंदिर में गुरुवार को श्री जगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। सायंकाल भगवान श्री जगन्नाथ, बलभद्र एवं देवी सुभद्रा के रथयात्रा स्वरूप के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। पूरे मंदिर परिसर में "जय जगन्नाथ" के उद्घोष, भजन-कीर्तन और भक्तिमय वातावरण ने सभी को भावविभोर कर दिया। सायं 4 बजे से भगवान श्री जगन्नाथ के रथयात्रा स्वरूप के दर्शन प्रारंभ हुए, जो रात्रि 11 बजे तक निरंतर चलते रहे। श्रद्धालुओं ने प्रभु के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर सुख-समृद्धि एवं विश्व कल्याण की कामना की। मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया गया था तथा भगवान का विशेष श्रृंगार भक्तों के आकर्षण का केंद्र रहा।रथयात्रा दर्शन के अवसर पर आयोजित भजन संध्या में भगवान श्री जगन्नाथ के भजनों एवं संकीर्तन से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालु देर रात तक भजन-कीर्तन में झूमते रहे। भगवान के जयकारों और संकीर्तन से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक महाप्रसाद ग्रहण किया। श्री मनःकामेश्वर मंदिर मठ के श्रीमहंत योगेश पुरी ने मंदिर में दर्शन लाभ प्राप्त करते हुए कहा कि प्राचीन मंदिर केवल पूजा-अर्चना के स्थान नहीं, बल्कि हमारी सनातन संस्कृति, परंपरा और आध्यात्मिक ऊर्जा के जीवंत केंद्र हैं। उन्होंने कहा कि नए मंदिरों का निर्माण अवश्य होना चाहिए, क्योंकि यह धर्म और आस्था के विस्तार का प्रतीक है, लेकिन इसके साथ ही हमें अपनी प्राचीन धरोहरों और परंपराओं को कभी नहीं भूलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यमुना तट पर स्थित श्री जगन्नाथ महाराज मंदिर की एक-एक ईंट इसकी गौरवशाली प्राचीनता, वर्षों की साधना और अनगिनत भक्तों की आस्था की साक्षी है। ऐसे मंदिरों में सदियों से निरंतर होने वाली पूजा, आराधना और मंत्रोच्चार से एक दिव्य आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है, जिसे शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता।
श्री प्रेमनिधि जी मंदिर के मुख्य सेवायत सुनीत गोस्वामी ने समाज, धर्माचार्यों और प्रशासन से ऐसे प्राचीन मंदिरों के संरक्षण एवं जीर्णोद्धार के लिए सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी अपनी इस अमूल्य सांस्कृतिक विरासत से जुड़ सकें।
महोत्सव को सफल बनाने में स्नेहा शर्मा, चिराग शर्मा, आदर्श नंदन गुप्त, पूनम भारद्वाज, रवि राठौर, पवन सिंघल, संजीव अग्रवाल, राजेश खंडेलवाल, तरंग सिंघल आदि का सहयोग रहा।