आगरालीक्स… आगरा में लंपी वायरस के लिए अलर्ट, संदिग्धों की जांच, जानें कैया है यह वायरस, क्या होते हैं लक्षण और कैसे बचें। गाइड लाइन जारी।अटूस गांव में मिली गाय का इलाज किया जा रहा है।
आगरा में नहीं है कोई केसः सीडीओ
मुख्य विकास अधिकारी ने आगरालीक्स को बताया कि लंपी वायरस का आगरा में कोई केस नहीं है। लंपी वायरस की जानकारी के लिए मुख्य पशु चिकित्साधिकारी और कोविड-19 के मामलों पर नजर रखने के सीएमओ को बैठक में निर्देश दिए गए हैं।

बीमारी से पीड़ित गाय के नूमने गए हैं जांच कोः प्रभारी सीवीओ
प्रभारी सीवीओ बीके खरे ने बताया कि अटूस में जिस गाय को लंपी वायरस से पीड़ित बताया जा रहा है, उसका पशु चिकित्सकों की टीम द्वारा इलाज किया जा रहा है। सैंपल जांच के लिए भेज दिए गए हैं, रिपोर्ट आने के बाद ही लंपी वायरस के बारे में पुष्टि की जाएगी।
शासन से गाइड लाइन जारी हुईः तोमर
अभी हाल ही में सेवानिवृत्त हुए सीवीओ वासुदेव तोमर ने आगरालीक्स को बताया कि शासन ने लंपी वायरस को लेकर पशुओं को लेकर गाइड लाइन जारी कर दी है। पशुओं के लिए वैक्सीन भी तैयार हो गई है, जिसे शीघ्र ही पशुओं को लगाया जाएगा।
भैंसों से ज्यादा गायों को खतरा
लंपी स्किन डिजीज (एलएसडी) गाय-भैंस जैसे मवेशियों में कैप्रिपॉक्स नाम के वायरस से तेजी से फैलती है। पशु चिकित्सक मवेशियों के लिए बड़ा खतरा मान रहे हैं। इससे गायें ज्यादा बीमार होती हैं। हालांकि इससे अन्य पशु भी बीमार पड़ सकते हैं। इस वायरस से भैंसों के मुकाबले गायों की मौत ज्यादा होती है क्योंकि भैसों की नैचुरल इम्युनिटी गायों से ज्यादा होती है।
आठ राज्यों में है प्रकोप
एक रिपोर्ट में बताया गया है कि लंपी वायरस ने देश में करीब 17 हजार गायों की जान गई है। लंपी वायरस से प्रभावित आठ राज्यों में प्रमुख रूप से गुजरात, राजस्थान और पंजाब शामिल हैं।
पशुओं में बीमारी के लक्षण
-तेज बुखार और शरीर पर गांठें होना इस बीमारी के सबसे बड़े लक्षण हैं। बीमार पशुओं में बांझपन हो सकता है। दूध उत्पादन क्षमता भी घट जाती है।
- इंफेक्शन होने के बाद लक्षण दिखने में एक सप्ताह का समय लगता है।
-शुरुआत में गायों या भैसों की नाक बहने लगती है, आंखों से पानी बहता है और मुंह से लार गिरने लगती है।
-इसके बाद तेज बुखार हो जाता है, जो करीब एक हफ्ते तक बना रह सकता है।
-जानवर के शरीर पर गांठें निकल आती हैं। साथ ही उसके शरीर में सूजन भी आ जाती है।
-जानवर खाना बंद कर देता है, क्योंकि उसे चबाने और निगलने में परेशानी होने लगती है।
-ज्यादा दूध देने वाली वाली गायों पर लंपी का खतरा ज्यादा रहता है।
-ये लक्षण 5 हफ्ते तक बने रहते हैं। इलाज न होने पर मौत भी हो सकती है। ठीक होने में दो हफ्ते से एक महीने तक का समय लगता है। वायरस से पूरी तरह उबरने में करीब 6 महीने तक लग जाते हैं।