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Agra News: Lifetime Achievement Award to Agra’s Dr. Jaideep Malhotra…#agranews

आगरालीक्स…आगरा की डॉक्टर जयदीप मल्होत्रा को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड. बांझपन पर विशेष उपलब्धियों के लिए इसार ने दिया सम्मान.

इसार (इंडियन सोसायटी फॉर असिस्टेड रिप्रोडक्शन) की लखनऊ में हुई वार्षिक कांफ्रेंस में रेनबो आईवीएफ की एमडी एवं बांझपन एक्सपर्ट डॉक्टर जयदीप मल्होत्रा को डाॅक्टर प्रभा मल्होत्रा लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से नवाजा गया। उन्हें यह अवॉर्ड बांझपन पर उपलब्धियों के लिए मिला है। इस मौके पर उनकी पुस्तक एआरटी इन प्रेगनेंसी का विमोचन भी हुआ। यंग रिसर्च के लिए डॉक्टर जयदीप मल्होत्रा रिसर्च अवॉर्ड डॉक्टर रिजु आंगिक चिमोटे को दिया गया।

तीन दिवसीय कांफ्रेंस में डॉक्टर जयदीप मल्होत्रा ने कहा कि बांझपन एक ऐसी स्थिति है जिसमें दंपती नियमित व असुरक्षित यौन संबंध बनाने के बावजूद गर्भधारण करने में असमर्थ रहता है। आमतौर पर, यदि एक वर्ष तक नियमित प्रयास के बावजूद गर्भधारण न हो, तो इसे बांझपन माना जाता है। बांझपन पुरुष और महिलाओं दोनों में हो सकता है। इसके कई  कारण हो सकते हैं।

उन्होंने कहा कि महिलाओं में थायराइड की गड़बड़ी, समय पर अंडे न बनना जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। यौन संचारित रोग और एंडोमेट्रियोसिस से फेलोपियन ट्यूब ब्लॉकेज होना। गर्भाशय संबंधी समस्याएं जैसे यूटेराइन फाइब्रॉयड, पॉलीप्स, असामान्य आकार होना। हार्मोनल असंतुलन से एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन की कमी होना। उम्र बढ़ने पर अंडों की गुणवत्ता और संख्या कम हो जाना। पुरुषों में शुक्राणु की कमी या गुणवत्ता में खराबी, वीर्य नलिकाओं का अवरुद्ध होना, हार्मोनल असंतुलन (टेस्टोस्टेरोन की कमी) होना और धूम्रपान, शराब, मोटापा और तनाव आदि।

आईवीएफ विशेषज्ञ डाॅक्टर निहारिका मल्होत्रा ने वर्कशाॅप में कहा कि वर्तमान में बांझपन का इलाज संभव है। गर्भधारण की संभावना को बढ़ाने के लिए कई तरह के इलाज मौजूद हैं। एआरटी या असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी में कई बांझपन उपचार शामिल हैं जिसमें शुक्राणु और अंडे को संभाला जाता है। इन विधियों का उपयोग उन महिलाओं के लिए किया जाता है जिनकी फैलोपियन ट्यूब में रुकावट होती है और ऐसे मामलों में जहां शुक्राणु अंडे को निषेचित करने में असमर्थ होते हैं। एआरटी में दवाओं के साथ-साथ शल्य चिकित्सा पद्धतियों के माध्यम से उपचार शामिल हो सकता है।

सीनियर एंब्रॉलजिस्ट डाॅक्टर केशव मल्होत्रा ने देश विदेश से आए बांझपन विशेषज्ञों के समक्ष आधुनिक उपचार पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बांझपन का आधुनिक इलाज दवाओं, सर्जरी, और सहायक प्रजनन तकनीकों से किया जाता है. इनमें से कुछ उपचार विशेष रूप से पुरुषों या महिलाओं के लिए हैं, जबकि कुछ में दोनों साथी शामिल होते हैं। बांझपन के कुछ आधुनिक उपचार हैं। इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें अंडे और शुक्राणु को लैब में निषेचित किया जाता है. फिर निषेचित अंडे को महिला के गर्भाशय में रखा जाता है। अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान (आईयूआई विधि में कैथेटर नाम की एक छोटी ट्यूब के ज़रिए शुक्राणु को गर्भाशय में डाला जाता है। अवरुद्ध फैलोपियन ट्यूब या एंडोमेट्रियोसिस जैसी समस्याओं के इलाज के लिए सर्जरी की जाती है।

इस सम्मेलन में 25 देशों से आए दो हजार से अधिक बांझपन विशेषज्ञों ने भाग लिया जिसमें आगरा के 20 डॉक्टर शामिल हैं। इस मौके पर उजाला सिग्नस रेनबो हॉस्पिटल के एमडी प्रसिद्ध स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर नरेंद्र मल्होत्रा, इसार की प्रेसिडेंट डॉक्टर अमित पाटकी, प्रेसिडेंट इलेक्ट डॉक्टर सुनीता तेंदुलवाडकर, डॉक्टर मीरा अग्निहोत्री, डॉक्टर राजुल त्यागी, ऑस्ट्रेलियाई डॉक्टर राॅबर्ट नोर्मन और डाॅक्टर क्लैयरे बूथ्रोयड उपस्थित थे।

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