आगरालीक्स….जीवन सुंदर तब बनता है जब सुख के साथ शांति भी हो. आगरा में सुंदर काण्ड की कथा और सार गर्भित व्याख्या प्रस्तुत की संत पं. विजय शंकर मेहता महाराज ने
जीवन में अवसर दो बार नहीं मिलते, जो अवसर मिले उसको गंवा न देना। हनुमान जी को एक अवसर मिला प्रभु सेवा का, उसका परिणाम हैं आज हम हनुमान जी की कथा कह-सुन रहे हैं। सुंदर काण्ड हनुमान जी की सफलता का कांड है, जब वह लंका के लिए उड़े, डरपोक और भगोड़े राजा सुग्रीव के मंत्री भर थे, लेकिन जब लंका जलाकर श्री राम जी के पास लौटे, तो विराट स्वरूप में थे। यह व्याख्यान दे रहे थे श्री हनुमत त्रिवेणी कथा के दूसरे दिन खंदारी में आरबीएस कॉलेज के राव कृष्ण पाल सिंह सभागार में पूज्य संत पं. विजय शंकर मेहता जी महाराज।
श्री हरि सत्संग समिति द्वारा आयोजित इस कथा में उन्होंने सुंदरकाण्ड की कथा सुनाते हुए अपना ये व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा आप भरोसे से कथा सुनिए, भरोसे का दूसरा नाम है भगवान। हरेक के जीवन में कुछ न कुछ चल रहा है, आज ही संकल्प लें, उचित को जीवन में स्थान देना है, अनुचित को निकाल बाहर फैंकना है। उन्होंने कहा, जीवन सुंदर तब बनता है जब सुख के साथ शांति भी हो। याद रखें, ये शांति आदमी को खुद ही अर्जित करनी पड़ती है। उन्होंने कहा सुंदर काण्ड हनुमान जी को पाने का कांड है। लक्ष्य की ओर एकाग्रचित्त होकर आगे बढ़ना आप हनुमान जी से सीखिए। जिन्होंने कि लंका जाते हुए बीच में पर्वत पर विश्राम के आग्रह को भी यह कहकर अस्वीकार कर दिया था कि-“राम काज कीजे बिना मोहि कहां विश्राम!” जब हनुमान जी ने लंका दहन किया तो प्रस्तुत किए इस भजन ने झूमने पर मजबूर किया- “सोने की लंका जराए गयो रे एक छोटो सो वानर, रावण को पानी पिलाए गयो रे एक छोटो सो वानर!” जब लंका दहन का प्रसंग सुनाया तो भजन गूंजा – “नाच रहे हनुमान राम धुन गा गाके, छम छम नाचे देखो वीर हनुमान, कहते हैं लोग इसे राम का दीवाना, लहर लहर लहराए रे झंडा बजरंग बली का!”
पूज्य संत पं. विजय शंकर मेहता जी महाराज ने कहा कि किसी भी घर में जाओ पांच सदस्य अगर ड्राइंग रूम में बैठे होंगे तो सब मोबाइल में घुसे होंगे, कोई आपस में संवाद नहीं कर रहा होगा। ये संवादहीनता खतरनाक दिशा में ले जाएगी। हमारा देश दुनिया की बहुत बड़ी शक्ति बनने जा रहा है लेकिन परिवारों के ऊपर जल्द ही संकट आने वाला है। अमेरिका में जो पारिवारिक विघटन हो रहा है वही भारत में होता दिखेगा। परिवार में पति-पत्नी बीच, बच्चों और माता-पिता बीच संबंध को मधुर बनाने का जतन कीजिए। इसको भजन से भी लोगों के दिलों में उतारने का प्रयास करते चले – “कथाएं तो बहाना हैं, हमें परिवार बचाना है, दर-ओ-दीवार के कानों में दो बातें सुनाना है!” घर के दरवाजे पर शुभ चिह्न लगाइए, कुत्तों से सावधान नहीं का बोर्ड नहीं। घर में तुलसी का पौधा जरूर लगाएं। रोज शाम घर की बहन-बेटी उसके आगे दीपक जलाएं। खुशी को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान इस भजन से किया- “जरा मुस्कुराइए, मुस्कान के पीछे जमाना है।”
बुजुर्ग जिन्होंने आप गोद में खिलाए थे उन्हें गले लगाइए
पूज्य संत पं. विजय शंकर मेहता जी महाराज ने बुजुर्गों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा, राम जी ने भी अपनी सेना में सबसे बूढ़े यानि जामवंत को ही सबसे ज्यादा महत्व दिया और उनसे मार्गदर्शन लेकर युद्ध जीता था। आप भी याद रखें जब भी कोई बड़ा काम करने जाएं तो घर के बड़े बूढ़े को सबसे पहले साथ लेकर चलें, सफलता कदम चूमेगी आपके। जहां वृद्धावस्था सम्मानित होती है, वहीं सफलता सुनिश्चित है। आज के दौर में बुजुर्ग उपेक्षा के शिकार हैं। अकेलेपन में हैं। उनको फिजियोथेरेपिस्ट दिया है, नर्स भी दे दी सेवा करने को, लेकिन उनका खुद का बेटा या बेटी जब तक उनको गले न लगाएंगे तब तक उनका कोई भी दुख दूर नहीं हो सकता। कभी कभी सेवा से ज्यादा आपका सानिध्य उनको सुख देता है। पांच या दस मिनट पूजा मत करो, लेकिन अपने घर के बुजुर्गों से अकारण ही बातचीत जरूर करो, उनकी सेवा करके देखो परमात्मा आपको वो सब कुछ दे देगा, जो आप चाहते हो।