आगरालीक्स…आगरा में श्रीमुकुट शोभायात्रा 29 को. 1891 में पहली बार सिर पर रखकर निकली थी यह मुकुट शोभायात्रा, आज एक विशाल मेले के रूप में बदली. जानें इसका इतिहास
आगरा में श्री मुकुट महोत्सव शोभायात्रा 29 सितंबर शुक्रवार को निकाली जाएगी. यह शोभायात्रा दोपहर दो बजे से टीला कालीबाड़ी चित्रा सिनेमा के पास से निकाली जाएगी. हर बार की तरह इस बार भी शोभायात्रा में कई झांकियां निकलेंगी. श्री मुकुट महोत्सव प्रबंध समिति द्वारा कोरी समाज की ओर से श्री रामलीला महोत्सव के प्रथम चरण में भगवान श्री मनकामेश्वर महादेव जी की यह मुकुट शोभायात्रा होगी. शोभायात्रा चित्रा टाकीज, काली बाड़ी रोड, व्यास मार्केट, राजेंद्र मार्केट, गुड़ की मंडी, फुलट्टी बाजार, सेब का बाजार, किनारी बाजार, कसेरठ बाजार, रावतपाड़ा होती हुई श्री मनकामेश्वर नाथ महादेव मंदिर पर समाप्त होगी. शोभायात्रा में कई बैंड भी शामिल होंगे. इस संबंध में आज प्रेसवार्ता आयोजित की गई जिसमें समिति ने श्रीमुकुट शोभायात्रा के इतिहास के बारे में जानकार दी.
समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि श्रीमुकुट शोभायात्रा का प्रारंभ दादा स्व. श्री करन सिंहकोरी ने सन 1891 में दिन पूर्णमासी भद्रपद शुक्ल पक्ष में किया था जो कि आज भी शोभायात्रा की तिथि है. स्व. दादाजी ने मुकुट को सर पर रखकर व मोहल्ले निवासियों ने बांसुरी, तबला, ढोलक, बाजे बजाते हुए शोभायात्रा भजन गाते नाचते हुए श्री मनकामेश्वर नाथ महादेव मंदिर पर भगवान शंकर को मुकुट पहनाकर शोभायात्रा पूर्ण करते थे.
समिति ने बताया कि रामलीला महोत्सव के अभिन्न अंग मुकुट शोभायात्रा की शहर में रह रहे कोरी समाज के हजारों लोगों का यह सबसे बड़ा आयोजन है. लगभग सवा सौ साल पहले शुरू हुआ मुकुट महोत्सव आज विशाल आयोजन का रूप ले चुका है. कभी भगवान महादेव के मुकुट को अपने सिरी पर ले जाने की परम्परा अब एक विशाल मेले के रूप में पहुंच गई है. शहर में निकाले जाने वाली राम बारात और जनकपुरी उत्तर भारत के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में शुमार है और इनकी भ्लव्यता और आकर्षण लोगों को अपना दिवाना बनाते हैं मगर रामलीला महोत्सव से जुड़ा श्रीमुकुट शोभायात्रा का आयोजन ऐसा है जिससे शहरवासियों के साथ ही एक समाज विशेष की आस्था जुड़ी है जो सर्व समाज में धार्मिकता और सद्भावना को प्रेरित करता है. भारतीय संस्कृति में सामाजिक व व्यक्तिगत कार्यों को सफल बनाने के लिए भगवान श्री गणेश की पूजा अर्चना की जाती है लेकिन शास्त्रों में प्राय ये देखा गया है कि चाहे राम अवतार की लीलायें हो या कृष्ण अवतार की लीलायें उन लीलाओं सेक पूर्व शिव कथा कही गई है. इस माध्यम से यह आज भी देखने में आता है कि रामलीला से पूर्व शिव का यह अद्भुत श्री मुकुट महोत्सव शोभायात्रा निकाली जा रही है.