आगरालीक्स… आगरा में आज भाई दूज, अलग अलग शुभ मुहूर्त, जानें
27 अक्टूबर गुरूवार के दिन सर्वार्थसिद्धि योग प्रातः 6:41 बजे से अपराह्न 12:10 बजे तक इस दिन तुला राशि मे सूर्य शुक्र बुध और केतु का चतुर्ग्रही योग भी बन रहा है। इस समय तुला की संक्रांति भीचल रही होगी इस दिन राहू-काल दोपहर 01:30 बजे से दोपहर 03:00 बजे तक रहेगा। इस समय मे भाई-दूज नहीं मनाना चाहिये।
सुबह 8.30 बजे के बाद भाई दूज कर सकते हैं, 12.30 बजे तक भाई दूज की जा सकेगी।
भाई-दूज तिलक मुहूर्त:
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प्रातः काल शुभ के चौघड़िया में 06:29 बजे से 07:52 बजे तक।
दिवाकाल चर-लाभ-अमृत के चौघड़िया मुहुर्त में 10:39 बजे 02:55 बजे तक,

शास्त्रों के अनुसार भाई को यम द्वितीया भी कहते हैं इस दिन बहनें भाई को तिलक लगाकर उन्हें लंबी उम्र का आशीष देती हैं और इस दिन मृत्यु के देवता यमराज का पूजन किया जाता है ब्रजमंडल में इस दिन बहनें यमुना नदी में खड़े होकर भाईयों को तिलक लगाती हैं।
कार्तिक शुक्ल द्वितीया को भाई दूज का पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष यह पर्व 27 अक्टूबर गुरूवार के दिन मनाया जाएगा।
भाई दूज को भ्रातृ द्वितीया भी कहते हैं। इस पर्व का प्रमुख लक्ष्य भाई तथा बहन के पावन संबंध व प्रेमभाव की स्थापना करना है। इस दिन बहनें बेरी पूजन भी करती हैं। इस दिन बहनें भाइयों के स्वस्थ तथा दीर्घायु होने की मंगल कामना करके तिलक लगाती हैं। इस दिन बहनें भाइयों को तेल मलकर गंगा यमुना में स्नान भी कराती हैं। यदि गंगा यमुना में नहीं नहाया जा सके तो भाई को बहन के घर नहाना चाहिए।
यदि बहन अपने हाथ से भाई को भोजन कराये तो भाई की उम्र बढ़ती है और जीवन के कष्ट दूर होते हैं। इस दिन बहनें अपने भाइयों को चावल खिलाएं। इस दिन बहन के घर भोजन करने का विशेष महत्व है। बहन चचेरी अथवा ममेरी कोई भी हो सकती है। यदि कोई बहन न हो तो गाय, नदी आदि स्त्रीत्व पदार्थ का ध्यान करके अथवा उसके समीप बैठ कर भोजन कर लेना भी शुभ माना जाता है।
इस पूजा में भाई की हथेली पर बहनें चावल का घोल भी लगाती हैं उसके ऊपर सिन्दूर लगाकर कद्दू के फूल, पान, सुपारी मुद्रा आदि हाथों पर रखकर धीरे धीरे पानी हाथों पर छोड़ते हुए निम्न मंत्र बोलती हैं।