आगरालीक्स…सर्दियों में रूई की रजाई-गद्दे का क्रेज अभी कम नहीं। सर्दी बढ़ने पर बिक्री भी बढ़ने लगी। जानिये खासियत
सर्दी से बचाव का सबसे अच्छा साधन

सर्दियों से बचाव के लिए रजाई को सबसे अच्छा साधन माना जाता है। समय के साथ बदलाव के साथ रजाई के कपड़ों और रूई के स्थान पर फाइवर की रजाई का इस्तेमाल बढ़ गया है।
रूई की रजाई मध्यमवर्गीय परिवारों की पसंद
रूई की रजाई का क्रेज लेकिन अभी मध्यम वर्गीय परिवारों में बरकरार है।
दिवाली बाद से ही हो जाती है तैयारियां शुरू
रूई की रजाई के लिए सर्दियों की शुरुआत से ही तैयारी शुरू हो जाती है। रूई के गद्दों को भरवाना हो अथवा पुरानी रूई को धुनवा कर दोबारा रजाई-गद्दे तैयार कराना हो।
पांच सौ 15 सौ रुपये तक की रूई की रजाई
रूई की रजाई घटिया आजम खां पर कई स्थानों पर बिक रही है। रूई की रजाई कम से कम कीमत में पांच सौ रुपये से शुरू होकर 15 सौ रुपये तक की अच्छे कवर के साथ मिल रही है। यहां पर रजाई-गद्दे अपने कपड़े के साथ भरवाए जाते हैं और दोनों में डोरे भी डाले जाते हैं। रजाई गद्दो में डोरे डालने के रेट 100 से 150 रुपये पीस के हिसाब से चल रहे हैं।
फाइवर की रजाई का प्रचलन भी खूब बढ़ा
रूई की रजाई का इस्तेमाल करने वाले लोगों का कहना है कि कड़ाके की सर्दियों में रूई की रजाई से जो आराम और गर्मी मिलती है, वह फाइवर से भरी गई रजाई में नहीं मिलती है। फाइवर की रजाई महंगी भी।
रूई की रजाई में जल्दी आती है गरमाई
लोहामंडी के लालाराम का कहना था कि रूई की रजाई ओढ़ने पर शरीर पर भारीपन का अहसास होता है और शरीर की गर्मी से रूई की भरी रजाई जल्द गर्म हो जाती है, जबकि फाइवर की रजाई हल्की होने के कारण उन्हे उससे इतना अच्छा महसूस नहीं होता है।
पुराने समय में रजाई लपेट कर निकल जाते थे लोग
गांवों में पुराने समय में तो वृद्ध लोग सुबह और शाम के समय रूई की रजाई को अपने पर लपेट कर ही घर के कामों के लिए भी निकल जाते थे लेकिन अब यह नजारा कम हो गया है।