आगरालीक्स…आगरा में गुलेल, गिल्ली डंडा और तितली पकड़ने की तरह बचपन से मन में बसा है मेला, दो साल से रौनक नहीं देखी पर अब मन प्रफुल्लित है, इस क्षेत्र में जमने लगा मेले का रंग, झूले बने आकर्षण
आगरा के बल्केश्वर क्षेत्र में श्रावण मास के दूसरे सोमवार को ऐतिहासिक मेला लगता है। हाथों में लोटा, पैरों में घुंघरू और कमर में बंधे घंटों के बीच हर हर महोदव और बम-बम भोले के जयघोषों के साथ लगने वाली 40 किमी. से अधिक लंबी परिक्रमा इसकी मान्यता और महत्व को दर्शाती है। लेकिन दो साल से मेला नहीं लगा था। मानो भगवान रूठ गए हों और क्षेत्र की रौनक छिन गई हो। इस श्रावण मास यह रौनक लौट आई है। मेला दो साल बाद लग रहा है तो स्थानीय और दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं में भी दोगुनी खुशी की लहर देखी जा रही है।

सोमवार को झूले, सर्कस व दुकानें मेले में सजने लगी हैं। मेले में आगरा व आस-पास से लाखों की संख्या में श्रद्धालू पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है। जिला प्रशासन व मेला कमेटी की ओर से मेले में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए वाहन, स्वास्थ्य, पेयजल व सुरक्षा जैसे सभी इंतजाम पूरे किए जा रहे हैं। छोटे-बड़े झूले लगने लगे हैं। राजेश्वर मंदिर पर मेले के बाद दुकानदार स्थानांतरिक होकर अब बल्केश्वर क्षेत्र में पहुंच रहे हैं। दुकानें सजने लगी हैं। मेले का रंग जमने लगा है। बच्चों को झूले पसंद आ रहे हैं। शाम के समय रौनक बढ़ गई है। रंग-बिरंगी रोशनी और दुकानों पर बज रहे फिल्मी गीत मन को खुश कर रहे हैं। बल्केश्वर महादेव पर दर्शनों को जुटे श्रद्धालू, यहां और सभी मंदिरों पर भजनों की गूंज मंत्रमुग्ध कर रही है।
क्षेत्रीय निवासी सोनू का कहना है कि मेले को देखते-देखते बड़े हुए हैं, लेकिन पिछले दो साल से मेला नहीं लगा। इससे मानो रौनक ही चली गई थी। अब एक बार फिर क्षेत्र में रौनक है। वहीं क्षेत्रीय नागरिक मनोज ने बताया कि कोरोना काल के दो वर्ष बाद मेला लग रहा है। इससे यहां के लोगों का उत्साह भी दोगुना है। तमाम लोग अपने रिश्तेदारों, बहन-बेटियों को भी फोन करके मेले की वजह से अपने घर आमंत्रित कर रहे हैं।