आगरालीक्स…आगरा के दयालबाग में सात दिन तक क्या होगा. राधास्वामी सत्संग सभा ने पीएम और सीएम को लिखा लैटर. जानिए क्या कहा…
आगरा के दयालबाग में जमीन पर कब्जे को लेकर प्रशासन और राधास्वामी सत्संग सभा आमने—सामने है. रविवार को यहां जमकर बवाल हुआ, हंगामा, मारपीट और पथराव में कई लोग घायल हुए हैं. इस मामले में इस मामले में सदर तहसील में पुलिस प्रशासन व राधा स्वामी सत्संग सभा के पदाधिकारियों के बीच रविवार रात आठ से 10 बजे तक बैठक चली. सत्संग सभा की तरफ से पक्ष रखा गया कि जिस रास्ते पर गेट लगा है वह सत्संग सभा के नाम दर्ज है. तहसीलदार ने तर्क दिया कि नाम दर्ज का आदेश त्रुटि सुधार के लिए हुआ था। राजस्व अभिलेख में सड़क दर्ज है, 1965 बंदोबस्त सजरा में सड़क दर्ज है, सड़क किसी संस्था या व्यक्ति नहीं हो सकती है, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर प्रचलित रास्ते को बंद करने पर कार्रवाई का अधिकार तहसीलदार के पास है. प्रशासन की ओर से सत्संग सभा को अपना पक्ष रखने के लिए सात दिन का समय दे दिया गया है. वहीं पुलिस और सत्संगियों की ओर से कल के विवाद को लेकर अभी तक कोई भी मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है. आज सोमवार को यहां पूरा माहौल तनावपूर्ण शांत रहा. जिस स्थान पर रविवार को विवाद हुआ, वहां सत्संगी पहरा देते रहे.
प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री को लिखा लैटर
वहीं इस मामले को लेकर अब राधास्वामी सत्संग सभा की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक पत्र भी लिखा गया है. इसमें उन्होंने जिला प्रशासन की ओर से किए गए लाठीचार्ज में अनेक सत्संगियों के घायल होने की बात कही है और पुलिस पर जिला अस्पताल में इलाज नहीं होने देने का भी आरोप लगाया है. उन्होंने लिखा है कि पवित्र भूमि पर निगाह गड़ाई बिल्डर लॉबी साम-दाम-दंड-भेद विफल रहने पर आगरा जिला प्रशासन के जरिए अपनी कुत्सित भावनाओं की पूर्ति में लगी है. इसी कड़ी में रविवार को पुलिस ने सतसंगी माँ, बहन, बेटियों और बच्चों पर बेरहमी से लाठीचार्ज किया, उनके रक्त से इस पावन भूमि को लाल कर दिया है. हमारे परम प्रिय गुरु महाराज डा. बी लाल साहब के समाधि स्थल को खंडित कर दिया है. इससे देश विदेश में रह रहे करोड़ों सतसंगियों का हृदय चित्कार कर उठा, उनकी तड़प का सहज अंदाजा नहीं लगाया जा सकता. उनमें व्यवस्था के खिलाफ गुस्सा है, आक्रोश है.
आगे लिखा है कि प्रशासन अब कागजों की जांच की बात कह रहा है, इसके लिए उसने सात दिन के समय दिया है. तो उसने पहले यह काम क्यों नहीं किया, जबकि राधा स्वामी सत्संग सभा और उसके पदाधिकारी लगातार यह मांग कर रहे थे कि वह हमारे कागजों को देखें उनकी जांच करें और उसे आधार पर आगे की कार्रवाई करें. प्रशासन को जब यह बात आज सही लग रही है तो कार्रवाई से पहले क्यों नहीं लगी और उसने यह अराजकता क्यों फैलाई?