आगरालीक्स ………आगरा के रामबाबू पराठे वाले की पत्नी और बेटे के लिए खाना तक नहीं है। क्या कहना है कि परिवारीजनों का, महिला आयोग ने लिया संज्ञान, रामबाबू पराठे जिसे खाने के लिए देश भर से लोग आते हैं उनकी पत्नी और बेटे भूखे पेट सो रहे हैं।
आगरा के बेलनगंज में रामबाबू पराठे के वालों की दुकान है। इस दुकान पर बाहर से आने वाले पर्यटकों की भी लाइन लगी रहती थी, लोग एक बार रामबाबू के पराठे खाना चाहते थे। मगर, 1983 में रामबाबू का निधन हो गया, इन्हीं के नाम से दुकान का नाम रामबाबू पराठे वाले रखा गया था। घर में रामबाबू की पत्नी सुमित्रा, बेटा रिंकू और बेटी थे। इसी बीच 1986 में रामबाबू पराठे वाले के परिवार में बंटबारा हो गया। सुमित्रा ने अपनी बेटी की शादी कर दी। बेटा रिंकू सुमित्रा के पास ही रहता है।

किराए के मकान में रह रहे, खाने तक का इंतजाम नहीं
रिंकू की नौकरी लग गई लेकिन इसी बीच सड़क हादसे में रिंकू की कूल्हे की हडडी टूट गई। सुमित्रा अपने बेटे की तीमारदारी कर रही हैं, उनके पास इलाज तो छोड़िए खाने के लिए भी पैसे नहीं हैं। संस्थाएं उन्हें खाना खिला रहीं हैं, सुमित्रा तीन साल से किराए के मकान में रह रही हैं।
राज्य महिला आयोग ने लिया संज्ञान
इस मामले में राज्य महिला आयोग ने भी संज्ञान लिया है और डीएम प्रभु एन सिंह ने इस मामले में रिपोर्ट मांगी है।
ये है परिजनों का कहना
सुमित्रा का वीडियो वायरल होने पर रामबाबू पराठे वालों के परिवारिक सदस्य चंद्रमोहन खंडेलवाल, बबलू खंडेलवाल का कहना है कि 1983 में रामबाबू का निधन हो गया, 1986 में पारिवारिक सदस्यों के बीच बंटबारा हो गया। इसके बाद से सुमित्रा अलग रह रहीं थे, कोई लेना देना बाकी नहीं है। मानवीय आधार पर 29 मार्च को 15 हजार रुपये की मदद की थी।