आगरालीक्स…आगरा में यमुना नदी कितनी गहरी है..इसका चौंकाने वाला खुलासा हुआ है..
1.2 मी0 से भी कम गहरी है आगरा में यमुना
आगरा में यमुना नदी कितनी गहरी है इसका चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. यह खुलासा राज्यसभा में हुआ है. भारतीय अन्तर्राष्ट्रीय जलमार्ग प्राधिकरण ने राष्ट्रीय जलमार्ग सं0 110 की डीपीआर जनवरी 2020 में तैयार की गयी जिसमें ताजमहल के 25 किमी अपस्ट्रीम और 23 किमी0 डाउनस्ट्रीम में पानी की गहराई देखी गयी जिसमें से 44.10 किमी0 स्ट्रेच में गहराई 1.2 मी0 से भी कम थी। यह उत्तर जल शक्ति मंत्रालय के जल संसाधन नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग ने राज्य सभा में पूछे गये अतारांकित प्रश्न के उत्तर में दिया। प्रश्न सांसद डॉ. अशोक वाजपेयी द्वारा पूछा गया था।
राज्य सभा में दिये गये उत्तर से यह बात निकलकर आती है कि ताजमहल के 25 किमी अपस्ट्रीम और ताजमहल से 23 किमी डाउनस्ट्रीम अर्थात कुल 48 किमी के यमुना के स्ट्रेच में 44.10 किमी स्ट्रेच की गहराई 1.2 मी0 से भी कम है जबकि 1.2 किमी स्ट्रेच में यमुना की गहराई 1.2 मी0 से लेकर 1.4 मी0 तक है। 1.40 किमी स्ट्रेच में यमुना की गहराई 1.5 मी0 से 1.7 मी0 है और 0.65 किमी स्ट्रेच में गहराई 1.8 मी0 से 2.0 मी0 तक है व शेष 0.65 किमी स्ट्रेच में गहराई 2.0 मी0 से अधिक है।
जल शक्ति मंत्रालय द्वारा दिये गये उत्तर में यह भी कहा गया कि नदी तल की सामग्री में गाद, बालू, बोल्डर आदि के रूप में कार्बनिक और अकार्बनिक घटक शामिल होते हैं जो नदी प्रवाह के साथ आते हैं और उसके तल में जमा हो जाते हैं। यह प्रक्रिया समय के साथ-साथ नदी के मार्ग में चलती रहती है, जो वर्ष के दौरान बहते पानी के नदी के गति पर निर्भर करती है। तदनुसार, नदी की गहराई बदलती रहती है और ऐसे अवसरों पर उथली हो जाती है जब प्रवाह न्यूनतम होता है। हालांकि बाढ़ की अवधि के दौरान, यमुना नदी में बहने वाला अधिकतम निर्वहन (पीक फ्लड) गोकुल बैराज और आगरा जिले से सुरक्षित रूप से गुजरता है और कचरा गाद और अकार्बनिक सामग्री सहित नदी के तल से जमा सामग्री को धो देता है। यह सतत प्रक्रिया हर साल होती है।
यह भी प्रश्न पूछा गया था कि क्या सरकार ने आगरा शहर में यमुना नदी से गाद निकालने/कीचड़ साफ करने/इसके तल को स्वच्छ करने के लिए कोई पहल की है? इसका उत्तर कुछ इस प्रकार दिया गया कि राज्य सरकारों/परियोजना प्राधिकरणों/अन्य मंत्रालयों द्वारा नदी में जमी गाद के व्यापक और समग्र प्रबंधन के लिए जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग, जल शक्ति मंत्रालय द्वारा गाद प्रबंधन पर एक राष्ट्रीय ढांचा (एनएफएसएम) तैयार कियागया है। यह ढांचा नदियों की गाद निकालने के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया प्रदान करती है।

यह भी प्रश्न पूछा गया था कि क्या सरकार ने उत्तर प्रदेश सरकार को तकनीकी, परामर्शी, प्रेरणादायी और प्रोत्साहन संबंधी सहायता प्रदान की है? इसके उत्तर में जल शक्ति मंत्रालय ने कहा कि उत्तर प्रदेश राज्य सरकार को जब भी अनुरोध प्राप्त होता है, सरकार उसे तकनीकी और अन्य सहायता प्रदान करती रही है।
राज्य सभा में दिये गये उत्तर के सम्बन्ध में प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता केसी जैन ने कहा कि राज्य सभा में दिये गये उत्तर से अब जाहिर है कि यमुना नदी उथली हो चुकी है और यदि शीघ्र ही उसकी तलहटी में जमा गाद और बालू को नहीं हटाया गया तो यमुना के अस्तित्व पर भी सवाल खड़ा हो जायेगा। उनकी संस्था आगरा डवलपमेन्ट फाउन्डेशन (एडीएफ) द्वारा सुप्रीम कोर्ट में यमुना की डिसिल्टिंग के लिए आवेदन पत्र लगाया हुआ है जो वहां पर पेन्डिंग है। यदि यमुना की डिसिल्टिंग नहीं हुई तो ऐसी स्थिति में यमुना पर बैराज का कोई लाभ नहीं हो सकेगा। यमुना धीरे-धीरे और अधिक उथली होती जायेगी। यमुना के तल पर अकार्बनिक सामग्री जमा है जिसके कारण भूगर्भ जल का रिचार्ज भी यमुना जैसी बड़ी वाटर बाॅडी से बहुत कम हो रहा है। प्रदेश सरकार इस सम्बन्ध में केन्द्र सरकार द्वारा नदी में जमा गाद को हटाने के लिए बनी योजना के अन्तर्गत पहल करे तो यमुना पुर्नजीवित हो सकेगी। ब्रज में यमुना मात्र नदी नहीं है बल्कि श्रद्धा का आधार भी है। सुप्रीम कोर्ट में भी डिसिल्टिंग के आवेदन पत्र की सुनवाई के लिए शीघ्र पैरवी भी करेंगे।