आगरालीक्स…आगरा के भाजपा नेता और समाजसेवी धर्म प्रकाश वर्मा नहीं रहे. व्यापार और राजनीति जगत में शोक, समाजसेवा, राजनीति और मानवीय संवेदना का एक प्रकाशस्तंभ बुझ गया
समाजसेवा, व्यापार नेतृत्व और राजनीति में अपने अपार योगदान के लिए पहचाने जाने वाले वरिष्ठ भाजपा नेता श्री धर्मप्रकाश वर्मा का 12 जुलाई, शनिवार को आकस्मिक निधन हो गया। वे स्वर्गीय श्री चुन्नीलाल वर्मा के सुपुत्र थे। उनके असामयिक निधन से न केवल आगरा, बल्कि समूचे क्षेत्र में गहरा शोक व्याप्त है। समाज, राजनीति और व्यापारिक जगत ने आज अपना एक सच्चा सपूत खो दिया।श्री वर्मा ने अपने जीवन का प्रत्येक क्षण जनसेवा को समर्पित किया। वे सन 1979 में आरएसएस से जुड़े और सामाजिक कार्यों से प्रभावित होकर सन 1980 में भाजपा से जुड़े । वे भारतीय जनता पार्टी के व्यापार प्रकोष्ठ के पूर्व जिला उपाध्यक्ष, भाजयूमो के पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष, किसान मोर्चा के पूर्व जिला उपाध्यक्ष सहित अनेक महत्वपूर्ण पदों पर आसीन रहे। वह उत्तर प्रदेश पेंट्स व्यापार मंडल एवं आगरा पेंट्स व्यापार मंडल में महत्वपूर्ण पदों पर आसीन रहे । उनके नेतृत्व में संगठन को नई दिशा और ऊर्जा मिली। वह मंडलीय चीफ उपाध्यक्ष उत्तर प्रदेश क्राइम रिपोर्टर एसोसिएशन, ब्ब्यौरौ चीफ सीक्रेट स्क्रीन इंडिया और सह संपादक करंट सीक्रेट्स मासिक पत्रिका के रहे । लेकिन उनकी सबसे बड़ी पहचान एक संवेदनशील, सरल और सेवा भाव से ओतप्रोत समाजसेवी की रही, जो हमेशा अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के लिए आवाज उठाते रहे।
धर्मप्रकाश वर्मा का छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय रहना, उनके भीतर के सामाजिक चेतना के बीज को दर्शाता है। उन्होंने गरीब छात्रों की शिक्षा, जरूरतमंदों की सहायता और समाज में समरसता स्थापित करने के लिए सतत कार्य किया। उनके व्यवहार में सादगी, वाणी में मधुरता और कर्म में निष्कलंक सेवा थी। वे न केवल एक राजनेता थे, बल्कि एक प्रेरणा, एक दिशा और समाज के लिए समर्पण की मिसाल थे।उनकी उठावनी सभा का आयोजन रविवार, 13 जुलाई को सायं 4 बजे से 5 बजे तक श्री हनुमान वाटिका, थाना बमरौली कटारा मे आयोजन किया गया, जहाँ विभिन्न सामाजिक, राजनैतिक एवं व्यावसायिक संगठनों के प्रतिनिधिगण, सहयोगी और शुभचिंतको ने अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की। उनकी अनुपस्थिति समाज के उस स्तंभ की कमी है जो सदा दूसरों को सहारा देता रहा। उनके विचार, उनका सेवाभाव, और उनका सरल व्यक्तित्व हमेशा हमारे दिलों में जीवित रहेगा। उनका सम्पूर्ण जीवन समाज को समर्पित रहा — वे राजनीति में रहते हुए भी हमेशा मानवीय संवेदना के पक्षधर बने रहे।