आगरालीक्स ….आगरा में हृदय दिवस पर डीएम कार्डियोलॉजिस्ट डॉ मनीष शर्मा ने चौंकाने वाले तथ्य सामने रखे हैं, किस पर भरोसा करें, उन्होंने ईसीजी, ईको, एंजियोग्राफी को लेकर भ्रम दूर किए हैं।
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देश के टॉप जीबी पंत इंस्टीटयूट से डीएम कार्डियोलॉजिस्ट, अविका कार्डियक सेंटर, रवि हॉस्पिटल परिसर, दिल्ली गेट के डॉ मनीष शर्मा ने बताया कि बुखार को थर्मामीटर से नापते हैं, इसी तरह हृदय की नब्ज टटोलने के लिए ईसीजी, ईको किया जाता है लेकिन कई बार ईसीजी और ईको सामान्य होने पर भी हार्ट ब्लॉकेज हो सकती है, इसके लिए एंजियोग्राफी की जाती है। अत्याधुनिक एंजियोग्राफी में हाथ की नस से एक टयूब डाली जाती है, इसमें कैमरा लगा होता है, यह दिल की ब्लड सप्लाई करने वाली दोनों आर्टरीज को देखती है, इससे पता चल जाता है कि ब्लॉकेज तो नहीं है। कई बार यह ब्लॉकेज एंजियोग्राफी करते समय खुल जाता है तो अधिकांश केस में ब्लॉकेज होने पर स्टेंट डाला जाता है, यह एक छल्ले के आकार का होता है, ब्लॉकेज वाली आर्टरीज में एक बलून डाला जाता है, जिससे वह फूल जाती है, इसके बाद छल्ले को वहां फिक्स कर देते हैं, इससे दिल को खून की सप्लाई मिलती रहती है।
मरीजों से लें सेंटर की फीडबैक

हार्ट पेशेंट कई सालों तक इलाज कराते हैं और लाखों रुपये खर्च कर देते हैं, वे अपना इलाज ऐसे सेंटर में कराएं, जिसका रिकॉर्ड अच्छा हो, यह वहां इलाज करा चुके मरीजों से बेहतर कोई नहीं बता सकता है, तो आपका खर्चा कम हो जाएगा। शुरू में इलाज महंगा लग सकता है लेकिन उन मरीजों से तुलना करेंगे जो छह महीने में लाखों रुपये खर्च कर चुके हैं और डॉक्टरों के चक्कर लगा रहे हैं तो उनसे सस्ता पडेगा।