आगरालीक्स…। देव दीपावली, कार्तिक पूर्णिमा एवं गुरु नानक प्रकाशोत्सव 19 नवम्बर को है। इस दिन दान-यज्ञ से पाप-ताप का शमन होता है।
देवता मनाते हैं देव दीपावली
कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है इस पुर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा की संज्ञा इसलिए दी गई है क्योंकि कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही भगवान भोलेनाथ ने त्रिपुरासुर नामक महाभयानक असुर का अंत किया था और वे त्रिपुरारी के रूप में पूजित हुए थे। इसलिए इस दिन देवता अपनी प्रसन्नता को दर्शाने के लिए गंगा घाट पर आकर दीपक जलाते हैं। इसी कारण से इस दिन को देव दीपावली के रूप मनाया जाता है।
दीप दान करने की है परंपरा
ज्योतिषाचार्य पंडित हृदय रंजन शर्मा के मुताबिक श्रद्धालु 18 नवम्बर के दिन पूर्णिमा व्रत रखकर अगले दिन 19 नवम्बर के दिन गंगाघाट एवं अन्य धार्मिक स्थलों पर दीप दान करेंगे।
कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान, दीप दान, हवन, यज्ञ करने से सांसारिक पाप और ताप का शमन होता है। अन्न, धन एव वस्त्र दान का बहुत महत्व बताया गया है इस दिन जो भी आप दान करते हैं, उसका आपको कई गुणा लाभ मिलता है। मान्यता यह भी है कि आप जो कुछ इस दिन दान करते हैं वह आपके लिए स्वर्ग में सरक्षित रहता है जो मृत्यु लोक त्यागने के बाद स्वर्ग में आपको प्राप्त होता है।
गुरु नानक देव का प्रकाशोत्सव
कार्तिक पूर्णिमा का दिन सिख सम्प्रदाय के लोगों के लिए भी काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस दिन सिख सम्प्रदाय के संस्थापक गुरू नानक देव का जन्म हुआ था। सिख सम्प्रदाय को मानने वाले सुबह स्नान कर गुरूद्वारों में जाकर गुरुवाणी सुनते हैं।
पूर्णिमा तिथि आरंभ:- 18 नवंबर दोपहर 12:00 बजे से
पूर्णिमा तिथि समाप्त:- 19 नवंबर दोपहर 02 बजकर 27 मिनट तक
देव दीपावली प्रदोष काल शुभ मुहूर्त- 19 नवम्बर शाम 5 बजकर 11 मिनट से 7 बजकर 48 मिनट तक