आगरालीक्स..इस बार 20 अक्टूबर मंगलवार को रवि योग मे मनाया जाएगा दशहरा का महापर्व – शाम 05:47 से रात्रि 08:30 तक रहेगा रावण दहन का शुभ मुहूर्त..जानिए शस्त्र पूजन के शुभ मुहूर्त कब
ज्योतिषाचार्य हृदय रंजन शर्मा ने बताया विजय और उल्लास के महापर्व विजयादशमी (दशहरा) का यह पावन दिन इस वर्ष 20 अक्टूबर 2026, मंगलवार को पूरे देश में अपार उत्साह के साथ मनाया जाएगा। यह पर्व असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की शाश्वत विजय की याद दिलाता है। इस दिन विजय मुहूर्त में शस्त्र पूजा करते हैं. शाम के समय में रावण के साथ कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है। पंचांग के अनुसार, इस साल दशहरा के लिए आश्विन शुक्ल दशमी तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर में 12 बजकर 50 मिनट पर शुरू हो रही है और 21 अक्टूबर को दोपहर में 2 बजकर 11 मिनट पर खत्म होगी.
यदि उदयातिथि के आधार पर देखा जाए तो दशमी तिथि 21 अक्टूबर दिन बुधवार को पड़ रही है. इस अनुसार दशहरा 21 अक्टूबर को होना चाहिए. लेकिन ऐसा नहीं है. दशहरा के लिए दशमी तिथि के अलावा नक्षत्र, विजय मुहूर्त और प्रदोष काल को भी देखना चाहिए. शास्त्रों के अनुसार, दशमी तिथि को श्रवण नक्षत्र हो तो दशहरा या विजयादशमी मनाते हैं. अब श्रवण नक्षत्र 21 अक्टूबर को नहीं मिल रहा है, और न प्रदोष काल. वहीं विजय मुहूर्त भी केवल 12 मिनट का है. जबकि 20 अक्टूबर को दशमी तिथि दोपहर से शुरू हो रही है, जिसमें श्रवण नक्षत्र, प्रदोष काल और विजय मुहूर्त तीनों ही प्राप्त हो रहे हैं. ऐसे में इस साल दशहरा 20 अक्टूबर मंगलवार को मनाया जाएगा.
रावण दहन शुभ मुहूर्त
दशहरा के दिन शाम 5 बजकर 47 मिनट के बाद रावण दहन का शुभ मुहूर्त प्रारंभ हो रहा है जो रात 08:30 बजे प्रदोष काल की समाप्ति तक रहेगा।
शस्त्र पूजा के लिए विजय मुहूर्त : दोपहर 1:59 बजे से 2:45 बजे तक
पंचांग के अनुसार 20 अक्टूबर 2026 को रवि योग पूरे दिन यानी सुबह 06:25 बजे से शुरू होकर अगले दिन 21 अक्टूबर को सुबह 06:25 बजे तक (अर्थात पूरे 24 घंटे) रहेगा।
अपराह्न पूजा का समय : दोपहर 1:14 बजे से शाम 3:30 बजे तक
प्रदोष काल की शुरुआत : शाम 5:47 बजे
श्रवण नक्षत्र प्रारंभ : 19 अक्तूबर, शाम 3:38 बजे
श्रवण नक्षत्र समाप्त : 20 अक्तूबर, शाम 6:02 बजे
निशिता मुहूर्त : रात 11:41 बजे से 12:31 बजे तक
रवि योग में मनेगा दशहरा –
इस साल दशहरा का त्योहारा रवि योग में मनाया जाएगा. उस दिन पूरे समय रवि योग बना हुआ है. यह एक शुभ योग है क्योंकि इसमें ग्रहों के राजा सूर्य का प्रभाव अधिक होता है, जिससे सभी प्रकार के दोष मिट जाते हैं.
इस दिन ही होगा शस्त्र पूजा –
विजयादशमी के दिन शस्त्र पूजा का भी विधान है. ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी ने बताया की धार्मिक कथाओं के अनुसार, महाभारत काल में पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान अपने अस्त्र-शस्त्र शमी के वृक्ष में छिपाए थे. अज्ञातवास पूरा होने के बाद उन्होंने आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को अपने शस्त्रों को निकालकर उनकी पूजा की थी. इसलिए इस दिन शस्त्र पूजा की भी परम्परा है. इसके अलावा इस दिन नीलकंठ पक्षी का दर्शन करना भी बेहद शुभकारी माना जाता है. इससे मनुष्य को धन धान्य की प्राप्ति होती है.
दशहरे पर कैसे करें पूजा ?
विजयादशमी के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थल की सफाई करें. इसके बाद भगवान श्रीराम और मां दुर्गा का स्मरण करके पूजा करें. इस दिन शमी के पेड़, अपराजिता और शस्त्रों की पूजा करने की भी परंपरा है . पूजा के दौरान भगवान को फूल, फल, मिठाई और अपनी श्रद्धा के अनुसार अन्य सामग्री अर्पित की जा सकती है. जो लोग शस्त्र पूजा करते हैं, वे अपने औजारों या कार्य से जुड़े उपकरणों की भी पूजा करते हैं . पूजा के समय सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी है।