
भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के जिलाध्यक्ष श्याम सिंह चाहर ने उक्त मांगों को लेकर 17 फरवरी को धरना देने का एलान किया था। इसके लिए जागरूकता यात्रा भी निकाली गई थी। मंगलवार रात को पुलिस ने इस प्रदर्शन को रोकने की तमाम कोशिश कीं लेकिन सफलता नहीं मिली। बुधवार सुबह बड़ी संख्या में किसान पावर ग्रिड के गेट पर धरने पर बैठ गए। चेतावनी दी कि यदि शाम तक अफसरों ने उनसे बात नहीं की तो आंदोलन उग्र कर दिया जाएगा। तभी बसपा विधायक कालीचरण सुमन भी पहुंच गए। किसान दिनभर धरना देते रहे लेकिन पावर ग्रिड के अफसर नहीं आए। इससे गुस्साए किसानों ने शाम तकरीबन पांच बजे शमसाबाद क्षेत्र में गांव गढ़ी श्रीपत के पास आगरा-इटावा रेल लाइन पर कब्जा कर लिया। उन्होंने पटरियों को उखाड़ने की चेतावनी दी। इसकी खबर मिलते ही प्रशासन के हाथ-पैर फूल गए। एडीएम प्रशासन हरनाम सिंह, एसडीएम सदर एमपी सिंह, पुलिस के वरिष्ठ अफसर फोर्स के साथ पहुंचे। प्रशासन ने पावर ग्रिड के अफसरों को बुलाकर किसानों की बात कराई। इसके बाद ही किसान वहां से हटे।
पांच लाख की आर्थिक मदद
एडीएम सिटी हरनाम सिंह ने बताया कि वार्ता में मृतक किसान के परिवार को पांच लाख रुपये देने और अधिग्रहण प्रभावित गांवों में तकरीबन तीन करोड़ रुपये से विकास कार्य कराने पर सहमति बनी। यह राशि स्वीकृत हो गई है। पावर ग्रिड के अफसरों ने 15 दिन में विकास कार्य शुरू कराने का भरोसा दिया है। जिलाध्यक्ष श्याम सिंह चाहर ने बताया कि किसान के परिवार को पांच लाख रुपये का चेक भिजवा दिया गया है। विकास कार्यों के लिए अफसरों को एक माह का समय दिया है। यदि तय समय में काम शुरू नहीं हुए तो आंदोलन उग्र होगा। किसानों की बिना सहमति के एक भी खंभा नहीं लगाने दिया जाएगा।
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