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Jagannath Dham is called the heaven of the earth, know the secrets here…#agranews

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आगरालीक्स…जगन्नाथ धाम को धरती का बैकुंठ कहा जाता है. धाम के रहस्यों के बारे में जानेंगे तो अचरज रह जाएंगे. 20 जून को श्री जगन्नाथ जी रथ यात्रा पर विशेष…

पुराणों में जगन्नाथ धाम की काफी महिमा है, इसे धरती का बैकुंठ भी कहा गया है। जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और उनकी बहन सुभद्रा की पूजा की जाती है। मंदिर में भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा सबसे दाई तरफ स्थित है। बीच में उनकी बहन सुभद्रा की प्रतिमा है और बIई तरफ उनके बड़े भाई बलभद्र (बलराम) विराजते हैं। महाप्रभु जगन्नाथ (श्री कृष्ण) को कलियुग का भगवान भी कहते है…. l ऐसी मान्यता है कि मंदिर में मौजूद प्रतिमा के अंदर ब्रह्माजी का वास है। जब श्रीकृष्ण ने धर्म स्थापना के लिए धरती पर अवतार लिया तब उनके पास अलौकिक शक्तियां थीं। लेकिन शरीर मानव का था। जब धरती पर उनका समय पूरा हो गया तो वो शरीर त्यागकर अपने धाम चले गए। इसके बाद पांडवों ने उनका अंतिम संस्कार किया। लेकिन शरीर ब्रह्मलीन होने के बाद भी उनका हृदय जलता ही रहा। पांडवों ने इसे जल में प्रवाहित कर दिया। जल में हृदय ने लट्ठे का रूप धारण कर लिया और उड़ीसा के समुद्र तट पर पहुंच गया। यही लठ्ठा राजा इंद्रदुयम्न को मिल गया।

मान्यता है कि मालवा नरेश इंद्रद्युम्न जो कि भगवान विष्णु के भक्त थे उन्हें स्वयं श्री हरि ने सपने में दर्शन दिये और कहा कि पुरी के समुद्र तट पर तुम्हें एक दारु (लकड़ी) का लठ्ठा मिलेगा उस से मूर्ति का निर्माण कराओ। राजा जब तट पर पंहुचे तो उन्हें लकड़ी का लट्ठा मिल गया। अब उनके सामने यह प्रश्न था कि मूर्ति किन से बनवाये। कहा जाता है कि भगवान विष्णु और स्वयं श्री विश्वकर्मा के साथ एक वृद्ध मूर्तिकार के रुप में प्रकट हुए। वृद्ध मूर्तिकार नें कहा कि वे एक महीने के अंदर मूर्तियों का निर्माण कर देंगें लेकिन इस काम को एक बंद कमरे में अंजाम देंगें। एक महीने तक कोई भी इसमें प्रवेश नहीं करेगा ना कोई तांक-झांक करेगा , चाहे वह राजा ही क्यों न हों। महीने का आखिरी दिन था, कमरे से भी कई दिन से कोई आवाज़ नहीं आ रही थी, तो कोतुहलवश राजा से रहा न गया और अंदर झांककर देखने लगे लेकिन तभी वृद्ध मूर्तिकार दरवाजा खोलकर बाहर आ गये और राजा को बताया कि मूर्तियां अभी अधूरी हैं उनके हाथ और पैर नहीं बने हैं। राजा को अपने कृत्य पर बहुत पश्चाताप हुआ और वृद्ध से माफी भी मांगी लेकिन उन्होंने कहा कि यह सब दैव वश हुआ है और यह मूर्तियां ऐसे ही स्थापित होकर पूजी जायेंगीं। तब वही तीनों जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियां मंदिर में स्थापित की गयीं। आज भी भगवान जगन्नाथ, बलभद्र एवं सुभद्रा की मूर्तियां उसी अवस्था में हैं।

इनका काष्ठ आवरण हर 12 साल के बाद बदल दिया जाता है। मगर लठ्ठा वैसा ही रहता है। जब मंदिर के पुजारी इस लठ्ठे को बदलते हैं तो उनकी आंखों पर पट्टियां बंधी रहती हैं और हाथ कपड़े से ढंके रहते हैं। ऐसे में पुजारी न तो इसे देख पाते हैं और न ही छू पाते हैं । ऐसा माना जाता है कि जो कोई इसे देख लेगा उसकी मौत हो जाएगी l उस समय सुरक्षा बहुत ज्यादा होती है.कोई भी मंदिर में नही जा सकता.मंदिर के अंदर घना अंधेरा रहता है.पुजारी की आँखों मे पट्टी बंधी होती है.पुजारी के हाथ मे दस्ताने होते है..वो पुरानी मूर्ती से “ब्रह्म पदार्थ” निकालता है और नई मूर्ती में डाल देता है.ये ब्रह्म पदार्थ क्या है आज तक किसी को नही पता.इसे आज तक किसी ने नही देखा. ये एक अलौकिक पदार्थ है जिसको छूने मात्र से किसी इंसान के जिस्म के चिथड़े उड़ जाए.इस ब्रह्म पदार्थ का संबंध भगवान श्री कृष्ण से है.मगर , आज तक कोई भी पुजारी ये नही बता पाया की महाप्रभु जगन्नाथ की मूर्ती में आखिर ऐसा क्या है ??? कुछ पुजारियों का कहना है कि जब हमने उसे हाथमे लिया तो खरगोश जैसा उछल रहा था आंखों में पट्टी थी हाथ मे दस्ताने थे तो हम सिर्फ महसूस कर पाए।

जगन्नाथ धाम के से जुड़े हैरान करने वाले रहस्य
जगन्नाथ मंदिर 4 लाख वर्गफुट में फैला है और इसकी ऊंचाई लगभग 214 फुट है। मंदिर की इतनी ऊंचाई के कारण ही पास खडे़ होकर भी आप गुंबद नहीं देख सकते।
गवान जगन्नाथ मंदिर के सिंहद्वार से पहला कदम अंदर रखते ही समुद्र की लहरों की आवाज अंदर सुनाई नहीं देती, जबकि आश्चर्य में डाल देने वाली बात यह है कि जैसे ही आप मंदिर से एक कदम बाहर रखेंगे, वैसे ही समुद्र की आवाज सुनाई देंगी l आपने ज्यादातर मंदिरों के शिखर पर पक्षी बैठे-उड़ते देखे होंगे, लेकिन इस जगन्नाथ मंदिर के ऊपर से कोई भी पक्षी या विमान नहीं उड़ पाता है।
मंदिर के पास हवा की दिशा भी हैरान करती है। ज्यादातर समुद्री तटों पर हवा समंदर से जमीन की तरफ चलती है। लेकिन, पुरी में ऐसा बिल्कुल नहीं है यहां हवा जमीन से समंदर की तरफ चलती है और यह भी किसी रहस्य से कम नहीं है। आम दिनों में हवा समंदर से जमीन की तरफ चलती है। लेकिन, शाम के वक्त ऐसा नहीं होता है भगवान जगन्नाथ मंदिर के 45 मंजिला शिखर पर स्थित 20 फीट का ट्रायएंगुलर ध्वज ( झंडा ) लहराता है इसे रोजाना बदला जाता है। झंडा हमेशा हवा की उल्टी दिशामे लहराता है l एक पुजारी मंदिर के 45 मंजिला शिखर पर स्थित झंडे को रोज बदलता है। इसे बदलने का जिम्मा चोला परिवार पर है वह इसे 800 साल से करती चली आ रही है। ऐसी मान्यता है कि अगर एक दिन भी झंडा नहीं बदला गया तो मंदिर 18 सालों के लिए बंद हो जाएगा।
भगवान जगन्नाथ मंदिर के शिखर पर एक सुदर्शन चक्र भी है, जो हर दिशा से देखने पर आपके मुंह आपकी तरफ दीखता है।विज्ञान के अनुसार, किसी भी चीज पर सूरज की रोशनी पड़ने पर उसकी छाया जरूर बनती हैं। मगर इस मंदिर के मुख्य शिखर की कोई छाया या परछाई दिन में किसी भी समय नहीं बनती, दिखती ही नहीं है।
भगवान जगन्नाथ मंदिर की रसोई में प्रसाद पकाने के लिए मिट्टी के 7 बर्तन एक-दूसरे के ऊपर रखे जाते हैं, जिसे लकड़ी की आग से ही पकाया जाता है, इस दौरान सबसे ऊपर रखे बर्तन का पकवान पहले पकता है।

बताया जाता है कि इस मंदिर में भक्तों के लिए बनने वाला प्रसाद कभी कम नहीं पड़ता है। मंदिर में वर्ष भर सामान्य मात्रा में ही प्रसाद बनाया जाता है, लेकिन भक्तों की संख्या 1000 हो या एक लाख प्रसाद किसी को कम नहीं पड़ता। मंदिर का कपाट बंद होते ही बचा हुआ प्रसाद खत्म हो जाता है। 500 रसोइए अपने 300 सहयोगियों के साथ प्रसाद बनाते हैं। जगन्नाथ पुरी हिन्दू धर्म के चार धाम बद्रीनाथ, द्वारिका, रामेश्वरम और जगन्नाथ पुरी में से एक है। कहा जाता है तीन बद्रीनाथ, द्वारिका और रामेश्वरम की यात्रा करनी चाहिए उसके बाद ही जगन्नाथ पुरी आना चाहिए। वैसे तो जब भक्त का बुलावा भगवान करते हैं तो वह दुर्गम से दुर्गम स्थल पर भी पंहुच जाता है और जब उसकी मर्जी नहीं होती तो आंखों के सामने होते हुए भी प्राणी अंदर प्रवेश नहीं कर सकता।

प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य परम पूज्य गुरुदेव पंडित हृदय रंजन शर्मा अध्यक्ष श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान गुरू रत्न भण्डार पुरानी कोतवाली सर्राफा बाजार अलीगढ़ यूपी व्हाट्सएप नंबर-9756402981,7500048250

Written by
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