आगरालीक्स… आगरा में बीमार गाय में अभी लंपी वायरस की पुष्टि नहीं हुई है। बीमार गाय-भैंस का दूध पीने को लेकर लोगों में डर बैठ गया है। क्या इस दूध को पिया जा सकता है। जानिये क्या कहते हैं पशु चिकित्सक।
आगरा में लंपी वायरस का संदिग्ध केस आया है। वायरस की अभी पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन इसके बावजूद लोगों में बाजार के दूध को लेकर डर व्याप्त है कहीं इससे कोई बीमारी हो सकती है। लेकिन ऐसा नहीं है।

अभी हाल ही में सेवानिवृत्त हुए सीवीओ वासुदेव तोमर ने आगरालीक्स को बताया कि लंपी वायरस ग्रस्त गाय-भैंस के दूध को अच्छीतरह से उबाल कर इस्तेमाल करने से अथवा पॉश्चराइड दूध में वायरस खत्म हो जाता है। चिकित्सकों द्वारालंपीग्रस्त गाय अथवा भैंस के दूध का कई जांच की जा रही है। इसमें उबाल लेने के बाद किसी तरह का खतरे की बात सामने नहीं आई है। साथ ही लंपी वायरस के मनुष्य में फैलने की संभावना भी न के बराबर होती है लेकिन फिर भी लंपी वायरस ग्रस्त के पशु के संपर्क में आने बचना जरूरी है। ऐसे पशु को छुआ है तो अच्चीतरह से हाथ धोना भी जरूरी है।
बीमारी से पीड़ित गाय के नूमने गए हैं जांच कोः प्रभारी सीवीओ
प्रभारी सीवीओ बीके खरे ने बताया कि अटूस में जिस गाय को लंपी वायरस से पीड़ित बताया जा रहा है, उसका पशु चिकित्सकों की टीम द्वारा इलाज किया जा रहा है। सैंपल जांच के लिए भेज दिए गए हैं, रिपोर्ट आने के बाद ही लंपी वायरस के बारे में पुष्टि की जाएगी।
शासन से गाइड लाइन जारी हुईः तोमर
अभी हाल ही में सेवानिवृत्त हुए सीवीओ वासुदेव तोमर ने आगरालीक्स को बताया कि शासन ने लंपी वायरस को लेकर पशुओं को लेकर गाइड लाइन जारी कर दी है। पशुओं के लिए वैक्सीन भी तैयार हो गई है, जिसे शीघ्र ही पशुओं को लगाया जाएगा।
भैंसों से ज्यादा गायों को खतरा
लंपी स्किन डिजीज (एलएसडी) गाय-भैंस जैसे मवेशियों में कैप्रिपॉक्स नाम के वायरस से तेजी से फैलती है। पशु चिकित्सक मवेशियों के लिए बड़ा खतरा मान रहे हैं। इससे गायें ज्यादा बीमार होती हैं। हालांकि इससे अन्य पशु भी बीमार पड़ सकते हैं। इस वायरस से भैंसों के मुकाबले गायों की मौत ज्यादा होती है क्योंकि भैसों की नैचुरल इम्युनिटी गायों से ज्यादा होती है।