आगरालीक्स…कैलादेवी जा रहे हैं तो करौली के ‘मदन मोहन मंदिर’ में दर्शन करने जाइए. राधाकृष्ण के इस भव्य व प्राचीन मंदिर में लगता है लड्डू व कचौरी का भोग. जानिए इस मंदिर की जानकारी और दर्शन टाइमिंग
आगरा से हजारों की संख्या में इस समय पदयात्री कैलादेवी की परिक्रमा के लिए जा रहे हैं. आगरा ही नहीं बल्कि आसपास फिरोजाबाद, इटावा, हाथरस व मथुरा से भी काफी संख्या में लोग पैदल कैलादेवी दर्शन के लिए इस समय रास्तों पर चल रहे हैं. चैत्र नवरात्रि में कैलादेवी मंदिर में लगने वाले विशाल मेले में लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. पैदल जाने वाले यात्री नवरात्रि के पहले दिन पड़वा का पूजन यहां करते हैं. इसके अलावा भी काफी संख्या में लोग अपने वाहन, बस व ट्रेन के जरिए आगरा से कैलादेवी दर्शन के लिए जा रहे हैं.
करौली के चार धामों में से एक है मदन मोहन मंदिर
करौली के चार धाम हैं जिसमें एक कैला देवी मंदिर, दूसरा मेहंदीपुर बालाजी मंदिर, तीसरा श्री महावीरजी का मंदिर और चौथा है करौली स्थित मदन मोहन मंदिर. करौली जिले का मदनमोहन मंदिर अपने आप में विशेष है. यह मंदिर भद्रावती नदी के किनारे है. मंदिर में स्थापित राधा कृष्ण की मूर्ति अष्टधातु से निर्मित हैं. इसमें कृष्ण जी की मूर्ति तीन फीट तो राधा जी की मूर्ति दो फीट की है. ये मूर्तियां इतनी प्राचीन हैं कि इनकी कीमत का कोई अनुमान लगाना भी मुश्किल है. राधाकृष्ण की ये मूर्तियां दिखने में बेहद सुंदर हैं.
कचौरी लड्डू का लगता है भोग
करौली में स्थित मदन मोहन मंदिर में दर्शन के लिए दूर—दूर से भक्त आते हैं. मंदिर में भक्तों द्वारा चढ़ाया जाने वाला जुगल प्रसाद एक ऐसा भोग है जिसमें लड्डू और कचौरी शामिल है. इस मंदिर के बारे में बताया जाता है कि जब श्री गोपाल सिंह जी को दलातबाद की लड़ाई में जीत हासिल हुई तो उन्हें एक सपना आया. सपने में उन्हें भगवान कृष्ण ने अपनी मूर्ति ओर से करौली स्थापित करने को कहा. इसके बाद गोपाल सिंह जी ने कृष्ण की इस मूर्ति को आमेर से लाकर करौली में मंदिर निर्माण करवाकर स्थापित किया. कहते हैं कि मुगलों से बचाने के लिए कृष्ण की दो मूर्तियों को वृंदावन से लाया गया था जिनमें सेएक जयपुर और दूसरी करौली में है.
दर्शन की टाइमिंग
मंदिर सुबह 5 बजे से रात 10 बजे तक खुला रहता है. सुबह 5 बजे मंगल आरती, 9 बजे धूप आरती और फिर 11 बजे श्रृंगार आरती होती है. इसके बाद दोपहर तीन बजे फिर धूप आरती और शाम को सात बजे से संध्या आरती होती है. मंदिर में पांच बार भोग लगता है और खास विशेष अवसरों पर भगवान को छप्पन भोग भी लगाया जाता है.