आगरालीक्स…चैत्र नवरात्रि की दुर्गा अष्टमी पर होगी महागौरी की पूजा. जानें अष्टमी पर कन्या लांगुरा पूजन व जिमाने का शुभ मुहूर्त…
चैत्र शुक्ल पक्ष अष्टमी दिन शनिवार पुनर्वसु नक्षत्र, अतिगंड योग विष्टी करण के शुभ संयोग में 05 अप्रैल 2025 को ही दुर्गा अष्टमी माता महागौरी की पूजा मान्य रहेगी.
माता महागौरी को गुलाबी रंग पसंद है
भोग में नारियल पसंद है
इससे संतान संबंधी परेशानियो से हमेशा-हमेशा को मुक्ति मिलती है.
दुर्गा की आठवीं शक्ति हैं महागौरी
मां दुर्गा की आठवीं शक्ति का नाम माता महागौरी है. नवरात्र के आठवें दिन इनकी पूजा का विधान है. सौभाग्य, धन संपदा, सौंदर्य और स्त्री जिनत गुणों की अधिष्ठात्री देवी महागौरी हैं. 18 गुणों की प्रतीक महागौरी अष्टांग योग की अधिष्ठात्री देवी हैं. वह धन-धान्य, गृहस्थी, सुख और शांति की प्रदात्री है. महागौरी इसी का प्रतीक है इस गौरता कि उपमाशंख, चंद्र और कुंद के फूल से की गई है. इनके समस्त वस्त्र आभूषण आदि स्वेत है. अपने पार्वती रूप में इन्होंने भगवान शिव को पति के रुप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी. इससे उनका शरीर एकदम काला पड़ गया था. तपस्या से प्रसन्न होकर जब भगवान शिव ने इनके शरीर को गंगाजी के पवित्र जल से धोया (छिड़का) तो वह विद्युत प्रभा के समान अत्यंत कांतिमान गौर (अति सुंदर) हो गई और वह माता महागौरी हो गई.
सृष्टि का आधार हैं महागौरी
महागौरी सृष्टि का आधार है. मां गौरी की अक्षत सुहाग की प्रतीक देवी हैं. इनकी उपासना से भक्तों के सभी पाप संताप दैन्य दुख उनके पास कभी नहीं आतेहै. मां महागौरी का ध्यान सर्वाधिक कल्याणकारी है. जिन घरों में अष्टमी पूजन किया जाता है और अष्टमी के दिन जो माताएं बहने अपने नवजात शिशु की दीर्घायु एवं उत्तम स्वास्थ्य की रक्षा के लिए पूजा या व्रत रखती हैं या पथवारी माता की पूजा करती हैं उन सभी के लिए अष्टमी का व्रत माता महागौरी की पूजा अत्यंत ही कल्याणकारी व महत्वपूर्ण होती है.
पूजा पाठ एवं कन्या लांगुरा जिमाने का शुभ मुहूर्त
विश्व प्रसिद्ध चौघड़िया मुहूर्त अनुसार प्रातः 07:42 से लेकर दिवाकाल 09:15 तक “शुभ”का चौघड़िया मुहूर्त रहेंगा. इसके बाद दोपहर 12:22 से दोपहर 03:21तक तीन बहुत ही अति सुंदर चौघड़िया मुहूर्त चर, लाभ और अमृत के रहेंगे जो पूजा पाठ हवन यज्ञ अनुष्ठान के लिए बहुत ही सर्वोत्तम कहे जा सकते हैं. इसमें सभी प्रकार के घरेलू लोग, पढ़ाई लिखाई करने वाले विद्यार्थियों और व्यापारियों के लिए भी शुभ कहा जाएगा. इसमें नौकरी पेशा और पढ़ने वाले बच्चों के लिए पूजा करना सर्वोत्तम रहेगा. इसमें व्यापारी वर्ग के लोगों के लिए पूजा पाठ करना व जिन कन्याओं की शादी में विलंब है व जिन माताओं बहनों के संतान में दिक्कत परेशानियां आरही हैं उन लोगों के लिए पूजा पाठ करना सर्वोत्तम रहता है.
इसके लिए माता बहने प्रातः काल उठकर साफ शुद्ध होकर पूजा घर में गंगाजल को छिडके. उसे शुद्ध करें. माता को नए वस्त्र आभूषण, सजावट ,सिंगार करके पूजा पूजा घर को सुन्दर बनाये. पूजा घर में 9 वर्ष तक की कन्या से हल्दी, रोली या पीले चंदन का हाथ का (थापा चिन्ह) लगवाएं जिससे देवी मां का स्वरूप मानते हैं. बच्ची को यथायोग्य दक्षिणा या उपहार देकर विदा करें. उसके पैर छुए. आशीर्वाद लें. इसके बाद सपिरवार वहां बैठ कर पूजा पाठ हवन यज्ञ अनुष्ठान माला जाप दुर्गा सप्तशती का पाठ आदि करें. तत्पश्चात कन्या लागुरा अवश्य जिमाये. बचे हुए प्रसाद में से थोड़ा सा भोग प्रसाद अवश्य लें. इसे माता का भोग प्रसाद समझकर ग्रहण करें इससे ही व्रत का पारण होता है.
पौराणिक मंत्र
सर्व मंगल मांगल्यै शिवे सर्वार्थ साधिके शरण्यै त्र्यंबके गौरी नारायणी नमोस्तुते
प्रसिद्ध (ज्योतिषाचार्य)परमपूज्य गुरुदेव पंडित ह्रदय रंजन शर्मा (अध्यक्ष )श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान गुरु रत्न भंडार पुरानी कोतवाली सर्राफा बाजार अलीगढ़ यूपी WhatsApp नंबर-9756402981,7500048250