आगरालीक्स…25 जून को निर्जला एकादशी, पांच शुभ योगों में विष्णु पूजन से मिलेगा सालभर की एकादशियों का पुण्य. ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा ने बताया इस एकादशी का महत्व
हिंदू धर्म में सबसे कठिन और पुण्यदायी मानी जाने वाली निर्जला एकादशी इस वर्ष 25 जून, गुरुवार को पड़ रही है। ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा ने बताया कि पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि 24 जून की सायं 6:12 बजे से प्रारंभ होकर 25 जून की रात्रि 8:09 बजे तक रहेगी। व्रत का पारण 26 जून शुक्रवार को प्रातः 5:25 से 8:13 बजे के बीच किया जाएगा। इस दिन अन्न-जल का पूर्ण त्याग कर भगवान विष्णु की आराधना करने से वर्ष की सभी 24 एकादशियों के बराबर पुण्य प्राप्त होता है, इसलिए इसे सभी एकादशियों में सर्वश्रेष्ठ माना गया है।इस बार की निर्जला एकादशी पांच दुर्लभ शुभ योगों से युक्त है। पं. हृदय रंजन शर्मा जी के अनुसार 25 जून को सुबह 5:25 से शाम 4:29 तक रवि योग रहेगा, जिसमें सभी दोष स्वतः ही नष्ट हो जाते हैं। प्रातःकाल से 10:54 बजे तक शिव योग और उसके बाद 26 जून की सुबह 11:36 बजे तक सिद्ध योग रहेगा। इसके अतिरिक्त बुध-शुक्र की कर्क राशि में युति से लक्ष्मी नारायण राजयोग और शनि-शुक्र के नवपंचम राजयोग का भी निर्माण हो रहा है। गुरुवार का दिन स्वयं भगवान विष्णु को समर्पित होने के कारण इस दिन एकादशी का पड़ना और भी अधिक फलदायी हो गया है। यद्यपि इस दिन सुबह 7:08 से रात 8:09 बजे तक भद्रा भी रहेगी, परन्तु पाताल में वास होने के कारण पूजा-पाठ, मंत्र-जाप और व्रत में किसी प्रकार की बाधा नहीं आएगी।
धार्मिक मान्यता के अनुसार निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। महाभारत काल में भीमसेन भोजन के बिना नहीं रह पाते थे, तब महर्षि वेदव्यास के कहने पर उन्होंने केवल इसी एक एकादशी का व्रत किया था। मान्यता है कि इस व्रत से समस्त पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह व्रत मन को संयम और आत्मबल प्रदान करता है तथा शारीरिक शुद्धि में भी सहायक है।
व्रत की विधि बताते हुए पं. शर्मा जी ने कहा कि प्रातः ब्रह्म मुहूर्त 4:05 से 4:45 बजे के बीच स्नान कर पीले वस्त्र धारण करके निर्जल व्रत का संकल्प लेना चाहिए। लक्ष्मी-नारायण के समक्ष कलश स्थापित कर पीले पुष्प, चंदन, धूप-दीप, तुलसी दल और मिष्ठान अर्पित करें। दिनभर “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। रात्रि जागरण का विशेष महत्व है। 26 जून को द्वादशी में दान-पुण्य कर व्रत खोलना चाहिए। इस दिन जल से भरे घड़े, पंखा, छाता, फल, अन्न और वस्त्र का दान अनंत पुण्य देने वाला माना गया है। पं. हृदय रंजन शर्मा जी का कहना है कि लक्ष्मी नारायण योग के प्रभाव से वृषभ, कर्क, मिथुन और कन्या राशि के जातकों को करियर और धन संबंधी विशेष लाभ प्राप्त होने के संकेत हैं।ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा का संदेश : “निर्जला एकादशी केवल उपवास नहीं, आत्मसंयम और समर्पण का पर्व है। इस दिन किया गया जप-तप हजार गुना फल देता है। रवि योग, सिद्ध योग और लक्ष्मी नारायण योग में श्रीहरि का पूजन दरिद्रता दूर कर वैभव प्रदान करता है।”
