आगरालीक्स.. आगरा में 1973 से हवाई यात्रा होती है लेकिन यहां का एयरपोर्ट विकसित नहीं हो सका, प्रोग्रेसिव इंडिया कॉन्क्लेव में कैबिनेट मंत्री एसपी सिंह बघेल ने कहा कि विकसित देश बनने के लिए शिक्षा का स्तर सुधारना होगा।
रविवार को होटल क्लार्क शीराज में सीसीएलए व रावी इवेन्ट द्वारा आयोजित प्रोग्रेसिव इंडिया कॉन्क्लेव 2018 में मुख्य अतिथि कैबिनेट ने मंत्री एसपी सिंह बघेल ने बताया कि देश को विकसित बनाने का रास्ता यूपी से होकर गुजरता है। यह हमारे देश का दुर्भाग्य रहा कि यहा प्रारम्भ से समान शिक्षा व्यवस्था नहीं रही। प्राथमिक स्तर पर 70 फीसदी शिक्षा प्रदान करने वाले परिषदीय व सरकारी स्कूलों में पढ़ाई के अलावा मिड डे मील, शादी विवाह , ताश पत्ते और भैंस बांधे जाने का काम होता है। शहर में 73 में हवाई उड़ान की व्यवस्था थी। आजादी के बाद देश के हर हवाई अड्डे ने उन्नति की सिवाय आगरा के। प्रारम्भिक शिक्षा के साथ अंग्रेजी न पढ़ाकर देश के ग्रामीण बच्चों के साथ अन्याय हुआ। कल्याण सिंह की सरकार में नकल विरोधी अध्यायदेश के कारण 22 फीसदी रिजल्ट गया। योग्य लोगों को रोजगार मिला, इसलिए बेरोजगारी कम थी। लेकिन अगली सरकार ने अपने वादे के अनुसार नकल विरोधी अध्यादेश हटाया और 80 फीसदी रिजल्ट गया। इसका शाब्दिक अर्थ निकाले तो नकल में छूट और अयोग्य बेरोजगारों की संख्या बढ़ गई।
मुख्य अतिथि एसपी सिंह बघेल ने कहा कि यदि हम प्रगतिशील से विकसित देश बनना चाहते हैं तो हमें अपनी प्राथमिक शिक्षा को मजबूत करना होगा। इसके लिए उन्होंने ग्रामीण अंचल के अभिभावकों को बच्चों की उच्च शिक्षा के प्रति जागरूक होने पर जोर दिया। सरकार इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए अपराध मुक्त समाज व पॉवर (बिजली) के लिए बेहतर प्रयास कर रही है। पर्यटन नगरी होने के कारण शहर को बैराज व एयरपोर्ट दोनों की आवश्यकता है।
कार्यक्रम का शुभारम्भ अतिथियों ने दीप जलाकर किया। इस अवसर पर देश के 8 प्रांतों के शिक्षा, स्वास्थ्य व इंडस्ट्रियलिस्ट को स्मृति चिन्ह व प्रमाण पत्र देकर सम्माननित किया गया। अतिथियों का स्वागत रावी इवेन्ट के निदेशक मनीष अग्रवाल व धन्यवाद ज्ञापन सीसीएलए के सचिव अजय शर्मा ने दिया। संचालन खुशबू ने किया। इस अवसर पर मुख्य रूप से मेयर नवीन जैन, पूरन डावर, राकेश गर्ग, मनोज वर्मा, अमर मित्तल, राजीव मित्तल, राजेश गोयल, कैलाश कुमार विश्वानी, आरके कपूर, देवाशीष, जीसी सक्सेना, भाजपा जिलाध्यक्ष श्याम भदौरिया आदि उपस्थित थे।
शहर को सुंदर और स्वच्छ बनाना है तो उससे प्यार करें
यदि आप अपने शहर को सुंदर और स्वच्छ बनाना चाहते हैं तो उससे प्यार करें। तभी हमारा शहर खूबसूरत बन सकता है। जन्म से लेकर मरण तक काम करने वाला नगर निगम शहर की जनता के सहयोग के बिना कोई काम नहीं कर सकता। यह कहना था मेयर नवीन जैन का।
सिर्फ नौकरी के लिए न हो डिग्री का प्रयोग
रोहतक विवि के वीसी राजेन्द्र सिंह यादव ने कहा कि डिग्री का प्रयोग सिर्फ नौकरी के लिए नहीं होना चाहिए। देश के विकास के लिए सिर्फ बेहतर रिसोर्स नहीं योग्य लोगों की भी आवश्यकता होती है। आज देश में रिसर्च कम हो रही है और डिग्रियां ज्यादा है, जिनका प्रयोग सिर्फ नौकरियों के लिए हो रहा है। शिक्षा को प्रगति के पथ पर ले जाने के लिए शिक्षा के व्यवसायिकरण को खत्म करना होगा।
अम्बेडकर विवि के पूर्व कुलपति प्रो. जीसी सक्सेना ने कहा कि 134 देशों पर पीसा द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में कराए गए सर्वे में भारत का स्थान 74वां है। भारत की जीईआर ग्रोस एनरोलमेंट रेशियो यानि उच्च शिक्षा में पहुंचने वाले विद्यार्थियों का प्रतिशत मात्र 25 है। इस प्रतिशत को 2020 तक 30 प्रतिशत तक लाने के लिए प्रयास किया जा रहा है। शोध क्षेत्र में हामारा योगदान मात्र 2.5 फीसदी है जबकि अमेरिका का 28 प्रतिशत। प्रो. सक्सेना ने शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहे लोगों को अहंकार से दूर रहकर काम करने की सलाह भी दी। उन्होंने एक शिक्षक की महत्ता बताते हुए कहा कि वह नालंदा विवि के चाणक्य एक शिक्षक ही थे, जिन्होंने बारत की राजनीति में विशेष योगदान देते हुए सम्पूर्ण भारत को एक किया था। गलगोटिया विवि के वीसी जयशंकर ने भी अपने विचार रखे।
पकौड़ा बेचना भी उद्योग है
एफमेक के अध्यक्ष पूरन डावर ने कहा कि कोई काम छोटा नहीं होता। प्रोग्रेसिव इंडिया में असीमित सम्भावनाएं हैं। उन्होंने देश के युवाओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि बिना पढ़ाई लिखाई और अव्यवस्थित तरीके से कपड़े धोने वाला धोबी, सपाई करने वाला सफाई कमर्चारी कहताला है। लेकिन यही काम व्यवस्तित तरीके से पढ़ लिख कर किया जाए तो ड्राइक्लीनर और हाउस किपिंग का काम कहलाने लगता है।
लघु उद्योग भारती के प्रदेशाध्यक्ष राकेश गर्ग ने कहा कि कुटिर व लघु उद्योगों की भूमिका एक देश में रीड़ की हड्डी की तरह है। देश की जीडीपी में 38 फीसदी विदेसी मुद्रा में 45 फीसदी योगदान लघु उद्योगों का है। देश में कृषि के बाद सबसे बड़ा उद्योग लगभग 40 फीसदी कुटिर व लघु उद्योग है। 18वीं सदी तक महारा देश सोने की चिडिया यहां लघु व कुटिर उद्योगों के विकसित होने के कारण था। हम सिर्फ निर्यात करते थे और बदले में देश में सोना आता था। सरकार नहीं रोजगार सिर्फ उद्योग दे सकता है। आज के युवा मोटे पैकेज पर जाना चाहते हैं। यह सोच बदलने के लिए सरकारी विभागों के नजरिए को बदलना होगा। विवि क्षेत्रीय व्यवसाय को विकसित करने की ओर बी ध्यान दें।
चीन में भारत से 6 गुना अधिक पर्यटक आते हैं
नेशनल चैम्बर ऑफ इंडस्ट्रीज ऑफ चैम्बर के अध्यक्ष राजीव तिवारी ने कहा कि पर्यटन रोजगार और विकास दोनों देता है। भारत में आने वाले सवा करोड पर्यटक यहां सवा चार करोड़ लोगों को रोजगार देते हैं। पर्यटन के क्षेत्र में भारत का दुनिया में 40 वां स्थान है। इसे ऊपर उठाने की आवश्यकता है। चायना में भारत के मुकाबले 6 गुना अधिक पर्यटक पहुंचते हैं।
स्वास्थ पर डॉ. मुनीश्वर गुप्ता, डॉ. जौली व कैलाश कुमार विश्वानी, आल इंडिया जनरल सैक्रेटरी फैडरेशन ऑफ कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन ऑफ इंडिया के राजेश गोयल ने भी आईआईए के डिवीजनल चेयरमैन अमर मित्तल, एमएसएमई के निदेशक आरके कपूर ने भी विचार व्यक्त किए।