
पूर्ण सूर्य ग्रहण बहुत ही छोटे हिस्से में दिखाई पड़ेगा। हिंद महासागर से सुमात्रा, बोरनियो जैसे कुछ पूर्वी एशियाई देश और ऑस्ट्रेलिया के कुछ द्वीप से यह नजारा दिखेगा। प्रशांत महासागर के मध्य तक इस खगोलीय घटना की झलक दिखेगी। इस इलाके के पास कोई देश नहीं है। इस मामले में भारत के लोग उतने भाग्यशाली नहीं हैं। यहां पर कुछ हिस्से में आंशिक सूर्य ग्रहण देखा जा सकता है।
कोलकाता, सिलीगुड़ी, गुवाहाटी, पुरी, चेन्नई और कन्या कुमारी के लोग यह घटना देख सकेंगे। उत्तर पूर्वी भारत के लोगों को भी ग्रहण की शुरुआत दिख सकती है। यहां पर ग्रहण शुरू होने तक सूर्योदय हो चुका होगा।
बंद हुए बांकेबिहारी मंदिर के पट
नौ मार्च को सुबह पड़ने वाले सूर्य ग्रहण के कारण विश्व प्रसिद्ध ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर के पट रोजाना रात 8:30 बजे बंद होने की बजाय मंगलवार को शाम छह बजे ही बंद कर दिए गए। इसके कारण ठाकुर बांकेबिहारी महाराज के दर्शनार्थ आए सैकड़ों श्रद्धालुओं को बिना दर्शन किए ही लौटना पड़ा। मंदिर प्रबंधक मुनीश शर्मा ने बताया कि सूर्य ग्रहण से पूर्व सूतक लगने की मान्यताओं के अनुसार 12 घंटे पूर्व ठाकुरजी के दर्शन भक्तों के लिए बंद कर दिए गए। बुधवार को सुबह मंगलादर्शन छह बजे से छह बजकर 15 मिनट तक होंगे। इसके बाद ग्रहण के दर्शन, शृंगार, ग्वाल, राजभोग के दर्शन शाम के दर्शन पूर्व की भांति होंगे।
इन राशियों के लिए मंगलकारी
सूर्योदय के साथ ही लगभग सात मिनट तक लगने वाला ग्रहण कई राशियों के लिए लाभकारी तो कुछ के लिए कष्टकारी होने की बात कही जा रही है। सूर्यग्रहण के लिए मंदिरों में भी तैयारियां की गई हैं।
इसका प्रभाव मेष, धनु, कर्क, वृश्चिक राशि वालों के लिए मंगलकारी है। तुला, मकर, कुंभ, मीन राशि के लोगों को आर्थिक हानि हो सकती है। वृष, मिथुन, सिंह और कन्या राशि वालों के लिए स्वास्थ्य की हानि और पारिवारिक चिंता का कारण सूर्यग्रहण बन सकता है।
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