आगरालीक्स… आगारा में 19 महीने पहले टीटीजेड के तहत होटल, हॉस्पिटल सहित अन्य इंडड्री की स्थपना पर लगाई गई रोक हट सकती है, इसके साथ ही क्रेडिट लेने की होड भी लग गई है। ताजमहल को प्रदूषण से बचाने के लिए पर्यावरण मंत्रालय द्वारा 8 सितम्बर, 2016 को टीटीजेड के तहत व्हाइट कैटेगरी को छोड़कर अन्य कैटेगरी (ग्रीन, औरेंज एण्ड रैड) के उद्योगों की स्थापना एवं विस्तार पर लगाई गई तदर्थ रोक हटाई जा सकती है। इसकी समीक्षा के लिए बुधवार को केंद्रीय पर्यावरण सचिव आगरा आ रहे हैं। वे शहर के विभिन्न व्यवसायों से जुडे पदाधिकाशियों के साथ ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों संग वार्ता करेंगे। टीटीजेड के अंतर्गत 10400 वर्ग कि0मी0 के आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, एटा, कासगंज और भरतपुर के इलाकों में लगे उद्योगों और नए उद्योगों को लगाए जाने पर चर्चा होगी। लीला होटल , नयति हॉस्पिटल और गैस आधारित उद्योगों को भी चर्चा में शामिल किया जाएगा।
(टीटीजेड) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश के मुख्य सचिव और टीटीजेड अथॉरिटी के चेयरमैन को चार माह में कांप्रेंहेंसिव प्लान तैयार कर देने के निर्देश दिए हैं। तब तक सभी कामों पर रोक लगी रहेगी। वहीं ऑरेंज और रेड कैटेगरी के उद्योगों के लाइसेंस का नवीनीकरण न करने के भी निर्देश दिए थे। इसमें पांच सितारा होटल से लेकर मल्टी सुपर स्पेशिलिटी हॉस्पिटल शामिल हैं। इन आदेशों से कारोबारी परेशान हैं।
रोक हटने की संभावना पर क्रेडिट लेने की दौड
टीटीजेड के तहत लगाए गए प्रतिबंध में राहत मिल सकती है, इस संभावना को देखते हुए क्रेडिट लेने की होड मच गई है।
अभी तक यह हुआ
पिछले दिनों एससी आयोग के अध्यक्ष प्रो. रामशंकर कठेरिया ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री से मुलाकात की थी। उनसे ऑरेंज और रेड कैटेगरी की फिर से समीक्षा कराए जाने को कहा था। प्रदेश के पूर्व मंत्री अरिदमन सिंह ने मुख्यमंत्री और केंद्रीय पर्यावरण सचिव को पत्र लिखकर नई गाइड लाइन को संशोधित कराने का अनुरोध किया था। ए0डी0एफ0 सचिव के0सी0 जैन का कहना है कि धूल के कणों (पी0एम0 2.5 व पी0एम0 10) के लिए टूटी सड़कें, हरियाली की कमी, सड़कों व राजमार्गों का वृहद स्तर पर निर्माण, बिना ग्रीन-कवर की खुली भूमियाँ, कूड़ा व पराली का जलाया जाना आदि जिम्मेदार है।इस क्षेत्र के उद्यमी पलायन कर रहे हैं या निराश हैं।
दिनांक 8.9.2016 को लगाई गयी तदर्थ रोक के पूर्व भी टी0टी0जैड0 क्षेत्र में किसी वायु प्रदूषणकारी इकाई की अनुमति नहीं थी, अतः तदर्थ रोक लगाया जाना औचित्यपूर्ण नहीं था।