
लेखकों ने कहा कि सूर के कृृष्ण ने न तो सुदर्शन उठाया न किसी को युद्ध के लिए प्रेरित किया और ना ही उपदेश दिये। सिर्फ प्रेम की बात कही। सूर ने खुसरो से शुरू हुए सिलसिले को दरगाहों से बाहर निकाल कर मंदिरों तक पहुंचाया। नजीर की शेर शायरी में जहां होली के रंग, दिवाली की फुलझड़ी और ईद की सेवइयों की महक थी तो दुनिया को आध्यात्मिक संदेश देने के लिए लिखते हैं कि ‘यह ठाट पड़ा रह जाएगा जब लाद चलेगा बंजारा…’
डा. रक्षंदा जलील, सेफ महबूब व पाणिनी आनंद ने एक स्वर में कहा कि जब तक मानव है मानवता की जरूरत होगी। मानवता के लिए प्रेम की और प्रेम के लिए सूर, गालिब, नजीर और मीर जैसे रचनाकारों की जरूरत हमेशा रहेगी। उर्दू शायरी के बारे में कहा गया कि उर्दू का रंग और महक व्यापक है। दूसरे सत्र सांस्कृतिक विरासत और साहित्य पर सुमंत बत्रा, किश्वर देसाई और तरुण ठकराल ने चर्चा की। इससे पूर्व कोलोक्विम की संस्थापिका डा. शिवानी चतुर्वेदी ने अतिथियों का स्वागत किया। संचालन स्वाति व धन्यवाद ज्ञापन सारिका श्रीवास्तव ने किया। इस अवसर पर डीएम पंकज कुमार, मनीषा त्रिघाटिया, संगीता भटनागर, पक्षालिका सिंह, सीपी राय आदि मौजूद थे।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि लार्ड मेघनाथ देसाई ने क्वीन मेरी लाइब्रेरी के इतिहास के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि हमारे देश की हर गली में बिखरी पड़ी विरासत को संजोने की जरूरत है। भारतीय संस्कृति में हिंदु, मुगलों के अलावा ब्रिटिश संस्कृति भी घुल मिल गई है।
कोलोक्विम के प्रोजेक्ट
डा. सुमंत बत्रा ने बताया कि कोलोक्विम के प्रोजेक्ट लिविंग द हेरीटेज के तहत विद्यार्थियों को इतिहास की जानकारी दी जाएगी। बैक टू डायरी के जरिए बच्चों को डायरी लिखने को प्रेरित किया जाएगा। यूएम विमन के तहत यूनाइटेड नेशन की मदद से विमन अनलिमिटेड सर्विस प्रोजेक्ट चलाया जाएगा।
ताज क्लोक्विम को लाइब्रेरी की जिम्मेदारी
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मंडलायुक्त प्रदीप भटनागर ने क्वीन मेरी एंप्रेस लाइब्रेरी के संचालन की जिम्मेदारी ताज कोलोक्विम को सौंपी है। उन्होंने कहा कि ताजगंज स्थित नजीर अकबराबादी की मजार का जीर्णोद्धार जल्द किया जाएगा। मजार को लाल पत्थर से बनाकर उस पर उनके चुनिंदा शेर अंकित किए जाएंगे।
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