आगरालीक्स… आगरा में इस साल विकास कार्यों का खूब ऐलान हुआ। ग्रेटर आगरा, महायोजना-2031 लटका। सड़के बनीं और उधड़ी। मेनहॉल तक नहीं हुए ठीक
साल की शुरुआत से गूंजा विकास का नारा
आगरा में इस साल विकास का नारा खूब जोर-शोर से उछला। शुरुआत विधानसभा चुनाव से पहले जनवरी से ही हो गई थी लेकिन पूरा साल बीतने को आया विकास कार्य उतने नजर नहीं आए, जितने की घोषणा की गई थी।
सीएम की घोषणा पर गड्ढे अभी तक नहीं भरे
हालात यह रहे कि मुख्यमंत्री योगी ने 15 नवंबर तक सड़कों को गड्डा मुक्त करने का ऐलन किया था लेकिन नवंबर तो क्या 15 दिसंबर भी निकल गई लेकिन बाहरी तो छोड़ो शहर में भी अभी भी गड्ढे युक्त सड़कें हैं।
मेनहॉल बनाने वाली कार्यदायी संस्था भागी
आगरा की सड़कों के बीच बने मेनहॉल अभी भी तक ठीक नहीं हुए हैं। नगर निगम का कार्यकाल भी खत्म होने आ गया, जिस कंपनी को मेनहॉल ठीक करने का ठेका दिया गया था, वह काम पूरा किए बिना ही भाग गई। फिर नगर निगम ने भी इस पर ध्यान नहीं दिया।
वार्डों में सीमेंटेड गलियां और सड़कें भी बनीं
नगर निगम का आखिरी साल होने के कारण वार्डों में पार्षदों ने विकास कार्यों को भी कराया। कई वार्डों में सीमेंटेड गलियां और सड़कें बनीं, लाइटें लगी। विकास होता भी नजर आया। कुछ पार्षदों ने तो अपने वार्डों में कराए विकास कार्यों जमकर प्रचार-प्रसार किया। मेयर को भी सराहा। पार्कों की हालत भी सुधरी, झूले भी लगे।

सड़कों को काटने में विभाग और नागरिक भी जिम्मेदार
कुछ समय बाद गलियां और सड़कों को काट दिया गया। कभी टोरंट वाले काट गए तो कभी नल लगवाने, कभी फायबर केबल तो कभी ठेकेदार ने गड्ढे खोदकर छोड़ दिए। इसमें नागरिक पीछे नहीं है। सड़क बनने के बाद दोबारा कितना भी मरम्मत करा दो लेकिन उसमें पहले जैसी मजबूती नहीं आती है।
मास्टर प्लान-2031 की आपत्तियों का सत्यापन
आगरा महायोजना-2031 बन गई है। आगरा के विकास के लिए महायोजना पर आई आपत्तियों का सत्यापन कर लिया गया है लेकिन अभी प्रस्ताव बोर्ड की बैठक में नहीं रखा गया है। बोर्ड की बैठक में प्रस्ताव पारित होने के बाद शासन को भेजा जाएगा। नई महायोजना में शहर को 14 जोन में बांटा गा है। 33 हजार हेक्टेयर जमीन चिह्नत की गई है, जिसका भू उपयोग अलग-अलग किया जाएगा।
क्या है आगरा महायोजना-2031
एडीए ने महायोजना 2031 को सुप्रीम कोर्ट के आधार पर तैयार किया है, जिसके तहत ताजमहल, रामबाग, यमुना नदी के दोनों ओर के स्मारकों के सौ मीटर के दायरे में कोई निर्माण कार्य नहीं। ताज महल से रामबाग तक दो मंजिला से ऊंची इमारत नहीं बन सकेगी। यमुना किनारे मॉल, बहुमंजिला इमारत अब नहीं बन सकेंगी।
बेलनगंज की थोक मंडी भी शिफ्ट होंगी
यमुना किनारे की औद्योगिक इकाइयों को स्थानांतरित किया जाएगा। रामबाग, दयालबाग, बल्केश्वर, बेलनगंज आदि क्षेत्र को इसमें शामिल किया है, यहां तक की बेलनगंज क्षेत्र की थोक मंडियों को शिफ्ट किए जाने का प्रावधान के साथ खाली पड़ी जमीन पर पार्किंग विकसित किए जाने की योजना है।
612 हेक्टेयर पर प्रस्तावित है ग्रेटर आगरा
एडीए द्वारा इनर रिंग रोड के पास 612 हेक्टेयर जमीन पर ग्रेटर आगरा विकसित करने की कवायद एक साल पहले की गई थी. इसके लिए एडीए ने बैंक आफ महाराष्ट्र से 300 करोड़ रुपये का लोन ले लिया. एडीए प्रोजेक्ट को लेकर एक साल पहले उद्योगपतियों के साथ भी एडीए अधिकारियों की बैठक हो चुकी है. इस प्रोजेक्ट में 50 वर्ग मीटर से लेकर 400 वर्ग मीटर तक के भूखंड होंगे. प्राथमिक विद्यालय और डिग्री कॉलेज भी होंगे. इसके अलावा अस्पताल भी खोला जाएगा. सीवर, पानी और गैस लाइन बिछाई जाएगी. स्वीमिंग पूल सहित अन्य सुविधाएं भी होंगी. इसी तरह एत्मादपुर मदरा में 124 हेक्टेयर में मेडिसिटी सेंटर विकसित किया जाएगा. यह भी एडीए की जमीन पर होगा. इसमें एक ही छत के नीचे डॉक्टर मिल सकेंगे. यह इनर रिंग रोड के कुछ दूरी पर होगा.