आगरालीक्स…। आगरा जिले की तीन विधानसभा सीटों पर रालोद अपने चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ेगी। हालांकि सपा से हुए गठबंधन में रालोद ने चार विधानसभा सीटों पर अपना दावा पेश किया है।
रालोद और समाजवादी पार्टी में सीट बंटवारे को लेकर मंथन जारी है। आगरा, अलीगढ़, हाथरस और मथुरा में रालोद ने 12 सीट पर अपना दावा पेश किया है। संभावना है कि इन चार जिलों में आठ से 10 सीट रालोद के हिस्से में आएंगी।
पता चला है कि जाट बहुल विधानसभा क्षेत्रों को लेकर सपा और रालोद में आम सहमति बन गयी है। जिन विधानसभा सीटों पर जाट मतदाता 40 से 50 हजार के बीच है, उन सीटों पर रालोद अपने चुनाव चिन्ह पर प्रत्याशी उतारेगी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 50 से 60 विधानसभा सीटों पर जाट मतदाता प्रमुख भूमिका निभाते हैं।
आगरा ग्रामीण, फतेहपुरसीकरी और खेरागढ़ रालोद के हिस्से में
अगर आगरा, मथुरा, अलीगढ़ तथा हाथरस जिले की बात की जाए तो रालोद ने गठबंधन में आगरा में आगरा ग्रामीण, फतेहपुरसीकरी, खेरागढ़ तथा एत्मादपुर विधानसभा सीट मांगी हैं। इनमें से आगरा ग्रामीण, फतेहपुरसीकरी तथा खेरागढ़ को लेकर दोनों दलों में सहमति बन चुकी है। इन तीनों सीटों पर रालोद के चुनाव चिन्ह पर गठबंधन के प्रत्याशी उतारे जाएंगे।
मथुरा जिले में रालोद ने मांगी चार सीट
मथुरा जिले में मांट, गोवर्धन, छाता तथा बल्देव विधानसभा सीट अपने लिए मांगी है।
अलीगढ़, हाथरस से चार सीटों पर दावा
अलीगढ़ जिले में इगलास, खैर तथा बरौली तथा हाथरस जिले में सादाबाद विधानसभा क्षेत्र पर रालोद ने अपना दावा पेश किया है। बता दें कि जाट मतदाता पारंपरिक रूप से रालोद तथा भाजपा के बीच बंटते रहे हैं। बात अगर पिछले विधानसभा चुनाव की करें तो बहुसंख्यक जाट मतदाताओं का रुझान भाजपा की ओर रहा था। आने वाले चुनाव में किसान आंदोलन को लेकर सपा और रालोद दोनों ही आश्वस्त हैं कि भाजपा से जाट मतदाताओँ का मोह भंग हो चुका है।
भाजपा की कृषि बिल वापसी से किसानों को मनाने की कोशिश
भाजपा ने कृषि बिल वापस लेने का वायदा कर अपना मास्टर स्ट्रोक खेल दिया है। भगवा खेमे का मानना है कि जनता की याददाश्त बहुत कमजोर होती है। चुनाव आते-आते किसान आंदोलन यादों से हवा हो जाएगा। हालांकि यह भविष्य के गर्भ में है कि ऊंट किस करवट बैठेगा। भाजपा तथा रालोद दोनों में कौन जाट मतदाताओं में बाजी मारेगा यह बहुत कुछ प्रत्याशी चयन पर निभर्र करेगा।