आगरालीक्स…आगरा की स्त्री रोग विशेषज्ञ, समाजशास्त्री से लेकर लड़कियों का शादी की उम्र 18 से बढ़ाकर 21 साल करने पर रिक्शन।
लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष किए जाने से लड़कियों के अधिकार और बढ़ जाएंगे। उच्च शिक्षा बेहतर हो सकेगी। मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी आ सकेगी। कानून के साथ सामाजिक और आर्थिक स्तर सुधारने की भी जरूरत।
देश में लिंगानुपात बेहतर हुआ है। देश में अब 1000 पुरुषों पर 1020 महिलाएं हैं। ऐसा लड़कियों को लेकर सोच में बदलाव आना है, वहीं सरकार लड़कियों की शादी की उम्र 21 वर्ष करने का बिल पास करने वाली है, जिससे लड़कियों की शिक्षा, स्वास्थ्य और बेहतर हो सकेगा।

मातृ-शिशु मृत्यु दर में आएगी कमी
स्त्री रोग विशेषज्ञ डा. अनुपमा शर्मा का कहना है कि लड़कियों की शादी की उम्र बढ़ाए जाने से मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी आएगी। कम उम्र में शादी होने से बच्चों में विकृतियां पैदा होने का खतरा बढ़ जाता है लेकिन अब इसमें इसमें कमी आ सकेगी। जच्चा-बच्चा स्वस्थ होंगे और खून आदि की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
हर बदलाव को कानून नहीं, जागरुकता जरूरी
इस संबंध में डा. भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर मोहम्मद अऱशद का कहना है कि लड़कियों की शादी की न्यूनतम आयु 21 वर्ष करना एक अच्छा प्रयास है लेकिन सभी चीजों को कानून के रूप में लागू करना उतना उचित नहीं है, जितना की उसे जमीनी स्तर पर लागू करना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा का स्तर में सुधार होने पर हायरएजुकेशन के बाद औसतन शादी अब 24 वर्ष की औसत उम्र में हो रही हैं। लड़कियों की सोच में बदलाव आने से फैमली प्लानिंग पर भी जोर दिया जा रहा है।
आर्थिक औऱ सामाजिक स्तर सुधारने की जरूरत
उन्होंने कहा कहा कि निचले तबके के लोगों के आर्थिक, सामाजिक सुधार की दिशा में कदम उठाए जाएं तो इसके ज्यादा अच्छे परिणाम निकलेंगे। बाल विवाह गरीब औऱ सामाजिक स्तर पर पिछड़े लोगों में ज्यादातर होते हैं। यदि इनकी आर्थिक और सामाजिक दशा में सुधार आएगा तो निश्चित ही लड़कियों की शिक्षा का स्तर ऊपर उठेगा।
शारदा कमेटी की रिपोर्ट के बाद बढ़ी थी आयु सीमा
भारत में लड़कियों की आयु सीमा पहले भी बढ़ती रही है। शारदा कमेटी की रिपोर्ट के सालों बाद लड़कियों की शादी की आयु को 14 साल से बढ़ाकर 18 साल किया गया था।