आगरालीक्स…(8 February 2022 Agra News) आगरा की दक्षिण विधानसभा सीट पर मतदान के ऐन मौके से पहले त्रिकोणात्मक संघर्ष की स्थिति बन गई है। इस सीट से पहली बार प्रमुख राजनीतिक दल से कोई मुस्लिम प्रत्याशी भी मैदान में नहीं है।
भाजपा के लिए लकी रही है दक्षिण सीट
आगरा दक्षिण विधानसभा सीट से भाजपा विधानमंडल दल के मुख्य सचेतक और दो बार के विधायक योगेंद्र उपाध्याय मैदान में है। दक्षिण विधानसभा भाजपा के लिए लकी रही है।
भाजपा को अपने वोटों के साथ विकास पर भरोसा
भाजपा को अब तक सिर्फ बसपा से चुनौती मिलती रही है। भाजपा का इस सीट पर अपना परंपरागत वोट काफी संख्या में है। सवर्ण, पिछड़ों समेत अन्य वर्ग का वोट भी भाजपा को मिलता रहा है। दलित समाज के वोट भी भाजपा की झोली में आते रहने के काऱण भाजपा अब तक छह बार इस सीट पर जीत हासिल कर चुकी है। कुछ विकास कार्य भी हुए हैं लेकिन इसके बावजूद भाजपा के लिए जीत की राह आसान नजर नहीं आ रही है।

बसपा ने दलित के साथ ब्राह्मण वोटों से मजबूत किए हालात
बसपा से इस बार रवि भारद्वाज चुनाव मैदान में हैं। बसपा को इस सीट पर दलित समाज के वोटों के साथ जाटव समाज के वोटों का भरोसा है। साथ ही प्रत्याशी के ब्राह्मण समाज का होने से इस समाज के लोगों का झुकाव होने पर उसे फायदे की उम्मीद है। बसपा को मुस्लिम वोटो का भी पूरा भरोसा है क्योंकि इस बार किसी दल ने मुस्लिम प्रत्याशी नहीं उतारा है तो उसे फायदा मिलने की उम्मीद है। बसपा इस सीट पर दो बार जीत का स्वाद चख चुकी है। तीन बार रनरअप भी रही है। इसलिए उसका गणित एक बार फिर भाजपा को टक्कर देने का है।
सपा-रालोद को मुस्लिम प्रत्याशी नहीं होने का भी फायदा
सपा-रालोद गठबंधन से विनय अग्रवाल मैदान में हैं। गठबंधन प्रत्याशी को अपने पिछड़े और दलित वोट हैं। मुस्लिम वोट इस सीट पर खासी संख्या में है, जिनका झुकाव भाजपा के विरोध में सपा की ओर जाता नजर आ रहा है।
वैश्य समाज का भी मिल रहा लाभ
गठबंधन प्रत्याशी के वैश्य वर्ग का होने से इस सीट पर उसका खास लाभ मिलने की उम्मीद है क्योंकि इस सीट पर वैश्य समाज का भी कोई प्रत्याशी किसी राजनीतिक दल ने मैदान में नहीं उतारा है। ऐसी स्थिति में सपा-रालोद गठबंधन ने इस सीट पर त्रिकोणात्मक संघर्ष के हालात पैदा कर दिए हैं।
कांग्रेस करेगी इस सीट पर भी खानापूर्ति
कांग्रेस ने दक्षिण सीट पर अनुज शर्मा को मैदान में उतारा है। अनुज शर्मा कांग्रेस की स्थिति को कितना मजबूत करेंगे, यह तो मतगणना के बाद पता चलेगा। फिलहाल कांग्रेस को इस सीट से अपने पुराने परंपरागत वोटों के अलावा मुस्लिम और दलित वोटों का भरोसा है। साथ ही ब्राह्मण समाज से होने के कारण कुछ वोट हासिल कर सकते हैं लेकिन चुनाव को प्रभावित करने की स्थिति में नजर नहीं आ रहे हैं। वैसे भी इस सीट से कांग्रेस को आखिरी बार जीत 1985 में मिली थी। इसके बाद से तो सूपड़ा साफ है।
दक्षिण विधानसभा के अब तक के सूरमा
वर्ष 2017 योगेंद्र उपाध्याय भाजपा
वर्ष 2012 योगेंद्र उपाध्याय भाजपा
वर्ष 2007 गुटियारी लाल बसपा
वर्ष 2002 डा. रामबाबू हरित भाजपा
वर्ष 1996 डा. रामबाबू हरित भाजपा
वर्ष 1993 डा. रामबाबू हरित भाजपा
वर्ष 1991 किशन गोपाल भाजपा
वर्ष 1989 किशन गोपाल भाजपा
वर्ष 1985 वीरेंद्र कुमार सोनी कांग्रेस
वर्ष 1980 आजाद कुमार कर्दम कांग्रेस
वर्ष 1977 गुलाब सेहरा कांग्रेस
खास-खास
दक्षिण विधानसभा सीट पर मतदाता 3,57,76
दक्षिण विधानसभा पर युवा मतदाता 2,940
इस सीट पर लड़के करेंगे मतदान 1529
सीट पर पहली बार लड़कियों के वोट 1411