
यह कहना था एचबीटीआई कानपुर के रसायन विज्ञान के प्रो. डीके सिंह का। एसीई कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट में इंस्पायर-डीएसटी साइंस कैम्प में कहा कि चमड़ा उद्योग में चमड़े के ट्रीटमेंट में पोटेशियम क्रोमेट व सल्फ्यूरिक एसिड का प्रयोग किया जाता है। कानपुर हो या आगरा, इन उद्योगों में प्रयोग किए जाने वाले कैमिकल भी नदियों में मिल रहे हैं। जो कि कार्सिनोजनिक हैं। इलेक्ट्रिक इंडस्ट्री और खेतों में अधिकता में प्रयोग की जा रही रासायनिक खाद बी नदियों में प्रदूषण के स्तर को बढ़ा रहीं हैं।
उन्होंने कहा कि हमें जल प्रदूषित करने वालों कारकों को रोकने के साथ जल की बेवजह बर्बादी को भी रोकना होगा। मसलन आरओ से 10 ली. शुद्ध पानी प्राप्त करने के लिए हम 90 लीटर ली. पानी को बर्बाद कर देते हैं। जबकि इसे घर की सफाई जैसे कामों में प्रयोग किया जा सकता है। इस मौके पर एसीई कॉलेज के चेयरमैन संजय गर्ग, सचिव अखिल गोयल व एडवाइजर संयम अग्रवाल भी मौजूद थे।
जितनी प्साय लगे उतना ही पीएं पानी
आगरा। डॉ. डीके सिंह ने बताया कि स्वस्थ रहने के लिए ज्यादा पानी पीना, यह भ्रांति है। जब जितनी प्यास लगे, पानी उतना ही पीएं। प्यास लगने से अधिक पानी पीने से आपकी जान पर भी बन सकती है। क्योंकि हमारी स्वस्थ किडनी एक घंटे में 800-1000 मिली तक ही पानी फिल्टर करती है। स्ट्रेस के दौरान यह और भी कम हो जाता है। कई बार ऐसे मामले देखें गए हैं कि मैराथन के तुरन्त बाद अधिक पानी पीने से मुत्यु हो गई या एसी रूम में रैगिंग के दौरान अधिक पानी पिलाने से छात्र की मौत हो गई।
खेलने के दौरान पसीने के रूप में पानी अधिक निकलने और स्ट्रेस बढ़ने से किडनी अपना काम कर देती है। ऐसे में दौड़ लगाने या खेलने के तुरन्त पानी पानी पीया जाए तो पानी ब्लड में सोडियम पोटेशियम की मात्रा को बढा देता है। जिससे मौत तक हो सकती है।
सोइल इंजीनियर बनने के लिए किया प्रोत्साहित
आगरा। नेताजी सुभाष इंस्टीट्यूट ऑफ टैक्नोलॉजी दिल्ली के प्रो. वीके सुमन ने बच्चों को विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में करियर बनाने की जानकारी देते हुए को सोइल इंजिनियरिंग व कृषि विज्ञान में भी भविष्य बनाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि आगरा मंडल में लगभग 60-80 फीसदी लोग खेती से जुड़े हैं। यदि हम सोइल का ठीक तरह से प्रयोग करें तो उत्पादन को तीन गुना बढ़ाया जा सकता है। इसमें बहुत सम्भावनाएं हैं, जिससे न सिर्फ उत्पादन बढ़ेगा बल्कि बेरोजगारी बी कम होगी। उन्होंने बच्चों को भविष्य बनाने के लिए विज्ञान की अन्य शाखाओं के बारे में भी जानकारी दी।
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