
यहां ऐसा लगा कि मानो मानवीय संस्कृति के अटूट अंग नृत्य का मानों मेला सजा हो। जहां देश के हर प्रांत के नृत्य के रंग नजर आए। बृज का रास, महाराष्ट्र की लावनी, पंजाब का भांगड़ा, राजस्थानी झूमर, कथक, भरतनाट्यम सहित सब कुछ था।
कार्यक्रम का आयोजन बृज मंडल हेरिटेज कंजरवेशन सोसायटी के सहयोग से किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ फरीदाबाद के सत युग दर्श संगीत कला केन्द्र की प्राचार्य डॉ. रंजना बंसल ने दीप जलाकर किया। इस मौके पर बृज खंडेलवाल, पद्मिनी, ज्योति खंडेलवाल, सरोज गौरिहार, शशि तिवारी, सरोज गौड़, चंद्रकांत त्रिपाठी, डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य, श्रवण कुमार, शैलेन्द्र नरवार आदि मौजूद थे।
कार्यक्रम का शुभारम्भ गम-गम गणपति, गज मुख मंडल, गणेश वंदना से किया गया। मोहे रंग दो लाल… व मेरा श्याम तू घनश्याम तू जैसे गीतों पर नृत्य बृज की संस्कृति को दर्शा रहे थे। कथक व भरत नाट्यमके फ्यूजन के अलावा ठुमरी पर छात्राओं ने नृत्य सभी उपस्थित दर्शकों और अभिभावकों को मन को मोह लिया।
इससे पूर्व शिव प्रताप चौहान ने कथक के घरानों के बारे में जानकारी दी। इस मौके पर आगरा घराने में कथक की स्थिति पर बी चिन्ता व्यक्त करते हुए, उसे प्रोत्साहित करने के प्रयासों को बढ़ाने की बात भी कही गई।
प्रस्तुति करने वाली छात्राओं में मुख्य रूप से अनवी, अनुष्का गुप्ता, रिदिम, पूर्वी, संजना, त्रिशा, अर्नवी, आरती, स्वर्णिमा, परी, खुशी, तृप्ति, आयुषि, रितिषा, ज्हानवी, अक्षिता, पृथ्वी, सुमेधा, सोनिया, श्रेया, प्रियांशी, अवंतिका, दीप्ति, निष्ठा, अरात्रिका, अनन्या, निमिषा, एकता आदि थीं। धन्यवाद ज्ञापन ज्योति खंडेलवाल ने दिया। संचालन दृष्टि अवस्थी, खुशबू, आकांक्षी, निधि ने किया।
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