
आर्किटेक्ट राजीव द्विवेदी ने कहा कि यदि छोटी-छोटी बातों का खयाल रखा जाए तो हम इस बार्बादी को काफी हद तक कम कर सकते हैं। क्रेडाई आगरा चैप्टर के चेयरमैन जेएस फौजदार ने बताया कि कार्यक्रम में मौजूद साइट इंजीनियरों को उन बारीकियों से अवगत कराया जिससे निर्माण की क्षमता और जीवन को बढ़ाया जा सके। उन्होंने बताया कि 27-30 मिनिट के समय में सीमेंट के मसाले की इनीशियर सेटिंग हो जाती है। जबकि लोग सुबह तैयार किए मसाले को शाम तक प्रयोग करते हैं। यह बेहतर निर्माण की दृष्टि से ठीक नहीं है।
इंजी. अजीत फौजदार ने कहा कि कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री बहुत पुरानी नहीं है। यह लर्निर्ग प्रोसिस में है। हम दुर्भाग्यवश इनफोरमेशन तो खूब बटौर रहे हैं, लेकिन हमारे पास नॉलिज की कमी हो रही है। यही वजह है कुछ समय पहले बनी मारतों में सीलन, जोर से दरवाजा बंद करने पर चौखट निकलने जैसी मामूली लेकिन गम्भीर समस्याएं सामने आ रही हैं। इससे पूर्व संस्था के सचिव इंजी. उमेश शर्मा ने कार्यक्रम में मौजूद (बिल्डर, आर्किटेक्ट, इंजीनियर व साइट इंजीनियर) सदस्यों का स्वागत किया। धन्यवाद ज्ञापन आलोक सिंह ने दिया।
इस मौके पर अध्यक्ष भगत सिंह बघेल, अध्यक्ष निर्वाचित सुमित विभव, संतोष कटारा, विकास फौजदार, शोभिक गोयल, प्रभात मिश्रा, शलभ शर्मा, शरद भदौरिया, गौतम रावत, मुकेश जैन, पीएल शर्मा, पीके जैन, रवि शंकर अग्रवाल, सुशील गुप्ता, टीएस अग्रवाल, नितिश गर्ग, सुशील अग्रवाल आदि मौजूद थे।
इन बातों का रखें ध्यान
-अधिक टीडीएस वाला पानी इमारत की उम्र को कम कर देता है।
-निर्माण वाले स्थान पर मिट्टी की जांच करा कर उसकी भार सहने की क्षमता का अवश्य पता लगाएं।
-40 डिग्री से अधिक तापमान के समय पर लैंटर न डालें। इससे इमारत की क्षमता घट सकती है।
-लैंटर के 10-12 दिन तक तराई के दौरान छत का पानी सूखने न दें।
-चिनाई में एयर गेप का खत्म होना इमारत की लम्बी म्र के लिए जरूरी है।
-जंग लगी सरिया या किसी भी तरह के लोहे का प्रयोग न करें।
-आधे घंटे से अधिक समय से तैयार सीमेंट के मसाले की गुणवत्ता कम हो जाती है।
रसोई के कचरे से खाद बनाने का दिया डेमो
आगरा। इस मौके पर इको फ्रेंड वेलफेयर सोसायटी की डॉ. मनिंदर सिंह ने अपनी टीम के साथ रसोई के कचरे से जैविक खाद बनाने का डेमो दिया। उन्होंने बताया कि अब इस तरीके को कई लोग अपने पूरे अपार्टमेंट में अपना रहे हैं। इस विधि से न सिर्फ हम घर के कचरे को 80 फीसदी कम कर सकते हैं बल्कि कैमिकल खाद के विकल्प के रूप में जैविक खाद तैयार कर कैमिकल खाद के नुकसान से बच सकते हैं।
Leave a comment