आगरालीक्स…इस स्कूल में चार साल से पढ़ रहे हैं लड्डू गोपाल. अब कक्षा तीन में आ गए हैं. बच्चों के साथ बैठ कर पढ़ते हैं. जाकी रही भावना जैसी..प्रभु मूरत तिन देखी तैसी…पढ़िए भक्त रामगोपाल की अनूठी कृष्ण भक्ति…
जाकी रही भावना जैसी..प्रभु मूरत तिन देखी तैसी…भक्त अपने भगवान को जिस रूप में देखना चाहते हैं, भगवान उसे उसी रूप में ही दिखाई देते हैं. दिल्ली के रहने वाले रामगोपाल को भी भगवान उनकी ही भावना के अनुसार दिखाई देते हैं. दिल्ली में रहने वाले रामगोपाल पिछले सात साल से तीर्थ नगरी वृंदावन स्थित प्रेम मंदिर के जटावाली मां आश्रम में रहते हैं. 65 साल के रामगोपाल अपने सभी बच्चों की शादी करने के बाद पत्नी के साथ वृंदावन में आकर बस गए हैं. इनकी भक्ति बड़ी निराली है. वह लड्डूगोपाल को अपना बेटा मानते हैं. चार साल पहले उनके मन में ख्याल आया कि सभी बच्चे स्कूल जाते हैं तो उनका लड्डू स्कूल क्यों नहीं जाता. बस फिर क्या था ठान लिया मन में किस अब तो अपने लड्डू गोपाल का एडमिशन कराना है.

एडमिशन कराने की जिद पर अड़े
अपने लड्डू गोपाल का एडमिशन कराने के लिए वह बुर्जा मार्ग स्थित सांदीपति मुनि स्कूल पहुंचे. यहां प्रधानाचार्य ने ना—नुकुर की लेकिन रामगोपाल एडमिशन कराने की जिद पर अड़ गए. प्रिंसिपल ने लड्डू गोपाल का आधार कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र मांगा. दोनों न होने पर भी रामगोपाल दाखिले के लिए अड़े रहे. जब यहां से कुछ काम नहीं बना तो वह इस्कान भक्त स्कूल संचालक रूपा रघुनाथ दास से मिले. यहां उन्होंने लड्डू गोपाल को बिना एडमिशन के ही शिक्षा दिलाने की अनुमति दे दी.
ईरिक्शा में जाते हैं, बच्चों के साथ बैठते हैं
स्कूल में लड्डू गोपाल का नाम बुच्चू गोपाल रखा गया है. रामगोपाल रोजाना ई रिक्शा से लड्डू गोपाल को स्कूल ले जाते हैं. साथ में उनकी किताबें—कापिंयां, पानी की बोतल और लंच भी साथ में जाता है. वह सामान्य बच्चों की तरह बेंच पर बैठकर पढ़ते हैं. प्रिंसिपल दीपिका शर्मा ने बताया कि हर साल परीक्षा परिणाम भी उन्हें दिया जाता है. स्कूल प्रबंधन की ओर से ड्रेस, स्कूल बैग, पुस्तक की भी व्यवस्था की जाती है. जो सुविधाएं दूसरे बच्चों को दी जाती हैं, वह सभी लड्डू गोपाल को भी दी जा रही हैं. उन्होंने बताया कि अब वह कक्षा तीन में आ गए हैं. रामगोपाल की ये भक्ति लोगों के बीच कौतूहल का विषय बनी हुई है.