
जन्मजात मूक बधिर बच्चों में कॉक्लियर इम्प्लांट होने से वे सामान्य बच्चों की तरह सुन और बोल सकते हैं। इसमें इम्प्लांट का एक तार दिमाग से जोडा जाता है, उसका दूसरा हिस्सा मैगनेट से जुडा होता है। इम्प्लांट लगने के बाद बच्चे सुनने लगते हैं, वे सुनने के साथ बोल सकें, इसके लिए दो साल तक स्पीच थैरेपी और मेपिंग कराई जाती है। इसमें सात से 12 लाख का खर्चा आता है। इसलिए आर्थिक रूप से कमजोर लोग अपने बच्चों के कॉक्लियर इम्प्लांट नहीं करा पा रहे थे। ऐसे में देश के कुछ सेंटरों को केंद्र सरकार ने फ्री में आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के लिए कॉक्लियर इम्प्लांट की सुविधा शुरू की है। ईएनटी विशेषज्ञ डॉ राजीव पचौरी ने बताया कि पांच साल तक के बच्चे जिनमें न सुन पाने के कारण बोलने की क्षमता विकसित नहीं हो सकी है। और 12 साल तक के बच्चे जो अच्छी तरह से बोल लेते हैं, लेकिन सुनने की क्षमता कम है। उनके कोक्लियर इम्प्लांट फ्री किए जा रहे हैं। इसके लिए रितिका ईएनटी सेंटर पर पंजीकरण कराया जा सकता है।
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