आगरालीक्स…आगरा में वट सावित्री की पूजा व्रत रख महिलाओं ने की पति की लंबी आयु के लए प्रार्थना. शहर के पार्श्वनाथ पंचवटी कॉलोनी ताजनगरी फेज दो पर सामूहिक पूजा….
प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ माह में कृष्ण पक्ष की अमावश्या तिथि के दिन वट सावित्री का व्रत किया जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, देवी सावित्री ने मौत के मुंह से अपने पति सत्यवान को बचाया था। ऐसे में इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए यह व्रत रखती हैं। मान्यता है कि इस दिन वट वृक्ष की पूजा एवं परिक्रमा करने से अखंड सौभाग्य और पति के दीर्घायु की प्राप्ति होती है।
पूजा में जल, मौली, रोली, कच्चा सूत, भिगोया हुआ चना, फूल तथा धूप का प्रयोग करें।
जल से वटवृक्ष को सींचकर उसके तने के चारों ओर कच्चा धागा लपेटकर तीन बार परिक्रमा करते है।
बड़ के पत्तों के गहने पहनकर वट सावित्री की कथा सुनते हैं।
भीगे हुए चनों का बायना निकालकर, नकद रुपए रखकर अपनी सास के पैर छूकर उनका आशीष प्राप्त करती हैं।

पुराणों में यह स्पष्ट किया गया है कि वट में ब्रह्मा, विष्णु व महेश तीनों का वास है। इसके नीचे बैठकर पूजन, व्रत कथा आदि सुनने से मनोकामना पूरी होती है। वट वृक्ष अपनी विशालता के लिए भी प्रसिद्ध है। शहर के ताजनगरी स्थित पंचवटी कॉलोनी में सभी महिलाओं ने वट वृक्ष के निचे बैठकर कथा के माध्यम से बताया कि वट सावित्री व्रत का हिन्दू धर्म में विशेष महत्व है। आज के ही दिन अखंड सौभाग्य के लिए वट वृक्ष के नीचे बैठकर सावित्री ने अपने पति सत्यवान को दोवारा जीवित कर लिया था सामूहिक पूजा में समस्त पंचवटी परिवार की महिला मौजूद रही.