आगरालीक्स…पबजी की लत लगने पर 10 वीं के छात्र ने अपनी मां की हत्या कर दी, दो दिन शव के साथ रहा, आपका बच्चे को भी मोबाइल गेम खेलने की लत नहीं है। यह घटना क्यों हुई, जानें आगरा के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. दिनेश राठौर से
लखनऊ में शनिवार को 16 साल के 10 वीं के छात्र ने अपनी मां की रात को गोली मार कर हत्या कर दी, नौ साल की बहन को धमकी दी कि वह किसी को कुछ नहीं बताएगी। मंगलवार को घर में बदबू फैली तो उसने पश्चिम बंगाल में तैनात अपने सैन्यकर्मी पिता को फोन कर बताया कि मां की किसी ने हत्या कर दी है। पुलिस ने पूछताछ की तो मामला खुल गया। इसमें सामने आया कि छात्र पबजी और मोबाइल का आदी था, घर से 10 हजार रुपये चोरी हो गए थे। मां को शक था कि छात्र ने ही चोरी की है शनिवार को उसकी पिटाई की थी।

पर्सनेलिटी डिसआर्डर घटना का हो सकता है कारण
आगरा के मानसिक स्वास्थ्य संस्थान एवं चिकित्सालय के प्रमुख अधीक्षक मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. दिनेश राठौर का कहना है कि यह सामान्य घटना नहीं है । जिस तरह से घटनाक्रम हुआ है उससे ऐसा लगता है कि बच्चा पर्सेनेलिटी डिसआर्डर का शिकार था। अक्सर लोग अपने बच्चों को मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल करने पर डांटते हैं, गेम खेलने पर पिटाई भी लगा देते हैं वे नाराज हो जाते हैं लेकिन इस तरह की घटना नहीं करते। जबकि जो लोग पर्सनेलिटी डिसआर्डर के शिकार होते हैं वे इस तरह के माहौल में भावनात्मक रूप से शुष्क होते जाते हैं। वे दूसरे के साथ घटना कर सकते हैं तो कई बार आत्मघाती कदम भी उठा सकते हैं।
वर्चुअल दुनिया को समझाने लगते हैं सही, नहीं होती समझ
18 साल तक बच्चे समझदार नहीं होते हैं। वे जब पबजी सहित अन्य मोबाइल गेम खेलते हैं या मोबाइल पर वीडियो देखते हैं तो वे इस वर्चुअल या कहें आभासी दुनिया को सही समझने लगते हैं उन्हें गेम खेलने में आनंद मिलता है और वर्चुअल दुनिया की घटनाओं को आत्मसात करने लगते हैं।
ये करें
बच्चों को अपना क्वालिटी टाइम दें
बच्चों को खेलकूद में भाग दिलवाएं, खुद भी बच्चों के साथ खेलें
बच्चों के साथ ही खाना खाएं
उनका रुटीन बना दें, समय से सभी काम करवाएं
बच्चों को डांटे नहीं उन्हें समझे, इसके बाद समस्या का निदान करें