आगरालीक्स…आगरा में 30 जून से श्री जगन्नाथ मंदिर में शुरू हो रहा नयन उत्सव. 25 फीट ऊंचा होगा श्री हरि का तालध्वज रथ, हजारों भक्त रथ को खींचकर जाएंगे मंदिर..नयन उत्सव में 15 दिन बाद दर्शन देंगे श्रीजगन्नाथ…
आगरा में 30 जून से श्री जगन्नाथ मंदिर में शुरू हो रहा नयन उत्सव
बीमार होने के कारण 15 दिन विश्राम के बाद 30 जुलाई को श्रीहरि बहन सुभद्रा व भाई बलराम के साथ भक्तों को नयन उत्सव में दर्शन देंगे। एक जुलाई को श्रीजगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। जिसके तहत बल्केश्वर महादेव मंदिर से रथयात्रा प्रारम्भ होकर कमला नगर स्थित श्रीजगन्नाथ मंदिर पहुंचेगी। यह जानकारी श्रीजगन्नाथ मंदिर (इस्कॉन आगरा) के अध्यक्ष अरविन्द स्वरूप दास ने श्रीजगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव के पोस्टर विमोचन कार्यक्रम के दौरान दी। भक्तों को नयन उत्सव व श्रीजगन्नाथ रथयात्रा के लिए आमंत्रित भी किया।
बताया कि 28 व 29 जून को शहर के विभिन्न क्षेत्रों में भक्तों को महोत्सव का निमंत्रण देने आमंत्रण यात्राएं निकाली जाएंगी। जिसमें मृदंग और मजीरों के साथ कीर्तन करते इस्कॉन के सदस्य भक्तों को श्रीजगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव में शामिल होने के लिए आमंत्रित करेंगे। 30 जून को कमला नगर स्थित श्रीजगन्नाथ मंदिर में नयन उत्सव का आयोजन होगा।
इस अवसर पर मुख्य रूप से शैलेन्द्र अगवाल, राहुल बंसल, कांता प्रसाद अग्रवाल, अखिल बंसल, ओम प्रकश अग्रवाल, अमित बंसल, विकास बंसल लड्डू, आशु मित्तल, स्वाति अग्रवाल, विपिन अग्रवाल, राजीव मल्होत्रा, अनिल चंद्र अग्रवाल, अनिल गुप्ता, गोपाल नारायण, ललित माधव प्रभु आदि उपस्थित थे।
14 जून से दलिया और खिचड़ी खा रहे जगन्नाथ जी
14 जून को स्नान यात्रा (श्रीजगन्नाथ महाभिषेक) के बाद भगवान जगन्नाथ जी अनअवसर कक्ष में बीमार होने के कारण विश्राम कर रहे हैं। जिस कारण भक्त दर्शन नहीं कर पा रहे हैं। 30 जून को नयम उत्सव के दिन भगवान जगन्नाथ दर्शन देंगे। इन 15 दिन के दौरान भगवान को बीमार होने के कारण विभिन्न प्रकार के काड़े (गिलोय, चिड़ेता, च्वनप्राश), दलिया और कालीमिर्च, अदरक का दूध दिया जा रहा है।
क्यों पड़ते हैं श्रीहरि बीमार
आगरा। इस्कॉन आगरा के अध्यक्ष अरविन्द स्वरूप ने बताया कि स्नान यात्रा में अत्यधिक स्नान के कारण श्रीहरि, बहन सुभद्रा व भी बलराम के साथ बीमार पड़ जाते हैं। लेकिन सत्यता यह है कि वह अपने परमभक्त माता दास की पीड़ा दूर करने के लिए बीमार पड़ते हैं। जो अपनी कड़ी भक्ति से अपनी बीमारी दूर करने के लिए भगवान से प्रार्थना करता है और श्रीहरि उसका दुख अपने ऊपर ले लेते हैं।