
गुरुवार को नगर निगम की छह सदस्यीय वर्किंग कमेटी का चुनाव हुआ। इसके लिए 10 प्रत्याशियों ने दावेदारी पेश की। सदन में निर्वाचन की कार्रवाई शुरू होते ही चार सदस्यों ने अपना नाम वापस ले लिया। इसके बाद निर्विरोध निर्वाचन हो गया। 43 पार्षद होने के बाद भी दो ही सदस्य वर्किंग कमेटी में शामिल हुए हैं। कांग्रेस के चार पार्षद हैं, पहले हुए अनुबंध के तहत कांग्रेस के एक सदस्य को चुन लिया गया, बसपा के दो और सपा के एक पार्षद को वर्किंग कमेटी के लिए चुना गया है।
ये चुने गए सदस्य
भाजपा के प्रतुल भार्गव वार्ड नंबर 81, मधुबाला अग्रवाल वार्ड नंबर 54, बीएसपी की नेमवती गोला वार्ड नंबर 75, हरि मोहन वार्ड नंबर 17 और कांग्रेस के रफत उल्लाह वार्ड नंबर 79, सपा के राजपाल सिंह वार्ड नंबर 49 को वर्किंग कमेटी में चुना गया है।
हर साल छह सदस्यों की विदाई
वर्किंग कमेटी में 12 सदस्य होते हैं, इसमें से छह सदस्यों की हर साल विदाई होती है। उनकी जगह नए सदस्य चुने जाते हैं। इस बार सपा की शालिनी शर्मा और हाजी बिलाल, बीजेपी के अशोक बंसल और जितेंद्र पाराशर, बीएसपी की रजनी माधव और मनोज कुमार सोनी वर्किंग कमेटी से विदा हुए हैं। वहीं वर्किंग कमेटी के लिए 10 सदस्यों ने दावेदारी पेश की थी। इसमें से सपा की क्षमा जैन सक्सेरा, सर्वेश चाहर, बीजेपी के राजीव कुमार सिंह और बीएसपी के नवाब सिंह मौर्य ने अपने नाम वापस ले लिए।
बडे प्रस्तावों पर वर्किंग कमेटी लेती है लेती है फैसला
नगर निगम में बडे प्रस्तावों पर वर्किंग कमेटी फैसला लेती है। इसलिए जिस दल के पार्षद ज्यादा है, उसके सदस्यों के वर्किंग कमेटी में पहुंचने की संभावना बढ जाती है। इस हिसाब से बीजेपी के पार्षद वर्किंग कमेटी में ज्यादा होने चाहिए, उनके सर्वाधिक 43 पार्षद हैं।
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