आगरालीक्स…आगरा में दीवानी कोर्ट से गैंगस्टर को छुड़ाकर ले जाने वाले दो इनामी बदमाश पुलिस ने पकड़े. जेल से ही ऐसे रची गई थी साजिश. जेल से मैसेंजर कॉल करता था विनय श्रोतिया…
आगरा में 13 जुलाई को पेशी के दौरान दीवानी परिसर से शातिर अभियुक्त विनय श्रोत्रिय को छुड़ाकर ले जानी वाली घटना में शामिल दो अभियुक्तों को पुलिस ने मुठभेड़ में अरेस्ट किया है. एसओजी, सीआईडब्ल्यू टीम, सर्विलांस व थाना पुलिस टीम के संयुक्त आपरेशन द्वारा घटना में शामिल 25—25 हजार के दो इनामी बदमाशों को पुलिस ने दो तमंचा मय 4 जिंदा व दो खोखा कारतूस के साथ अरेस्ट किया है. पुलिस ने इनकी मोटरसाइकिल भी बरामद की है. बता दें कि आगरा में 13 जुलाई को दीवानी कोर्ट में पेशी के दौरान ड्यूरीरत मुख्य आरक्षी अनुज प्रताप सिंह को घायल कर गैंगस्टर विनय श्रोत्रिया अपने दो तीन साथियों की मदद से फरार हो गया था. कोर्ट से गैंगस्टर के फरार होने से पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान उठे थे. इस संबंध में थाना न्यू आगरा में मुकदमा पंजीकृत किया गया.
बुधवार रात को एसओजी, सीआईडब्ल्यू व थाना पुलिस खंदारी में गश्त कर रही थी. इस दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि घटना में शामिल 25—25 हजार के दो इनामी बदमाश राहुल कश्यम व पिन्टा उर्फ शिवराम गांव लालगढ़ी में छुपे हुए हैं और मुख्य रास्ते से न जाकर लालगढ़ी से खासपुरा की तरफ जाने वाले रोड से कमला नगर होकर फिरोजाबाद जाने की फिराक में हैं. इस पर पुलिस टीमें बताए गए स्थान पर छुप गईं. कुछ समय बाद लालगढ़ी से बाइक आती दिखी. बाइक पास आने पर पुलिस टीम बाहर निकल आई और रोकने का प्रयास किया पुलिस को देख बाइक सवार सकपका गए और स्पीड बढ़ाकर भागने लगे. भागते समय उन्होंने जान से मारने की नीयत से पुलिस टीम पर फायर किए. जवाब में पुलिस ने भी फायर किया और चारों ओर से घेरकर दोनों अभियुक्तों को अरेस्ट कर लिया.
पकड़े गए बदमाशों के नाम
राहुल कश्यप पुत्र किशोरीलाल निवासी इंद्रपुरी जलेसर रोड फिरोजाबाद
पिन्टा उर्फ शिवराम यादव मिन्टा यादव पुत्र राजकुमार निवासी दौलतपुर थाना नारखी फिरोजाबाद
इस तरह भगा ले गए थे शातिर विनय को
पुलिस पूछताछ में राहुल कश्यप ने बताया कि वह पूर्व में भी जेल गया था जहां उसकी मुलाकात विनय श्रोत्रिया से हुई थी. मैं जमानत पर बाहर आ गया. उसने बताया कि वह, पिन्टा, सोनू कुशवाह व छोटे उर्फ रिषभ के साथ—साथ विनय से भी मिलने उसकी कई तारीख से दीवानी आता था व जेल में भी मैं विनय श्रोतिया से मिलाई करने जाता था, जहां हम दोनेां ने भागने की योजना बनाई. उसने बताया कि हर मिलाई पर विनय श्रोत्रिया मुझे दो से तीन हजार रुपये खर्चे के लिए देता था तथा वह जेल से मैसेंजर कॉल व पीएनटी काल करके मुझे अपनी तारीख पर आने के लिए कहता था. हम पैसों के लालच में उससे तारीख पर मिलने आते थे.
ढाई लाख रुपये का दिया था लालच
राहुल कश्यप ने बताया कि पिछली तारीख पर भी उसने हमें जेल से भगा कर ले चलने के लिए कहा था लेकिन हमने मना कर दिया था. इस पर विनय ने हमको ढाई लाख रुपये देने के लिए कहा था, जिससे हम लालच में आ गए. 13 जुलाई को जब वह पेशी पर आया तो हम, पिन्टा, सोनू व छोटे दीवानी के गेट नंबर एक पर हवालात के पास मौजूद थे. जैसे ही विनय श्रोत्रिया को पेश करने के लिए पुलिसवाला लेकर चला तो विनय श्रोतिया ने सोनू के कान में कहा कि बाइक को गेट नंबर चार पर ले आओ. इस पर पिन्टा बाइक को गेट नंबर चार पर ले आया. विनय श्रोतिया पुलिस वाले को गच्चा देकर बाइक पर आकर बैठ गया तथा मैं उसके पीछे बैठ गया. हम सबसे पहले भदावर हाउस से एसआरके मॉल् वाले रास्ते से सिकंदरा से राया फाटक हाते हुए बम्बे के सहारे लिंक रोड होते हुए गुड्डू पहलवान के घर मथुरा पहुंचे. जहां पर उसके पिता ने कहा कि गुड्डू पहलवान फरारी काट रहा है तो हम तीनों वहां से निकलकर गुड्डू के दोस्त हरिदास के यहां पहुंचे. यहां से विनय ने हरिदास के फोन से किसी को फोन भी किया. हरिदास ने कहा कि उसकी गुड्डू पहलवान से खटपट हो गई है तो हम लोग वहां से निकल गए. उसके बाद आगे चलरक एक गांव में पहुंचे, जिसे सिर्फ विनय श्रोतिया जानता था. हम रात को वहां पर रुके. जिसके यहां रुके विनय उसको चौधरी—चौधरी कहकर बुला रहा था और अपना नाम राजेश यादव बताया था. सुबह यहां से हम सासनी के पास एक गांव में गए जहां से एक किलोमीटर दूर भोलेबाबा का कार्यक्रम हो रहा था. यहां से विनय श्रोतिया हम दोनों को बैठाकर अकेले कहीं गया और दो तमंचे 315 बोर के व 6 अवैध कारतूस 315 बोर लेकर आया और हम दोनों को दे दिए थे जो कि हमसे बरामद हुए हैं. उसमे बाद हम मथुरा में गोवर्धनजी मार्ग पर रात्रि विश्राम किया और फिर अगले दिनसुबह खंदौली होते हुए बरहन तथा वहां से शिकोहाबाद पहुंचे जहां पिन्टा के भाई के साले के पास हम दोनों को छोड़ा तथा इसके बाद विनय कहीं चला गया और दो घंटे बाद नहा धोकर व कपड़े बदलकर आया था. इसके बाद हम तीनों बाइक से ही फरिहा होते हुए अवागढ़ पहुंचे जहां चौराहे से 100 मीटर पहले पेट्रोल पंप के बगल में गली पर उतार दिया. यहां विनय श्रोतिया ने उसे 18 हजार रुपये दिए तथा बाकी रुपये बाद में देने के लिए बोला और विनय श्रोतिया को छोड़कर हम दोनों लोग फिरोजाबाद की तरफ आ गए. यहां हम जगह बदल बदल कर रते थे.
राहुल ने बताया कि विनय श्रोतिया द्वारा दिए गए रुपयों में से कुछ रुपये खर्च हो गए तथा कुछ मैंने अपनी मां को दे दिए जिससे मेरी मां मेरी पैरवली कर रही थी व मेरी भावी व मेरा भाई सिन्कू उर्फ पुष्पेंद्र व मेरे भाई सिन्कू के साले का दामाद दयाकिशोर व मेरे मामा का लड़का पूरनसिंह व अशोक, रवि यादव द्वारा हमारे लिए खाने पीने की व्यवस्था की जाती थी. विनय श्रोतिया को भी उपरोक्त् व्यक्तियों द्वारा खाने पीने की सामग्री रुपये की व्यवस्था की गई थी. मेरी मां मीरा मेरी पैरवी करती है तथा वह लगातार मेरे संपर्क में रही तथा मुझे रास्ता बताती रही कि अब क्या करना है. पूरन सिंह मेरे मामा का लड़का हमारे लिए खाना पहुंचाता था, जहां भी हम रुके हाते थे. इस दौरान हम मामा अशोक के घर भी रुके थे.